रविवार को सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी और इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख रोमन गोफमैन की मुलाकात का तत्काल कारण 18 अगस्त को अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हुआ इज़राइली हमला था। यह हमला ऐसे समय हुआ जब सीरिया में तुर्की की भूमिका को लेकर मतभेद, इज़राइल, सीरिया, तुर्की और वॉशिंगटन के बीच बड़े कूटनीतिक संकट में बदलने लगे थे। 102
सीरियाई सरकारी मीडिया और कई रिपोर्टों के अनुसार, एयरबेस के रनवे और भंडारण सुविधाओं पर कम-से-कम आठ हमले किए गए। सीरियाई सैन्य सूत्र और पास में रहने वाले एक नागरिक ने किसी के हताहत न होने की बात कही। 116 हमले से कुछ घंटे पहले ही एक तुर्की प्रतिनिधिमंडल ने इस ठिकाने का दौरा किया था। इसी वजह से दौरे और हमले के बीच का समय पूरे विवाद का अहम हिस्सा बन गया। 18
इज़राइल का दावा: तुर्की की सैन्य तैनाती रोकना जरूरी था
इज़राइल का कहना है कि सीरिया, तुर्की की सेनाओं को एयरबेस पर तैनात होने की अनुमति देकर दोनों देशों के बीच बने सुरक्षा-यथास्थिति समझौते का उल्लंघन करने के करीब पहुंच गया था। इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य अलेप्पो के निकट तुर्की की सैन्य पकड़ बनने से रोकना था। उनका दावा है कि दमिश्क को इसके बारे में बार-बार चेतावनी दी गई थी। 2238
इज़राइल की चिंता केवल तुर्की सैनिकों की मौजूदगी तक सीमित नहीं है। इज़राइली अधिकारियों ने सीरिया में तुर्की की वायु-रक्षा प्रणालियों, ड्रोन और मिसाइल क्षमताओं को ऐसी सैन्य क्षमता के रूप में देखा है, जो इज़राइल की कार्रवाई की स्वतंत्रता सीमित कर सकती है या एक नया सैन्य जोखिम पैदा कर सकती है। इस दृष्टिकोण से हमला तुर्की सैनिकों को निशाना बनाने के बजाय एक पूर्वव्यापी चेतावनी के रूप में पेश किया गया। 18
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। तुर्की प्रतिनिधिमंडल के दौरे के तुरंत बाद हमला होना दोनों घटनाओं के बीच समयगत संबंध दिखाता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि तुर्की की तैनाती को मंजूरी मिल चुकी थी या वह तत्काल होने वाली थी।
सीरिया का पक्ष: स्थायी तुर्की बेस की कोई योजना नहीं थी
दमिश्क ने पूरी तरह अलग तस्वीर पेश की। सीरियाई अधिकारियों के अनुसार, तुर्की का दौरा प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग से जुड़ा था, न कि अबू अल-दुहूर में स्थायी तुर्की बेस या लंबे समय तक सैनिकों की तैनाती से। विदेश मंत्री अल-शैबानी ने यह भी कहा कि हमले के समय ठिकाना काफी हद तक खाली था और वहां तुर्की की सैन्य मौजूदगी को हमले का आधार बनाना सही नहीं है। 1333
सीरिया ने हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और तनाव कम करने की अपील की। ऐसे में रविवार की बैठक सीधे सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने का एक रास्ता बनी—ताकि एकतरफा हमले और सार्वजनिक आरोप दोनों देशों के संबंधों को और न बिगाड़ें। 1020
तुर्की ने इज़राइल के आरोपों को खारिज किया
अंकारा ने सीरिया में अपनी सैन्य भूमिका को लेकर इज़राइल के आरोपों को निराधार बताया और हमले की निंदा की। तुर्की का कहना है कि दमिश्क के साथ उसका सहयोग सैन्य प्रशिक्षण, सीरिया की स्थिरता और पुनर्निर्माण से जुड़ा है; इसका उद्देश्य इज़राइल को घेरना या उसके खिलाफ आक्रामक मोर्चा बनाना नहीं है। 449
