LinkedIn के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर हरि श्रीनिवासन के अनुसार, ‘slop’ की परिभाषा स्थिर नहीं है। उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया से कंपनी यह समझने की कोशिश करेगी कि कौन-सा कंटेंट फ़ीड को कम उपयोगी बना रहा है और उसके मॉडल को किस तरह सुधारा जाए ।
यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है: LinkedIn हर AI-सहायता प्राप्त पोस्ट को हटाने की बात नहीं कर रहा। निशाना मुख्य रूप से उस सामग्री पर है जो चमकदार भाषा में लिखी हो, लेकिन उसमें मौलिक विचार, वास्तविक अनुभव या उपयोगी जानकारी न हो।
नए रिपोर्टिंग बटन के साथ LinkedIn ने अपना “Enhance with AI” री-राइट बटन भी हटा दिया । यह वही टूल था जिसे कंपनी पहले हर पोस्ट पर प्रमुखता से दिखाती थी और जो उपयोगकर्ता के ड्राफ्ट को पूरी तरह AI की मदद से दोबारा लिख सकता था।
इसके स्थान पर LinkedIn ने एक हल्का प्रूफरीडिंग टूल रखा है। यह पूरे पोस्ट को नए सिरे से लिखने के बजाय छोटे संपादन और भाषा-सुधार के सुझाव देता है ।
कंपनी ने बड़े पैमाने पर होने वाले ऑटोमेशन को भी ब्लॉक किया है और स्वचालित कमेंटिंग टूल्स पर नियंत्रण कड़ा किया है । इसका उद्देश्य ऐसे खातों और सेवाओं को रोकना है जो कम समय में बड़ी संख्या में पोस्ट या टिप्पणियां प्रकाशित कर वास्तविक उपयोगकर्ता गतिविधि का आभास देते हैं।
जुलाई 2026 में AI-डिटेक्शन कंपनी Pangram Labs ने अप्रैल से जून 2026 के बीच LinkedIn, X, Medium, Reddit और Substack पर लगभग 10 लाख पोस्ट स्कैन किए। अध्ययन में 250 शब्दों या उससे अधिक लंबे LinkedIn पोस्टों में 41% पूरी तरह AI-जनरेटेड पाए गए—यह अध्ययन में शामिल प्रमुख प्लेटफॉर्मों में सबसे ऊंची दर थी ।
LinkedIn के पोस्ट पूरे डेटा सेट का करीब एक-तिहाई थे, लेकिन Pangram द्वारा पहचाने गए सभी AI-निर्मित लंबे पोस्टों में उनका हिस्सा 62% था । एक अलग 2025 अध्ययन में Originality.ai ने लंबे LinkedIn पोस्टों में AI-निर्मित सामग्री का अनुमान 53.7% लगाया था । अलग-अलग अध्ययनों की पद्धति और सैंपल अलग हैं, इसलिए इन आंकड़ों को सटीक प्लेटफॉर्म-व्यापी गिनती के बजाय समस्या के पैमाने का संकेत समझना चाहिए।
LinkedIn पहले से ही ऐसे AI-निर्मित कंटेंट की पहुंच कम करने के लिए एल्गोरिदमिक दबाव का इस्तेमाल कर रहा है। कंपनी की ओर से 94% डिटेक्शन सटीकता का दावा किया गया है । फ्लैग की गई सामग्री को पूरी तरह हटाने के बजाय उसकी पहुंच को लेखक के मौजूदा नेटवर्क तक सीमित किया जा सकता है, ताकि वह व्यापक सिफारिशों में कम दिखाई दे।
AI-निर्मित सामग्री की बाढ़ से निपटने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्मों ने अलग रणनीतियां अपनाई हैं:
एक व्यापक Stanford Internet Observatory स्कैन में 2026 में प्रकाशित नई वेब सामग्री के 58% हिस्से में AI-निर्माण के संकेत मिले। यह निष्कर्ष करीब 14 अरब इंडेक्स किए गए वेब पेजों के अध्ययन पर आधारित बताया गया है ।
LinkedIn का मौजूदा रुख AI के हर इस्तेमाल पर रोक लगाने के बजाय ऐसे कंटेंट को सीमित करने का है जिसमें लेखक की अपनी सोच और अनुभव दिखाई नहीं देता। किसी पोस्ट को व्याकरण सुधारने के लिए AI की मदद लेना और बिना संपादन के एक जैसा, सामान्य और बड़े पैमाने पर तैयार किया गया पोस्ट प्रकाशित करना—दोनों को एक जैसा नहीं माना जा रहा।
फिर भी, उपयोगकर्ता रिपोर्टिंग और स्वचालित डिटेक्शन पर निर्भरता नए सवाल खड़े करती है। ‘AI slop’ का आकलन हमेशा स्पष्ट नहीं होता और गलत फ्लैग के कारण मौलिक लेखकों की पहुंच भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल LinkedIn का प्रयोग यह तय करेगा कि पेशेवर सोशल नेटवर्क पर भरोसा और व्यक्तिगत आवाज़ बचाने के लिए AI को सहायक रखा जा सकता है या नहीं—और उसकी सीमाएं कौन तय करेगा।