सऊदी पक्ष का कहना था कि इन मिलिशिया से जुड़े हमलों ने सऊदी बुनियादी ढांचे और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। रियाद के मुताबिक, यह उसकी तय ‘रेड लाइन’ का उल्लंघन था और इसी कारण जवाब देना पड़ा । हालांकि, इस कार्रवाई को किसी बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत के बजाय प्रतिरोध और रोकथाम का संकेत बताया गया।
प्रिंस खालिद ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का व्यक्तिगत संदेश भी पहुंचाया। इसमें रियाद का आकलन था कि ईरान क्षेत्रीय सहयोगी समूहों और प्रॉक्सी के जरिए रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है ।
सऊदी अरब का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि किसी विशिष्ट उकसावे का जवाब देना और पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध छेड़ना—दो अलग-अलग बातें हैं। रियाद ने वॉशिंगटन को संकेत दिया कि वह अपने ठिकानों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों को अनुत्तरित नहीं छोड़ेगा, लेकिन संघर्ष को बड़े स्तर पर फैलाना भी नहीं चाहता।
बैठक में इजरायल की भूमिका भी चर्चा का अहम मुद्दा रही। फॉक्स न्यूज की संवाददाता जेनिफर ग्रिफिन के अनुसार, प्रिंस खालिद ने वेंस से कहा कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के साथ तनाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जबकि सऊदी अरब de-escalation यानी तनाव कम करने का पक्षधर है ।
इस रुख से रियाद ने यह संकेत दिया कि वह इजरायली दबाव के चलते किसी व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में खिंचना नहीं चाहता।
सऊदी अधिकारियों का मानना है कि ईरान कूटनीतिक रास्ते खुले रहने के बावजूद अपने क्षेत्रीय प्रॉक्सी का इस्तेमाल जारी रख सकता है। इसमें इराक के मिलिशिया समूहों के अलावा यमन में सक्रिय हूती भी शामिल हैं ।
फिर भी सऊदी रणनीतिक प्राथमिकता सैन्य अभियान बढ़ाना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय तनाव को सीमित करना है । रियाद का संदेश मूल रूप से यह है: हमले होंगे तो जवाब दिया जाएगा, लेकिन जवाब का मतलब अनिवार्य रूप से बड़े युद्ध की ओर बढ़ना नहीं है।
प्रिंस खालिद की वॉशिंगटन यात्रा पहले ही तय थी, लेकिन क्षेत्र में ईरान समर्थित समूहों के हमलों में बढ़ोतरी के बाद इसे पिछले सप्ताह टाल दिया गया था । इराक में संयुक्त अमेरिकी-सऊदी हमलों के तुरंत बाद बैठक फिर हुई।
वेंस के साथ निर्धारित बैठक के बाद उसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बातचीत में शामिल किया गया । इससे यह संकेत मिला कि चर्चा केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि ईरान के साथ युद्ध, क्षेत्रीय सुरक्षा और आगे की अमेरिकी-सऊदी रणनीति से भी जुड़ी थी।