यह विवाद इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि अबू अल-दुहूर तुर्की सीमा के पास स्थित है। यदि जिस ठिकाने पर तुर्की कर्मियों की मौजूदगी थी या ऐसी मौजूदगी का संदेह था, वहां हमला होता, तो इज़राइल का इरादा केवल सीरियाई ढांचे को निशाना बनाने का होने पर भी तुर्की सीधे सैन्य प्रतिक्रिया दे सकता था।
अमेरिका की चिंता: कहीं यह बड़ा टकराव न बन जाए
सीरिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत टॉम बराक ने हमले को “अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इज़राइल, तुर्की और सीरिया के बीच ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहा है, जिससे सैन्य घटनाओं के दौरान गलतफहमी और सीधा टकराव रोका जा सके। बराक ने यह भी कहा कि तुर्की को पहले से सूचना नहीं दी गई थी और वह इज़राइली विमानों की गतिविधि को अपने लिए खतरे के रूप में समझ सकता था। 150
इज़राइली अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया और कहा कि अमेरिका को जानकारी दी गई थी। यह मतभेद महत्वपूर्ण है, क्योंकि तुर्की अमेरिका का सहयोगी और नाटो का सदस्य है। इसलिए तुर्की की सेनाओं से जुड़ी किसी घटना के क्षेत्रीय संकट में बदलने पर वॉशिंगटन पर भी तत्काल कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है। 2139
बाद में बराक ने कहा कि इस हमले से तुर्की को व्यापक टकराव में खींचे जाने का जोखिम पैदा हो सकता था। यह अमेरिकी दूत का आकलन है, इज़राइल की मंशा के बारे में स्थापित तथ्य नहीं। 3637
गुप्त संपर्क क्यों महत्वपूर्ण हैं?
रविवार की बैठक इज़राइली और सीरियाई अधिकारियों के बीच हालिया संपर्क का पहला उदाहरण नहीं थी। मामले से परिचित लोगों के अनुसार, गोफमैन और अल-शैबानी ने 14 अगस्त को फोन पर भी बात की थी—यानी एयरबेस पर हमले से चार दिन पहले। बातचीत में सीरिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी का मुद्दा उठा था। 2
इन संपर्कों से पता चलता है कि दोनों पक्षों के पास विवादित तुर्की मौजूदगी पर चर्चा करने का एक सीधा चैनल पहले से था। लेकिन यह चैनल ऐसे नियम तय नहीं कर सका था, जिन्हें इज़राइल, सीरिया और तुर्की—सभी स्वीकार करते। इज़राइल ने उभरते खतरे के अपने आकलन के आधार पर कार्रवाई की, जबकि सीरिया और तुर्की का कहना है कि एयरबेस पर ऐसा कोई खतरा बन ही नहीं रहा था।
असल विवाद अभी भी अनसुलझा है
रविवार की बैठक का तात्कालिक उद्देश्य बमबारी के बाद तनाव कम करना था, न कि सीरिया में तुर्की की दीर्घकालिक भूमिका से जुड़े सभी मतभेद खत्म करना। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अबू अल-दुहूर तुर्की की सैन्य पकड़ बनने वाला था या वह केवल प्रशिक्षण और सहयोग से जुड़ी यात्रा का स्थल था।
उपलब्ध रिपोर्टिंग घटनाओं का क्रम स्पष्ट करती है—तुर्की प्रतिनिधिमंडल का दौरा, 18 अगस्त के हमले, परस्पर विरोधी दावे और उसके बाद कूटनीतिक संपर्क। लेकिन इज़राइल के खुफिया आकलन की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल सबसे सावधान निष्कर्ष यही है: इज़राइल का कहना है कि उसने सीरिया में तुर्की की एक खतरनाक सैन्य तैनाती को रोकने के लिए हमला किया, जबकि सीरिया और तुर्की कहते हैं कि ऐसी तैनाती की योजना नहीं थी। रविवार की वार्ता इसी मतभेद को सीरिया में व्यापक इज़राइल-तुर्की टकराव बनने से रोकने की कोशिश थी। 103350