कुछ दिनों बाद ADNOC ने बताया कि जलडमरूमध्य से गुजरते समय उसके दो और जहाजों पर हमला हुआ। यूएई ने इन घटनाओं के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया, हालांकि रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में किसी के घायल होने या मारे जाने की सूचना नहीं थी।
इन घटनाओं का क्रम अबू धाबी के लिए महत्वपूर्ण था। इससे मामला केवल जलडमरूमध्य में गुजरने वाले सामान्य कारोबारी जहाजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूएई के अपने राज्य-संबद्ध ऊर्जा और नौवहन हितों तक पहुंच गया। इसी वजह से कथित मिसाइल प्रक्षेपण को यूएई ने तनाव बढ़ने का अगला चरण माना।
यूएई अधिकारियों के मुताबिक, दोनों मिसाइलें समुद्र में गिरीं और किसी जमीनी लक्ष्य को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं थी। अमीराती आकलनों में कहा गया कि उनका संभावित निशाना भूमि के बजाय समुद्री यातायात या नौवहन हो सकता था।
फिर भी यूएई ने इसे अलग-थलग घटना के रूप में नहीं देखा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि व्यापार और वित्तीय संबंधों पर रोक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को कमजोर करने वाले “क्षेत्रीय तनाव” के मद्देनजर लगाई गई है। यह रोक “अगले आदेश तक” लागू रहेगी।
हालांकि, इस मामले में जिम्मेदारी अभी विवादित है। यूएई और कई रिपोर्टों ने मिसाइल प्रक्षेपण को ईरान से जोड़ा है, जबकि तेहरान ने आरोप से इनकार किया है। उपलब्ध रिपोर्टिंग यह स्थापित करती है कि यूएई ने मिसाइलों का पता चलने की जानकारी दी और उसके बाद आर्थिक रोक की घोषणा की; वह स्वतंत्र रूप से यह निर्णायक रूप से साबित नहीं करती कि मिसाइलें किसने दागीं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को वैश्विक समुद्री बाजारों से जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। खाड़ी देशों के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। इसलिए यहां सुरक्षा संकट का असर केवल क्षेत्रीय देशों पर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर भी पड़ सकता है।
17 जून के एक समझौता ज्ञापन में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और ईरान की ओर से 60 दिनों तक वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने की बात कही गई थी। लेकिन यह व्यवस्था अस्थायी थी और जलडमरूमध्य के दीर्घकालिक प्रशासन या सुरक्षा का समाधान नहीं करती थी।
इसके बाद ईरान और ओमान ने नए नौवहन मार्गों पर बातचीत की। लेकिन ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल ओमान के साथ समझौता होने से जलडमरूमध्य अपने-आप पूरी तरह नहीं खुलेगा। तेहरान ने अमेरिका से नौसैनिक नाकेबंदी और प्रतिबंध हटाने, अमेरिकी सेनाओं की वापसी तथा युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे जैसी शर्तें रखीं।
होर्मुज़ में तनाव बढ़ने के साथ जहाजों की आवाजाही में तेज गिरावट दर्ज की गई। CBS News ने Kpler के आंकड़ों के हवाले से बताया कि एक सप्ताह में पुष्टि की गई आवाजाही 19.5 प्रतिशत घटकर 95 पारगमन रह गई। एक रविवार को केवल तीन जहाज जलडमरूमध्य से गुजरे।
किसी समुद्री मार्ग का प्रभावी रूप से ठप होना हमेशा औपचारिक कानूनी बंदी से ही नहीं होता। अगर जहाजों के चालक दल, बीमा कंपनियां और जहाज मालिक किसी मार्ग को अत्यधिक जोखिमपूर्ण मानते हैं, तो वे वहां से गुजरना रोक सकते हैं। जून के अस्थायी समझौते के बाद भी आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे रही थी। PortWatch के अनुसार, 18 जून से 5 जुलाई के बीच पहले 18 दिनों में केवल 513 जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया—औसतन 28 जहाज प्रतिदिन।
यूएई के लिए ADNOC से जुड़े जहाजों पर बार-बार हुए कथित हमलों ने दोहरा जोखिम पैदा किया: एक ओर राष्ट्रीय वाणिज्यिक हित प्रभावित हुए, दूसरी ओर ऊर्जा निर्यात के लिए जरूरी समुद्री मार्ग की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। व्यापार और वित्तीय संबंध रोककर अबू धाबी ने यह राजनीतिक संदेश दिया कि अमीराती जहाजों की सुरक्षा खतरे में रहते हुए ईरान के साथ सामान्य कारोबारी संबंध जारी नहीं रह सकते।
यूएई का कदम केवल एक कथित मिसाइल घटना की प्रतिक्रिया नहीं दिखता। इसमें तीन प्रमुख चिंताएं शामिल हैं:
इस तरह यूएई की आर्थिक रोक एक व्यापक समुद्री-सुरक्षा संकट से जुड़ा राजनीतिक और आर्थिक कदम है। हालांकि, 19 जहाजों को निशाना बनाए जाने, रोजाना केवल छह जहाजों के गुजरने, अन्य वाणिज्यिक जहाजों पर हुई मौतों या चोटों और क़ेश्म द्वीप के पास किसी टैंकर को हिरासत में लिए जाने जैसे दावे उपलब्ध मजबूत स्रोतों से पर्याप्त रूप से पुष्ट नहीं हैं। इन्हें स्थापित तथ्यों के बजाय अपुष्ट रिपोर्टों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राजनयिक स्थिति भी अनिश्चित बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच उस समय कोई सक्रिय बातचीत नहीं चल रही थी। इसी बीच ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी कि अमेरिकी सैन्य अभियानों में सहायता या सुविधा देना उन्हें संघर्ष का पक्ष बना सकता है।