कुछ आकलनों के अनुसार अप्रैल 2026 में रूस को लगभग 116 वर्ग किलोमीटर का शुद्ध क्षेत्रीय नुकसान भी हुआ—जो अगस्त 2024 के कुर्स्क अभियान के बाद पहली बार हुआ।
विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट कई कारणों से आई है, जिनमें यूक्रेनी जवाबी हमले, मजबूत रक्षा पंक्तियाँ और रूस की रसद व बुनियादी ढांचे पर लंबी दूरी के हमले शामिल हैं।
ड्रोन इस युद्ध की सबसे निर्णायक तकनीकों में से एक बन चुके हैं। दोनों पक्ष अब बड़े पैमाने पर मानव रहित हवाई हमले करते हैं, जिनमें कभी‑कभी एक ही अभियान में सैकड़ों ड्रोन शामिल होते हैं।
यूक्रेन ने रूस के अंदर भी बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं। एक उदाहरण में रूसी अधिकारियों के अनुसार 550 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन कई रूसी क्षेत्रों—जिसमें मॉस्को के आसपास के इलाके भी शामिल थे—को निशाना बनाते हुए भेजे गए। यह युद्ध के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक माना गया।
यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन यूनिट्स अब रूसी सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचाने और उनके अभियानों को बाधित करने का प्रमुख साधन बन चुकी हैं। हाल के महीनों में बड़ी संख्या में रूसी सैनिक हताहत होने में इन प्रणालियों की अहम भूमिका रही है।
यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा प्रणाली—खासतौर पर तेल रिफाइनरियों और निर्यात ढांचे—को रणनीतिक लक्ष्य बनाना भी तेज कर दिया है।
रॉयटर्स आधारित रिपोर्टों के अनुसार, मई 2026 में यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद मध्य रूस की लगभग सभी प्रमुख तेल रिफाइनरियों को उत्पादन रोकना या घटाना पड़ा। प्रभावित संयंत्रों की कुल क्षमता 83 मिलियन टन वार्षिक प्रसंस्करण से अधिक है—जो रूस की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक चौथाई है।
इन हमलों से ईंधन उत्पादन कम हुआ और रूस की तेल आपूर्ति श्रृंखला के कुछ हिस्सों में व्यवधान आया। ऊर्जा क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण लक्ष्य है क्योंकि रूस की सरकारी आय का बड़ा हिस्सा तेल और गैस करों से आता है।
ऊर्जा ढांचे पर हमले ऐसे समय हो रहे हैं जब रूस की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था पहले से ही वित्तीय दबाव झेल रही है।
2026 के पहले चार महीनों में रूस का संघीय बजट घाटा लगभग 5.88 ट्रिलियन रूबल (करीब 79 अरब डॉलर) तक पहुंच गया—जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है।
वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बावजूद बढ़ते सैन्य खर्च और ऊर्जा उत्पादन में व्यवधान ने रूस की वित्तीय स्थिति को पूरी तरह स्थिर नहीं होने दिया। विश्लेषकों के अनुसार बुनियादी ढांचे पर हमलों और बढ़ते खर्च का संयुक्त प्रभाव रूस की वित्तीय प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।
इन सभी घटनाओं को मिलाकर देखें तो यह किसी निर्णायक मोड़ से ज्यादा गति में बदलाव का संकेत देती हैं।
कुपियांस्क और ज़ापोरिज़्झिया के पास यूक्रेनी जवाबी हमले, रूस की धीमी पड़ती क्षेत्रीय बढ़त, और रूस के तेल ढांचे पर दूर तक मार करने वाले हमले यह दिखाते हैं कि कीव अब युद्धक्षेत्र और रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था—दोनों पर प्रभाव डालने की क्षमता बढ़ा रहा है।
इसके बावजूद रूस के पास अब भी यूक्रेन में बड़ी सैन्य तैनाती है और कई मोर्चों पर उसके हमले जारी हैं। युद्ध अभी भी एक धीमी और थकाऊ क्षरण‑युद्ध (attritional conflict) बना हुआ है, जहां छोटे‑छोटे क्षेत्रीय बदलाव, रसद पर हमले और आर्थिक दबाव ही लंबे समय में परिणाम तय कर सकते हैं।
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