यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रोक मौजूदा साझेदारी खत्म करने पर नहीं, बल्कि उसके विस्तार पर है। Aramco की मौजूदा टाइटल पार्टनरशिप 2028 तक चलने वाली है और उसके बने रहने की संभावना है। हालांकि, 2027 के लिए प्रस्तावित अतिरिक्त वित्तीय मदद फिलहाल रोक दी गई है .
Limacher के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि महीनों की बातचीत के बाद Saudi Arabia ने Aston Martin की स्पॉन्सरशिप बढ़ाने की योजना रोक दी, क्योंकि “ईरान में युद्ध” इस परियोजना में देरी कर रहा है .
स्पॉन्सरशिप का यह फैसला ऐसे समय आया है जब Saudi Arabia की अर्थव्यवस्था पर युद्ध से जुड़े कई मोर्चों पर दबाव है। एक ओर तेल निर्यात प्रभावित हुआ है, तो दूसरी ओर सुरक्षा और सैन्य खर्च तेजी से बढ़े हैं।
दूसरी तिमाही 2026 में Saudi Arabia का GDP सालाना आधार पर 4.8% घटा। यह 2020 में कोविड-19 महामारी के दौर के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट बताई गई है। इसी अवधि में देश की तेल गतिविधि 24.7% नीचे चली गई .
BNP Paribas ने 2026 के लिए Saudi आर्थिक वृद्धि का अनुमान 4.6% से घटाकर केवल 0.8% कर दिया। बैंक ने इसके पीछे बढ़ते सैन्य खर्च को प्रमुख कारणों में शामिल किया . अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी कहा कि संघर्ष ने गैर-तेल आर्थिक गतिविधियों और कारोबारी भरोसे पर असर डाला है
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ईरान और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण Strait of Hormuz में समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया। यह जलमार्ग Persian Gulf से तेल और गैस निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। युद्ध के पहले महीने में Persian Gulf के तेल निर्यातकों को निर्यात राजस्व में करीब 2 अरब डॉलर प्रतिदिन का नुकसान हुआ .
Saudi Arabia ने Red Sea तक जाने वाली पाइपलाइनों के जरिए इस झटके को कुछ हद तक कम करने की कोशिश की, लेकिन तेल क्षेत्र को फिर भी भारी नुकसान हुआ . युद्ध से पहले Hormuz के रास्ते Saudi तेल निर्यात औसतन 60 से 70 लाख बैरल प्रतिदिन था। संघर्ष के दौरान इस मार्ग से आवाजाही सामान्य स्तर के 10% से भी नीचे चली गई
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तेल की ऊंची कीमतों से दूसरी तिमाही में Saudi बजट घाटा घटकर लगभग 9 अरब डॉलर रह गया। इस दौरान तेल राजस्व में सालाना आधार पर 22% की वृद्धि हुई . लेकिन यह राहत सीमित रही, क्योंकि युद्ध से जुड़े सैन्य और अन्य सरकारी खर्च तेजी से बढ़े।
2026 की पहली तिमाही में Saudi Arabia का बजट घाटा रिकॉर्ड 33.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में सरकारी खर्च सालाना आधार पर 20% बढ़ा . यानी ऊंची तेल कीमतों से मिलने वाली अतिरिक्त आय का बड़ा हिस्सा बढ़ती सरकारी और सुरक्षा जरूरतों के दबाव में आ गया।
Aramco Saudi Arabia की सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनी है। इसलिए Aramco के बड़े व्यावसायिक खर्चों पर Saudi सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं का असर पड़ना स्वाभाविक है। युद्ध ने एक साथ दो समस्याएं पैदा की हैं—Hormuz संकट के कारण तेल राजस्व और निर्यात पर दबाव, तथा सैन्य जरूरतों के कारण सरकारी खर्च में उछाल।
ऐसे माहौल में Aston Martin की प्रस्तावित स्पॉन्सरशिप वृद्धि एक गैर-जरूरी और बहु-मिलियन डॉलर का विवेकाधीन खर्च बन गई। Riyadh के लिए इसे रोकना, युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जरूरी खर्चों की ओर संसाधन मोड़ने का अपेक्षाकृत आसान तरीका था .
Aston Martin टीम Saudi निवेश की बड़ी लाभार्थियों में रही है। 2022 में शुरू हुई Aramco साझेदारी को 2024 में विशेष टाइटल स्पॉन्सरशिप तक बढ़ाया गया, और इस सौदे का अनुमानित मूल्य करीब 3 करोड़ डॉलर सालाना बताया गया था . अब टीम आधिकारिक तौर पर Aston Martin Aramco Formula One Team के नाम से प्रतिस्पर्धा करती है।
टीम की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में नया कारखाना, Honda के साथ वर्क्स इंजन साझेदारी और ग्रिड के शीर्ष हिस्से तक पहुंचने की कोशिश शामिल है। इन योजनाओं के लिए स्थिर वित्तीय समर्थन महत्वपूर्ण है।
2027 के विस्तार पर लगी रोक मौजूदा Aramco डील को रद्द नहीं करती, लेकिन Aston Martin के लिए अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा-कवच जरूर हटा देती है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में Saudi Arabia का F1 पर खर्च करने का उत्साह असीमित नहीं है।