आर्मेनिया के 7 जून के संसदीय चुनाव में हस्तक्षेप के लिए रूस ने आर्थिक दबाव, कूटनीतिक धमकियों और करीब 50 मिलियन डॉलर के गुप्त मतदाता परिवहन अभियान का सहारा लिया है। राष्ट्रपति पुतिन ने 'यूक्रेनी परिदृश्य' की खुली चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आर्मेनिया ने EU सदस्यता की ओर कदम बढ़ाया, तो उसे यूक्रेन जैसी स्थिति का सामना...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What measures has Russia taken to pressure Armenia ahead of its June 7 parliamentary elections — including formal threats to cut off prefere. Article summary: Russia has launched a multi-layered campaign of economic coercion, diplomatic escalation, and covert electoral interference aimed at Armenia's June 7 parliamentary vote, framed by President Putin's explicit warning that . Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "MOSCOW, May 28 (Reuters) – Russia sharply criticised Armenia on Thursday for drawing closer to the EU, saying it was not pursuing a balanced position towards Moscow and was coopera" source context "Russia ratchets up pressure on Armenia ahead of June election | The Mighty 790 KFGO | KFGO" Reference image 2: visua
आर्मेनिया के 7 जून को होने वाले निर्णायक संसदीय चुनावों से ठीक पहले, क्रेमलिन ने अपनी चालों की सूक्ष्मता को त्याग कर आर्थिक युद्ध, कूटनीतिक किनारेबाज़ी और गुप्त चुनावी तोड़फ़ोड़ का एक व्यापक अभियान छेड़ दिया है। इसका एकमात्र लक्ष्य है– प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान की सरकार को उसके पश्चिमी रुख़ के लिए दंडित करना और उनकी 'सिविल कॉन्ट्रैक्ट' पार्टी को तीसरी बार सत्ता में आने से रोकना । लेकिन इस पूरे अभियान का सबसे भयावह पहलू राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का बार-बार "यूक्रेनी परिदृश्य" का ज़िक्र करना है, जिसमें वे आर्मेनिया की यूरोपीय आकांक्षाओं को उसी तर्क से जोड़ते हैं जिसका इस्तेमाल मॉस्को ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के आक्रमण को सही ठहराने के लिए किया था
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पश्चिमी अधिकारी और स्वतंत्र जांचकर्ता इसे आधुनिक यूरोपीय इतिहास के सबसे बड़े राज्य-प्रायोजित चुनावी हस्तक्षेप अभियानों में से एक बता रहे हैं, जो अपने पैमाने में केवल 2025 के मोल्दोवा चुनाव अभियान के बाद दूसरे स्थान पर है ।
दबाव के सबसे प्रत्यक्ष बिंदु, आर्मेनिया की कमज़ोर और व्यापार पर निर्भर अर्थव्यवस्था पर केंद्रित हैं।
कृषि आयात पर प्रतिबंध
28 मई को, रूस की कृषि-निगरानी एजेंसी, रोसेलखोज़नदज़ोर ने आर्मेनिया से आने वाले उच्च-मूल्य वाले फलों और सब्ज़ियों पर "फ़ाइटोसैनिटरी उल्लंघनों" का हवाला देते हुए अस्थायी प्रतिबंधों की घोषणा की। प्रतिबंधित सूची में टमाटर, खीरा, शिमला मिर्च, पत्तेदार साग, स्ट्रॉबेरी, जीवित मछली और फूल शामिल थे, और इसे ख़ास तौर पर चुनाव से एक हफ़्ते पहले लागू करने का समय चुना गया । यह कदम पड़ोसी देशों को स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने पर दंडित करने के लिए सैनिटरी नियमों को राजनीतिक हथियार बनाने की परिचित रूसी चाल का ही एक और उदाहरण है
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ऊर्जा और हीरा आपूर्ति रोकने की धमकी
इससे कुछ दिन पहले, रूस ने 2013 के उस द्विपक्षीय समझौते को निलंबित या समाप्त करने की चेतावनी देकर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया, जिसके तहत आर्मेनिया को भेजे जाने वाले प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम उत्पादों और बिना तराशे हीरों पर निर्यात शुल्क समाप्त कर दिए गए थे । रूसी ऊर्जा मंत्री सर्गेई सिविलेव ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर येरेवन ने यूरोपीय संघ में शामिल होने की अपनी कोशिशें जारी रखीं तो ये महत्वपूर्ण आपूर्तियाँ रोक दी जाएँगी
। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ख़ारोवा ने पुष्टि की कि दूतावास ने इस अल्टीमेटम को रेखांकित करने वाला एक औपचारिक पत्र भी भेजा है
