रूबियो ने ईरान के उस प्रस्ताव को भी खारिज किया है जिसमें जहाज़ों से गुजरने के लिए अनुमति या शुल्क जैसी व्यवस्था की बात कही गई थी। उनके अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और इस तरह का “टोल सिस्टम” स्वीकार्य नहीं होगा।
हालांकि अभी कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन अधिकारियों और ड्राफ्ट प्रस्तावों पर आधारित रिपोर्टों में कुछ संभावित शर्तों का उल्लेख किया गया है।
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक समझौते में करीब 60 दिन का युद्धविराम शामिल हो सकता है। इसका उद्देश्य सैन्य तनाव को रोकना और कूटनीति के लिए समय देना है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। प्रस्तावित ढांचे में संभवतः शामिल हो सकता है:
कुछ रिपोर्टों के अनुसार समझौता लागू होने के करीब 30 दिनों के भीतर जहाज़ों की आवाजाही युद्ध‑पूर्व स्तर तक लौट सकती है।
इसके बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी और कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दे सकता है। इससे ईरान को बातचीत की अवधि के दौरान तेल निर्यात फिर से शुरू करने का मौका मिल सकता है।
इस ढांचे को कुछ रिपोर्टों में “रिलीफ फॉर परफॉर्मेंस” मॉडल कहा गया है—यानी आर्थिक राहत तभी मिलेगी जब ईरान समझौते के तहत तय कदमों का पालन करेगा।
मौजूदा मसौदे के अनुसार परमाणु विवाद को तुरंत हल करने के बजाय बाद के चरण में बातचीत के लिए टाला जा सकता है, ताकि पहले क्षेत्रीय तनाव कम किया जा सके।
कुछ रिपोर्टों में ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को आंशिक रूप से जारी करने या व्यापक प्रतिबंध राहत जैसे प्रस्तावों का भी उल्लेख है। हालांकि इन विवरणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता को लेकर अपेक्षाकृत आशावादी रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि समझौता “काफी हद तक तय हो चुका है” और अब केवल अंतिम विवरणों पर चर्चा हो रही है।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि समझौते के तहत होरमुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा, जो मौजूदा ऊर्जा संकट का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
फिर भी अधिकारियों का कहना है कि अंतिम समझौते से पहले कई कठिन मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।
ईरान ने रूबियो के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान का कहना है कि:
ईरानी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूरेनियम संवर्धन जैसे राष्ट्रीय अधिकारों पर समझौता नहीं किया जाएगा, हालांकि वे कूटनीतिक समाधान के लिए बातचीत जारी रखने को तैयार हैं।
वर्तमान वार्ता महीनों से बढ़ते तनाव और असफल कूटनीतिक प्रयासों के बाद शुरू हुई। महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल हैं:
हालांकि उस शुरुआती प्रस्ताव को वॉशिंगटन ने इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि उसमें परमाणु मुद्दे पर चर्चा को बाद के लिए टाल दिया गया था—जिसे अमेरिका दीर्घकालिक समझौते के लिए जरूरी मानता है।
मौजूदा संकेत बताते हैं कि दोनों देश एक अस्थायी कूटनीतिक ढांचे के करीब पहुँच सकते हैं, लेकिन यह अभी अंतिम समाधान नहीं होगा। अगर मसौदा समझौता लागू होता है, तो संभवतः इसमें शामिल होंगे:
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