अलग-अलग रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि Nvidia ने SK hynix और Micron, दोनों के साथ DRAM और HBM के लिए बहुवर्षीय समझौते किए हैं। इन्हें पूरी तरह सार्वजनिक किए गए कॉन्ट्रैक्ट के बजाय रिपोर्ट किए गए समझौतों के रूप में देखना चाहिए। खासकर Micron से जुड़ी कथित डील की मात्रा, मूल्य-ढांचा और अवधि अभी सामने नहीं आई है।
HBM AI सिस्टम में आसानी से बदली जा सकने वाली सामान्य कमोडिटी नहीं है। इसे बहुत अधिक बैंडविड्थ, कम बिजली खपत, उन्नत पैकेजिंग और एक्सेलेरेटर प्लेटफॉर्म के साथ संगतता जैसी कठिन आवश्यकताएं पूरी करनी होती हैं। यदि मेमोरी की सप्लाई देर से आए या नई पीढ़ी समय पर क्वालिफाई न हो पाए, तो इसका असर पूरे AI सिस्टम की शिपमेंट पर पड़ सकता है।
इसीलिए Nvidia के लिए पहले से तय आवंटन बेहद मूल्यवान है। बहुवर्षीय प्रतिबद्धता भविष्य के सिस्टम के लिए उपलब्ध मेमोरी की बेहतर दृश्यता देती है और यह जोखिम घटाती है कि Nvidia का एक्सेलेरेटर उत्पादन HBM सप्लाई से आगे निकल जाए। मेमोरी निर्माताओं के लिए भी ऐसे ग्राहक-समझौते क्षमता योजना बनाने और महंगी फैक्ट्री तथा उपकरणों में निवेश को उचित ठहराने में मदद करते हैं।
Micron की हालिया टिप्पणियां बाजार के असंतुलन को दिखाती हैं। कंपनी ने कहा है कि उसके बड़े ग्राहक जितनी मेमोरी मांग रहे हैं, वह उपलब्ध सप्लाई से काफी अधिक है। एक रिपोर्ट के अनुसार डेटा-सेंटर ग्राहकों की मांग उपलब्ध प्रतिबद्धताओं से लगभग 50% ज्यादा थी। Micron CEO Sanjay Mehrotra ने यह भी कहा है कि AI के लिए मेमोरी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन सिस्टमों को अधिक मेमोरी, तेज़ मेमोरी और कम-ऊर्जा वाली मेमोरी चाहिए।
AI बूम मेमोरी बेचने का पुराना तरीका बदल रहा है। DRAM की बिक्री में पहले अक्सर छोटी अवधि या एक-वर्षीय समझौते होते थे। अब सप्लायर और बड़े ग्राहक तीन से पांच साल की व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें वॉल्यूम, कीमत और वित्तीय प्रतिबद्धताओं की शर्तें शामिल हो सकती हैं।
ऐसे लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट में न्यूनतम मूल्य, मूल्य-सीमा, अग्रिम भुगतान, गारंटी या take-or-pay प्रावधान हो सकते हैं। Take-or-pay का अर्थ है कि ग्राहक तय मात्रा खरीदने और उसका भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध रहता है, भले ही बाद में उसकी जरूरत कुछ कम हो जाए।
इस बदलाव का लाभ और जोखिम दोनों हैं:
इसलिए सप्लाई समझौता हमेशा ऊंची कीमत या असीमित उपलब्धता की गारंटी नहीं होता। यह खास उत्पादों और तय वॉल्यूम के लिए अनुबंधीय स्पष्टता देता है, लेकिन उत्पादन में देरी, क्वालिफिकेशन की समस्या या मांग में गिरावट का जोखिम खत्म नहीं करता।
Micron ने वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही की रिपोर्टिंग अवधि तक 16 रणनीतिक ग्राहक समझौते किए थे। Reuters के अनुसार इनकी कुल कीमत लगभग 22 अरब डॉलर थी। अन्य रिपोर्टों में इन्हें पांच-वर्षीय संरचना वाला बताया गया है, जिसमें कंपनी के मार्जिन की सुरक्षा के लिए विशेष मूल्य-प्रावधान शामिल हैं।
इन समझौतों को Nvidia के साथ किए गए किसी अलग, सार्वजनिक रूप से पुष्ट पांच-वर्षीय कॉन्ट्रैक्ट के रूप में नहीं देखना चाहिए। ये मेमोरी बाजार में फैल रहे व्यापक कॉन्ट्रैक्टिंग मॉडल का संकेत हैं। Micron का कहना है कि उसके बहुवर्षीय रणनीतिक ग्राहक समझौते वित्तीय प्रदर्शन को अधिक टिकाऊ और अनुमानित बनाने में मदद करेंगे।
