यह 2021 में घोषित साझेदारी से आगे बढ़ने वाला पहला न्यूरोसाइंस प्रोजेक्ट है।
यह उपलब्धि किसी एक प्रयोग या संयोगवश मिली खोज का परिणाम नहीं थी। Recursion, Roche और Genentech ने बड़े पैमाने पर जैविक डेटा तैयार किया और उसे AI मॉडल के साथ जोड़कर एक व्यवस्थित खोज-प्रक्रिया बनाई। इसके मुख्य चरण इस प्रकार थे:
टीम ने मानव-प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल (hiPSC) से विकसित 1 ट्रिलियन से अधिक न्यूरॉन कोशिकाओं पर काम किया। वैज्ञानिकों ने 17,000 से अधिक प्रोटीन-कोडिंग जीनों में से प्रत्येक को अलग-अलग निष्क्रिय करने के लिए पूरे जीनोम पर CRISPR नॉकआउट किया। इसके बाद कोशिकाओं की 3 करोड़ से अधिक इमेज जुटाई गईं और इस पूरे फेनोटाइपिक मानचित्र को समझने के लिए एक कस्टम फाउंडेशन मॉडल प्रशिक्षित किया गया।
यह डेटा अक्टूबर 2025 में सामने आए Microglia Map से अलग है। Microglia Map में मस्तिष्क की प्रतिरक्षा कोशिकाओं—माइक्रोग्लिया—पर ध्यान दिया गया था। दोनों मानचित्र Roche और Genentech के साथ हुई उसी साझेदारी के तहत बनाए गए, लेकिन जो टार्गेट अब शुरुआती दवा-खोज कार्यक्रम में पहुंचा है, वह बड़े Neuron Map से निकला है।
पारंपरिक शोध में वैज्ञानिक अक्सर एक समय में एक परिकल्पना की जांच करते हैं। इसके विपरीत, फाउंडेशन मॉडल ने हर जीन में किए गए बदलाव की तुलना न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के ज्ञात जैविक कारणों और संबंधित मार्गों से की। फिर संभावित टार्गेट्स को इस आधार पर रैंक किया गया कि उनका बीमारी से जुड़े जैविक तंत्रों के साथ कितना मजबूत संबंध है।
इससे शोधकर्ताओं को केवल पहले से चर्चित जीनों तक सीमित रहने के बजाय पूरे जीनोम में नए संबंध तलाशने का अवसर मिला।
AI की भविष्यवाणी को सीधे दवा-टार्गेट नहीं माना गया। आगे बढ़ने से पहले उम्मीदवारों को तीन अलग-अलग प्रयोगात्मक कसौटियों से गुजरना पड़ा:
केवल इन तीनों स्तरों पर सफल उम्मीदवार ही आगे बढ़े। इसलिए इसे केवल “AI से मिला संभावित टार्गेट” नहीं, बल्कि प्रयोगशाला में मान्य किया गया टार्गेट कहा जा रहा है।
महत्वपूर्ण अंतर: शुरुआती दवा-खोज कार्यक्रम में पहुंचा टार्गेट Neuron Map से आया है। Microglia Map एक अलग, पहले की उपलब्धि थी, जिसमें मस्तिष्क की प्रतिरक्षा कोशिकाओं का अध्ययन किया गया था। दोनों मानचित्र Roche और Genentech के साथ हुई साझेदारी के तहत बनाए गए।
CNS दवा-खोज में विफलता दर लंबे समय से बहुत ऊंची रही है। इस पृष्ठभूमि में यह उपलब्धि शुरुआती प्रमाण देती है कि AI-आधारित जैविक प्लेटफॉर्म न्यूरोसाइंस जैसे कठिन क्षेत्र में नए और प्रयोगात्मक रूप से मान्य टार्गेट खोज सकता है।
हालांकि, यह अभी दवा या इलाज उपलब्ध होने का दावा नहीं है। टार्गेट अब शुरुआती खोज के चरण में है और उसे छोटे अणु वाली दवा, प्रीक्लिनिकल परीक्षणों तथा आगे चलकर मानव क्लीनिकल ट्रायल जैसी कई कसौटियों से गुजरना होगा।
इस साझेदारी ने दिखाया कि खरबों कोशिकाओं, पूरे जीनोम और करोड़ों इमेज से बना डेटा AI मॉडल को जीव विज्ञान में ऐसे संबंध खोजने में मदद कर सकता है, जिन्हें पारंपरिक क्रमिक प्रयोगों से पहचानने में वर्षों लग सकते हैं।
