इसके बाद पेंटागन ने पोलैंड में लगभग 4,000 से अधिक सैनिकों की नियोजित तैनाती अचानक रद्द कर दी। यह सेना की 1st Cavalry Division की 2nd Armored Brigade Combat Team थी, जिसे लगभग नौ महीने के लिए पोलैंड भेजा जाना था।
यह यूनिट पहले से वहां मौजूद एक अन्य आर्मर्ड यूनिट की जगह लेने वाली थी। अधिकारियों ने बताया कि यह कदम यूरोप में सैनिकों की कुल संख्या घटाने की योजना का हिस्सा था। इसलिए पहले से मौजूद सैनिकों को हटाने के बजाय नई तैनाती रोकने का फैसला लिया गया।
इस फैसले की सूचना सेना और कई सांसदों को बहुत देर से मिली, जिससे आलोचना हुई कि नीति अचानक और बिना पर्याप्त संवाद के लागू की गई।
जब सवाल उठे, तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि पोलैंड की तैनाती रद्द नहीं हुई है बल्कि केवल अस्थायी रूप से टाली गई है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन अभी यह तय नहीं कर पाया है कि सैनिकों को आखिरकार कहाँ भेजा जाएगा और संभव है कि वे यूरोप के किसी अन्य हिस्से में जाएँ। इससे संकेत मिला कि पेंटागन की रणनीतिक समीक्षा अभी जारी है।
इन सब घटनाओं के कुछ ही दिनों बाद ट्रम्प ने अचानक घोषणा की कि अमेरिका पोलैंड में 5,000 अतिरिक्त सैनिक भेजेगा—जो उस ब्रिगेड से भी अधिक संख्या है जिसकी तैनाती पहले रोकी गई थी।
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रम्प ने इस फैसले को सीधे पोलैंड की राजनीति से जोड़ा और कहा कि यह कदम राष्ट्रपति करोल नावरॉकी की जीत और उनके साथ मजबूत संबंध के आधार पर लिया गया है।
पोलैंड लंबे समय से चाहता रहा है कि अमेरिका उसकी जमीन पर अधिक सैनिक तैनात करे। वारसॉ का तर्क है कि अगर जर्मनी से अमेरिकी सैनिक कम किए जा रहे हैं, तो उन्हें नाटो के पूर्वी मोर्चे—यानी रूस और यूक्रेन के करीब—स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
नावरॉकी के सहयोगियों ने भी पहले कहा था कि पोलैंड को जर्मनी से हटने वाले अमेरिकी सैनिकों को आकर्षित करने का प्रयास करना चाहिए।
इस तरह ट्रम्प का फैसला पोलैंड के उस पुराने लक्ष्य के अनुरूप दिखता है जिसमें देश खुद को मध्य और पूर्वी यूरोप में अमेरिका और नाटो का प्रमुख सैन्य केंद्र बनाना चाहता है।
समस्या यह है कि हाल के हफ्तों में अमेरिकी प्रशासन के अलग‑अलग संकेत एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। पहले कहा गया कि यूरोप में सैनिकों की संख्या घटाई जाएगी, लेकिन पोलैंड में नए सैनिक भेजने का फैसला कटौती की बजाय पुनर्वितरण जैसा दिखता है।
यही कारण है कि यूरोपीय सहयोगियों और सुरक्षा विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि अमेरिका की वास्तविक दीर्घकालिक रणनीति क्या है।
पोलैंड में सैनिक भेजने की घोषणा के बावजूद कई अहम बातें अभी साफ नहीं हैं:
पोलैंड में 5,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने का ट्रम्प का फैसला कई कारकों का मिश्रण है—यूरोप में अमेरिकी सैन्य तैनाती की समीक्षा, पहले रद्द हुई तैनाती से पैदा हुआ दबाव और पोलैंड के नए राष्ट्रपति करोल नावरॉकी के साथ ट्रम्प के राजनीतिक संबंध।
लेकिन जब तक पेंटागन अपनी समीक्षा पूरी नहीं करता, यह कदम किसी अंतिम रणनीति से ज्यादा यूरोप में अमेरिकी सैन्य नीति के बदलते और अभी अधूरे पुनर्गठन का हिस्सा ही लगता है।
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