हालांकि, यह मॉडल कुछ जोखिम ग्राहकों पर भी डालता है। यदि कोई खरीदार AI तैनाती की जरूरत से अधिक क्षमता आरक्षित कर ले और मांग धीमी पड़ जाए, तो उसे तय खरीद के लिए भुगतान करना पड़ सकता है या कठिन पुनर्वार्ता करनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, पर्याप्त मात्रा पहले से सुरक्षित न करने वाला खरीदार मांग बढ़ने पर अतिरिक्त HBM आकर्षक कीमत पर हासिल नहीं कर पाएगा।
Micron के वित्तीय नतीजे बताते हैं कि मेमोरी निर्माता लंबे और कड़े समझौते रखने की स्थिति में क्यों हैं। कंपनी ने 28 मई, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में रिकॉर्ड 41.46 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया।
अमेरिका में Micron की विस्तार योजना पहले लगभग 150 अरब डॉलर के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग निवेश और 50 अरब डॉलर के अनुसंधान एवं विकास निवेश की थी। जुलाई 2026 में कंपनी ने कहा कि 2035 तक अमेरिका में उसका नियोजित निवेश बढ़कर 250 अरब डॉलर से अधिक हो गया है।
यह निवेश लंबी अवधि का जवाब है, तत्काल समाधान नहीं। Micron को उम्मीद है कि उसकी पहली Idaho फैब से 2027 के मध्य में शुरुआती वेफर निकलेंगे, लेकिन उत्पादन का सार्थक विस्तार मुख्य रूप से 2028 में होगा। दूसरी Idaho फैब से पहला वेफर 2028 के अंत में आने का लक्ष्य है।
नई फैब से सप्लाई बढ़ने में समय लगता है। क्लीनरूम बनाना, उपकरण लगाना, निर्माण प्रक्रिया को क्वालिफाई करना और उत्पादन क्षमता को स्थिर स्तर तक पहुंचाना कई चरणों वाली प्रक्रिया है। Micron ने कहा है कि 2028 में सप्लाई धीरे-धीरे बेहतर हो सकती है, लेकिन कंपनी के पास अभी यह स्पष्ट अनुमान नहीं है कि आपूर्ति मांग से पूरी तरह कब आगे निकल पाएगी।
इसलिए 2028 को निश्चित अंतिम तारीख के बजाय योजना बनाने की समय-सीमा समझना चाहिए। यदि AI सिस्टमों में मेमोरी की खपत उत्पादन से तेज़ बढ़ती रही, तो कमी आगे भी खिंच सकती है। इसके उलट, AI तैनाती धीमी पड़ने, ऑर्डर घटने या नई क्षमता के अपेक्षा से तेज़ शुरू होने पर दबाव पहले कम हो सकता है।
लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट कुछ अनिश्चितताओं से दोनों पक्षों की रक्षा करते हैं, लेकिन गलत अनुमान के असर को बढ़ा भी सकते हैं। यदि क्लाउड कंपनियां और AI डेवलपर अत्यधिक आशावादी योजनाओं के आधार पर बड़ी मात्रा में क्षमता आरक्षित कर लें और 2028 के बाद नई फैब से उत्पादन भी तेजी से आने लगे, तो बाजार कमी से अतिरिक्त इन्वेंटरी की स्थिति में जा सकता है।
ऐसे परिदृश्य में मेमोरी कीमतों, फैक्ट्री उपयोग और कॉन्ट्रैक्ट वार्ता पर दबाव पड़ेगा। खरीदार कम कीमत या कम वॉल्यूम की मांग कर सकते हैं, जबकि सप्लायर क्षमता विस्तार में भारी निवेश के बाद कमजोर मार्जिन का सामना कर सकते हैं।
इस पूरी दौड़ का केंद्रीय सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Nvidia आज पर्याप्त HBM सुरक्षित कर पाती है या नहीं। असली सवाल यह है कि दशक के दूसरे हिस्से में मेमोरी कंपनियों द्वारा जो क्षमता तैयार की जा रही है, उसे absorb करने के लिए AI मेमोरी की वास्तविक खपत कितनी तेज़ी से बढ़ेगी। Nvidia की रिपोर्ट की गई व्यवस्थाएं और SK hynix के साथ उसका सह-विकास समझौता दिखाते हैं कि सप्लाई कितनी रणनीतिक हो चुकी है—लेकिन वे मेमोरी उद्योग के चक्रीय उतार-चढ़ाव को खत्म नहीं करते।