यहां AI का काम वैज्ञानिकों की जगह लेना नहीं, बल्कि बहुत बड़े संभावित खोज-क्षेत्र को छांटना और प्रयोगों के लिए बेहतर प्राथमिकताएं तय करना है।
प्लेटफॉर्म पहले से उपलब्ध मानव आनुवंशिक साक्ष्यों और बीमारी से जुड़े जैविक संकेतों से शुरुआत करता है, फिर पूरे जीनोम में समान या संबंधित तंत्र खोजता है। इससे किसी पूरी तरह अनजान तंत्र पर दांव लगाने की अनिश्चितता कम हो सकती है। Recursion की CEO नजात खान ने इसे एक तरह का “हाइपोथीसिस जनरेटिंग इंजन” बताया—यानी ऐसा सिस्टम जो वैज्ञानिकों को नई परिकल्पनाएं देता है, न कि केवल एक-एक करके अनुमान लगाने पर निर्भर करता है।
खान के अनुसार, यह साझेदारी संभावित रूप से 40 तक कार्यक्रमों में से पहला है। अब तक साझेदारी से Recursion को शुरुआती और माइलस्टोन भुगतान के रूप में 216 मिलियन डॉलर मिल चुके हैं।
Recursion-Genentech की उपलब्धि ऐसे समय आई है जब दवा उद्योग AI-आधारित शोध में बड़े पैमाने पर पूंजी लगा रहा है।
| साझेदार | संभावित मूल्य | समय |
|---|---|---|
| Eli Lilly और Insilico Medicine | 2.75 अरब डॉलर | मार्च 2026 |
| Takeda और Iambic | 1.7 अरब डॉलर से अधिक | फरवरी 2026 |
| Eli Lilly और NVIDIA का 5-वर्षीय सह-नवाचार AI लैब | 1 अरब डॉलर | 2026 की पहली तिमाही |
| PostEra और Pfizer | 610 मिलियन डॉलर | जनवरी 2025 |
2025–2026 में उद्योग का रुझान केवल किसी एक अणु का लाइसेंस लेने से आगे बढ़कर ऐसे AI प्लेटफॉर्म और शोध-इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने का रहा है, जो एक साथ कई संभावित दवा कार्यक्रमों को आगे बढ़ा सकें। Recursion-Exscientia विलय और बहु-कार्यक्रम वाली बड़ी साझेदारियां संकेत देती हैं कि AI-आधारित खोज अब अलग-थलग प्रयोग नहीं, बल्कि फार्मा R&D के मूल ढांचे का हिस्सा बन रही है।
नियामक संस्थाएं भी AI के बढ़ते इस्तेमाल के अनुरूप अपना दृष्टिकोण विकसित कर रही हैं।
FDA का दृष्टिकोण अब केवल मामले-दर-मामले निगरानी तक सीमित नहीं है। प्रायोजक कंपनियों को यह दिखाना होगा कि उनका AI मॉडल जिस खास उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, उसके लिए पर्याप्त रूप से विश्वसनीय है।
यहां एक अहम सीमा भी है: जनवरी 2025 का FDA ड्राफ्ट मार्गदर्शन दवा-खोज में इस्तेमाल होने वाले AI को सीधे अपने दायरे में शामिल नहीं करता। यह मुख्य रूप से ऐसे AI उपयोगों पर केंद्रित है, जिनसे दवा की सुरक्षा, प्रभावशीलता या गुणवत्ता के बारे में नियामकीय निर्णयों के लिए डेटा या जानकारी तैयार होती है।
Recursion और Genentech की उपलब्धि यह दिखाने वाली पहली ठोस मिसाल है कि AI-आधारित जैविक प्लेटफॉर्म न्यूरोसाइंस जैसे कठिन क्षेत्र में नए और प्रयोगशाला-सत्यापित दवा टार्गेट खोज सकते हैं। यह अभी मरीजों के लिए तैयार दवा नहीं है, लेकिन टार्गेट की खोज और शुरुआती विकास तक पहुंचना महत्वपूर्ण प्रमाण है।
AI-दवा खोज में 2024–2025 के दौरान 55 अरब डॉलर से अधिक के सौदे, 2026 में बढ़ती साझेदारियां और FDA-EMA के नए मार्गदर्शक सिद्धांत एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं। सवाल अब केवल यह नहीं रह गया है कि AI नए टार्गेट खोज सकता है या नहीं—बल्कि यह है कि इन टार्गेट्स से बनी दवाएं कितनी तेजी और विश्वसनीयता से मरीजों तक पहुंच सकती हैं।