सबसे स्पष्ट और ठोस घोषणा चीन की ओर से हर साल कम से कम 17 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता है। यह व्यवस्था 2026 से शुरू होकर 2028 तक जारी रहेगी।
इस समझौते के मुख्य बिंदु:
अमेरिकी किसानों पर पिछले वर्षों में चले अमेरिका‑चीन व्यापार संघर्ष का बड़ा असर पड़ा था, इसलिए इस घोषणा को उनके लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों देशों ने व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा जारी रखने के लिए नए सहयोगी ढाँचे बनाने पर भी सहमति दी। इन मंचों के जरिए गैर‑संवेदनशील वस्तुओं के व्यापार और निवेश से जुड़े विवादों पर बातचीत की जाएगी।
हालाँकि इन तंत्रों के काम करने के तरीके या इनके तहत लागू होने वाले नियमों के बारे में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
कई विश्लेषकों का मानना है कि इस शिखर बैठक से कुछ ठोस सौदे तो निकले, लेकिन व्यापक व्यापार सुधार नहीं हुए। मुख्य प्रगति विशिष्ट खरीद समझौतों तक सीमित रही, जबकि बौद्धिक संपदा, तकनीकी प्रतिबंध और औद्योगिक नीति जैसे बड़े विवादित मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
बैठक के बाद सबसे बड़ी अनिश्चितता अमेरिका‑चीन टैरिफ ट्रूस को लेकर बनी हुई है। यह अस्थायी समझौता अक्टूबर 2025 में नेताओं की पिछली मुलाकात के दौरान तय हुआ था और फिलहाल नवंबर 2026 तक लागू है।
बीजिंग बैठक में इस ट्रूस को आगे बढ़ाने या स्थायी समझौते में बदलने पर कोई व्यापक निर्णय सामने नहीं आया। इसलिए कंपनियों और निवेशकों के लिए यह सवाल बना हुआ है कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी तो क्या टैरिफ फिर बढ़ सकते हैं।
कम से कम अल्पकाल में इन समझौतों से कई क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है:
बीजिंग में हुई ट्रंप–शी बैठक ने व्यावहारिक लेकिन सीमित व्यापारिक समझौते दिए—जैसे बोइंग विमान खरीद, अमेरिकी बीफ और पोल्ट्री के आयात की बहाली और हर साल 17 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद खरीदने का वादा।
लेकिन अमेरिका और चीन के बीच चल रहे बड़े आर्थिक मतभेद अभी भी बने हुए हैं। असली परीक्षा तब होगी जब नवंबर में समाप्त होने वाली टैरिफ ट्रूस के भविष्य पर दोनों देशों को फैसला करना होगा।
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