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आर्थिक युद्ध के साथ-साथ एक सधी हुई कूटनीतिक आक्रामकता भी जारी रही, जो द्विपक्षीय दबाव से बढ़कर बहुपक्षीय नाकेबंदी में बदल गई।
'विचार-विमर्श' के लिए राजदूत वापस
30 मई को, रूसी विदेश मंत्रालय ने आर्मेनिया में अपने राजदूत, सर्गेई कोपिरकिन को तुरंत विचार-विमर्श के लिए मॉस्को वापस बुलाने की घोषणा की। मंत्रालय के बयान ने इस कदम को "यूरोपीय संघ के साथ निकटता बढ़ाने के लिए आर्मेनियाई नेतृत्व द्वारा उठाए गए कदमों, जो यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) के भीतर सहयोग को कमज़ोर कर रहे हैं" से जोड़ा । किसी राजदूत को वापस बुलाना एक गंभीर कूटनीतिक संकेत है, जिसका उपयोग बहुत ही कम और गहरे संकट के क्षणों में ही किया जाता है।
EAEU जनमत संग्रह का अल्टीमेटम
29 मई को अस्ताना में हुए EAEU शिखर सम्मेलन में, पुतिन ने बेलारूस, कज़ाकिस्तान और किर्गिस्तान के नेताओं को एकजुट कर एक संयुक्त मांग रखी। चारों राष्ट्रपतियों ने आर्मेनिया से तत्काल एक राष्ट्रव्यापी जनमत संग्रह कराने का आह्वान किया, जिसमें यह तय हो कि उसे EU की सदस्यता चुननी है या EAEU में बने रहना है। उनके संयुक्त बयान में चेतावनी दी गई कि आर्मेनिया की EU तैयारियाँ संगठन की "आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण जोखिम" पैदा करती हैं और अधिकारियों को दिसंबर 2026 तक इस बात की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया कि "आर्मेनिया के संबंध में EAEU संधि के निलंबन के संभावित परिणाम" क्या होंगे । यह अल्टीमेटम आर्मेनिया की पसंद को एक द्विआधारी, शून्य-योग निर्णय के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसके लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई है।
पुतिन ने सबसे पहले 9 मई को "यूक्रेनी परिदृश्य" का ज़िक्र किया और फिर 29 मई को EAEU शिखर सम्मेलन के बाद इसे ज़ोरदार तरीके से दोहराया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आर्मेनिया ने अपना यूरोपीय समर्थक रास्ता जारी रखा, तो उसे यूक्रेन जैसा ही भाग्य भुगतना पड़ सकता है । उनका तर्क था कि कीव की EU सदस्यता की बोली ने एक बार उस देश में "संकट" पैदा कर दिया था— इशारा 2014 की मैदान क्रांति की ओर था जिसे पुतिन लंबे समय से पश्चिम द्वारा समर्थित तख्तापलट के रूप में ग़लत तरीके से पेश करते रहे हैं— और संकेत दिया कि ऐसी ही गतिशीलता आर्मेनिया को भी अपनी चपेट में ले सकती है
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रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि आर्मेनिया को "जितनी जल्दी हो सके" EU एकीकरण और अपने मौजूदा EAEU दायित्वों के बीच चयन करना होगा, और चेतावनी दी कि अगर EU मानकों को अपनाया गया, तो मॉस्को सभी आर्थिक एकीकरण "समाप्त" कर देगा और आर्मेनियाई नागरिकों को रूस में काम करने के लिए परमिट की आवश्यकता होगी । उन्होंने एक सशस्त्र संघर्ष की आशंका को भी फिर से जीवित कर दिया, और रूसी सरकारी मीडिया ने उनकी टिप्पणियों को इस चेतावनी के रूप में व्याख्यायित किया कि "यूक्रेनी परिदृश्य" का मतलब रूसी सैन्य आक्रमण हो सकता है
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यह भाषा आकस्मिक नहीं है। आर्मेनिया की लोकतांत्रिक पसंद को रूसी सुरक्षा के लिए एक अस्तित्वगत चुनौती के रूप में प्रस्तुत करके, क्रेमलिन उसी कहानी ढाँचे का उपयोग कर रहा है जिसका उपयोग उसने 2022 के आक्रमण को उचित ठहराने के लिए किया था । रूसी विदेश मंत्रालय ने इस कथा को और मज़बूत किया, और सार्वजनिक रूप से आर्मेनिया पर "मॉस्को के प्रति संतुलित रुख़ नहीं अपनाने" और "रूस को नुकसान पहुँचाने की इच्छा रखने वाले यूरोपीय देशों के साथ सहयोग करने" का आरोप लगाया
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सार्वजनिक धमकियों के नीचे एक गुप्त हस्तक्षेप तंत्र काम कर रहा है, जो रॉयटर्स की जांच और पश्चिमी ख़ुफ़िया आकलनों के अनुसार, चुनाव परिणाम को सीधे प्रभावित करने के लिए सक्रिय है।
50 मिलियन डॉलर की मतदाता परिवहन योजना
