PLA अपनी स्थापना का संबंध 1 अगस्त 1927 के नानचांग विद्रोह से जोड़ती है। उस समय कम्युनिस्ट बलों ने कुओमिन्तांग के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह शुरू किया था । बाद के वर्षों में यही अपेक्षाकृत छोटा बल—जिसे अलग-अलग दौर में रेड आर्मी और आठवीं रूट आर्मी के नाम से जाना गया—चीनी गृहयुद्ध तथा 1937–1945 के जापान-विरोधी युद्ध में असममित और जन-आधारित युद्धनीति पर निर्भर रहा ।
अप्रैल 1932 में 18 वर्षीय शी झोंगशुन ने शान्शी प्रांत के योंगशोउ काउंटी के पहाड़ी क्षेत्र में रेड आर्मी की शान्शी-गांसू गुरिल्ला फोर्स की नवगठित पांचवीं टुकड़ी का नेतृत्व किया। लगभग 200 सैनिकों वाली यह टुकड़ी स्थानीय सरदार की नॉर्थवेस्ट आर्मी की बगावत करने वाली एक बटालियन से पुनर्गठित की गई थी और पास की दूसरी रेड आर्मी इकाई से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही थी ।
शी झोंगशुन की यह भूमिका PLA की उस शुरुआती जमीनी और गुरिल्ला विरासत का उदाहरण मानी जाती है, जिसमें स्थानीय संगठन, सीमित संसाधन और असममित युद्ध महत्वपूर्ण थे ।
1949 में जनवादी गणराज्य चीन की स्थापना के बाद PLA ने गुरिल्ला बल से एक संगठित स्थायी सेना का रूप लेना शुरू किया। थलसेना के साथ नौसेना और वायुसेना जैसी शाखाओं का विस्तार हुआ।
1960 और 1970 के दशकों में चीन ने परमाणु हथियारों तथा रणनीतिक मिसाइल क्षमता का विकास किया। बाद में यही रणनीतिक मिसाइल बल PLA रॉकेट फोर्स के रूप में विकसित हुआ। इससे PLA की भूमिका केवल जमीनी रक्षा तक सीमित नहीं रही और उसमें रणनीतिक प्रतिरोध की क्षमता भी जुड़ गई ।
देंग शियाओपिंग के दौर में PLA ने बड़े पैमाने पर सैनिकों की संख्या कम की और “संख्या से अधिक गुणवत्ता” पर जोर देना शुरू किया। 1990 और 2000 के दशकों में उसका ध्यान सूचना-आधारित युद्ध, आधुनिक कमांड, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटर, खुफिया, निगरानी और टोही प्रणालियों—जिन्हें C4ISR कहा जाता है—पर गया। सटीक मारक हथियारों और संयुक्त अभियानों के सिद्धांतों को भी महत्व मिला ।
इसी बदलाव ने PLA को एक पारंपरिक, तकनीक-केंद्रित और विभिन्न सैन्य शाखाओं के बीच समन्वय करने वाली सेना की दिशा में आगे बढ़ाया।
2017 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 19वीं कांग्रेस के दौरान शी चिनफिंग ने PLA के आधुनिकीकरण के लिए तीन व्यापक समयसीमाएं निर्धारित कीं ।
विश्लेषणों के अनुसार, 2027 का लक्ष्य मशीनीकरण, सूचना-प्रौद्योगिकी और सैन्य खुफिया क्षमताओं के एकीकृत विकास पर केंद्रित है ।
99वीं वर्षगांठ से ठीक पहले शी चिनफिंग ने PLA में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सैन्य उपयोग को तेज करने का निर्देश दिया। एक पोलितब्यूरो समूह अध्ययन सत्र में उन्होंने “बुद्धिमान सैन्य प्रणाली” विकसित करने और मानवरहित तकनीकों के इस्तेमाल का विस्तार करने की बात कही ।
निर्देश का जोर मानवरहित और बुद्धिमान तकनीकों के सैन्य अनुप्रयोग, नेटवर्क सूचना प्रणालियों के विकास तथा धीरे-धीरे एक एकीकृत बुद्धिमान सैन्य प्रणाली बनाने पर था । रणनीतिक दृष्टि से यह सूचना-आधारित युद्ध से AI-संचालित या “इंटेलिजेंटाइज्ड” युद्ध की ओर अगला कदम है।
अमेरिकी वायुसेना से जुड़े एयर यूनिवर्सिटी के विश्लेषणों में भी कहा गया है कि 2027 का लक्ष्य मशीनीकरण, सूचना-आधारित क्षमता और बुद्धिमत्ता—तीनों के एकीकृत विकास को तेज करने से जुड़ा है। इसलिए 2026 का AI निर्देश किसी बिल्कुल नई दिशा के बजाय पहले से तय रोडमैप को तेज करने के रूप में देखा जा सकता है ।
वर्ष 2026 को आधिकारिक और संबंधित विश्लेषणों में 2027 के शताब्दी लक्ष्य से पहले का “महत्वपूर्ण वर्ष” बताया गया है । इस चरण में PLA के लिए तीन प्राथमिकताएं उभरती हैं—सैन्य उपकरणों का तेजी से उन्नयन, संयुक्त युद्धक तैयारी में सुधार और AI का व्यापक एकीकरण ।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना, जो 2026 से 2030 तक चलेगी, के संदर्भ में क्वांटम सेंसिंग, AI और हाइपरसोनिक हथियारों से निपटने वाली तकनीकों जैसी उन्नत क्षमताओं के शुरुआती प्रदर्शन की संभावना जताई गई है। हालांकि, संबंधित विश्लेषण यह भी संकेत देता है कि इन प्रणालियों में से कुछ उस समय तक पूरी तरह परिपक्व न हुई हों ।
इस तरह 99वीं वर्षगांठ का संदेश दोहरा था: एक ओर 1927 की साधारण राइफलों और गुरिल्ला दस्तों से शुरू हुई ऐतिहासिक यात्रा का उत्सव, दूसरी ओर 2027 की समयसीमा से पहले तकनीकी और संगठनात्मक प्रगति दिखाने की तैयारी। PLA की अगली परीक्षा केवल यह नहीं होगी कि उसके पास कितने आधुनिक हथियार हैं, बल्कि यह भी कि वह AI, नेटवर्क प्रणालियों, मानवरहित तकनीक और संयुक्त अभियानों को कितनी प्रभावी ढंग से एक साथ इस्तेमाल कर पाती है।