रॉयटर्स की एक जांच के अनुसार, जिसमें पाँच पश्चिमी ख़ुफ़िया अधिकारियों और आंतरिक दस्तावेज़ों का हवाला दिया गया है, क्रेमलिन ने पशिनयान की सत्तारूढ़ पार्टी के ख़िलाफ़ वोट डालने के लिए हज़ारों दोहरी नागरिकता वाले रूसी-आर्मेनियाई नागरिकों को आर्मेनिया लाने के लिए लगभग 50 मिलियन डॉलर आवंटित किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का लक्ष्य 100,000 मतदाताओं को जुटाना है— एक ऐसी संख्या जो संभावित रूप से चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है ।
कथित तौर पर इस अभियान की देखरेख क्रेमलिन के एक नए निकाय, 'रणनीतिक सहयोग और भागीदारी निदेशालय' द्वारा की जा रही है, जिसे अक्टूबर में स्थापित किया गया था । इसके संचालन ठेकेदार के रूप में 'सोशल डिज़ाइन एजेंसी' (SDA) की पहचान की गई है, जो क्रेमलिन द्वारा वित्तपोषित एक संगठन है जिसके कर्मी पूरे यूरोप में प्रचार अभियानों में शामिल रहे हैं
। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने पहले कहा था कि SDA को "लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमज़ोर करने के लिए डिज़ाइन किए गए हस्तक्षेप अभियानों की एक श्रृंखला को अंजाम देने का काम और धन क्रेमलिन द्वारा दिया गया है"
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बॉट नेटवर्क और दुष्प्रचार
इसके समानांतर, क्रेमलिन से जुड़े नेटवर्कों ने बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। स्वतंत्र रूसी जांच आउटलेट एजेंटस्टोवो और विश्लेषण समूह बॉट ब्लॉकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक समर्पित बॉट नेटवर्क की पहचान की है, जो एक मिश्रित दृष्टिकोण अपनाता है: AI-संचालित स्वचालित खाते, जो वास्तविक मानव-संचालित प्रोफ़ाइलों के साथ समन्वय में काम करते हैं। इनका लक्ष्य पशिनयान विरोधी कथानकों को बढ़ाना और उनकी सरकार के लिए समर्थन को कम करना है । इस अभियान में वास्तविक आर्मेनियाई समाचार आउटलेट्स की नकल करने वाली फ़र्ज़ी वेबसाइटें भी शामिल हैं, जो रूस समर्थक प्रचार फैलाने के लिए बनाई गई हैं
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रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ख़ारोवा ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए इन्हें पश्चिमी दुष्प्रचार करार दिया है ।
यूरोपीय संघ ने सार्वजनिक एकजुटता के साथ जवाब दिया है। यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता अनवर एल अनौनी ने कहा कि EU "हाइब्रिड खतरों, विदेशी सूचना हेरफेर और हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ आर्मेनिया की लोकतांत्रिक मज़बूती का समर्थन करता है" । यह बयान सीधे तौर पर क्रेमलिन के दबाव अभियान की प्रकृति को स्वीकार करता है, लेकिन बिना टकराव बढ़ाए।
जैसे-जैसे चुनाव का दिन नज़दीक आ रहा है, स्थिति अत्यधिक अस्थिर बनी हुई है। जहाँ कृषि प्रतिबंध, ऊर्जा धमकियाँ और कूटनीतिक कदम पुष्ट आधिकारिक रूसी उपाय हैं, वहीं 50 मिलियन डॉलर की मतदाता परिवहन योजना और विशिष्ट बॉट नेटवर्क का विवरण पश्चिमी ख़ुफ़िया स्रोतों और जांच रिपोर्टिंग पर आधारित है, जिनके निष्पादन की पूरी सीमा अभी भी असत्यापित है। हालाँकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आर्मेनिया का 7 जून का मतदान, क्रेमलिन के उस अभियान की नवीनतम अग्रिम पंक्ति बन गया है, जिसका उद्देश्य किसी भी पूर्व सोवियत गणराज्य को अपनी कक्षा से बाहर निकलने से रोकना है— और उसकी यह रणनीति अब पहले से कहीं अधिक खुली, ख़र्चीली और भयावह हो गई है।
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आर्मेनिया के 7 जून के संसदीय चुनाव में हस्तक्षेप के लिए रूस ने आर्थिक दबाव, कूटनीतिक धमकियों और करीब 50 मिलियन डॉलर के गुप्त मतदाता परिवहन अभियान का सहारा लिया है।
आर्मेनिया के 7 जून के संसदीय चुनाव में हस्तक्षेप के लिए रूस ने आर्थिक दबाव, कूटनीतिक धमकियों और करीब 50 मिलियन डॉलर के गुप्त मतदाता परिवहन अभियान का सहारा लिया है। राष्ट्रपति पुतिन ने 'यूक्रेनी परिदृश्य' की खुली चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आर्मेनिया ने EU सदस्यता की ओर कदम बढ़ाया, तो उसे यूक्रेन जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेमलिन के एक नए विभाग ने पशिनयान सरकार को हटाने के लिए 100,000 रूसी आर्मेनियाई मतदाताओं को येरेवन भेजने और फ़र्ज़ी वेबसाइटों के ज़रिए दुष्प्रचार फैलाने की योजना बनाई।