बैठक में व्यापक आर्थिक शासन (economic governance) से लेकर उभरते क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग तक कई विषयों पर चर्चा हुई, जिससे एशिया‑प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक एकजुटता को मजबूत किया जा सके।
चीनी अधिकारियों ने इस मंच पर खुले व्यापार, बहुपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के महत्व को रेखांकित किया। उनका कहना था कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एशिया‑प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं को मिलकर काम करना चाहिए।
चीन ने यह भी संकेत दिया कि वह उच्च‑मानक ‘ओपनिंग‑अप’ नीतियों को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रीय आर्थिक विकास में सहयोगात्मक भूमिका निभाना चाहता है।
दो दिन चली चर्चा मुख्य रूप से कुछ प्रमुख आर्थिक विषयों के इर्द‑गिर्द केंद्रित रही:
क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण
सदस्य देशों ने एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और बाजारों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के लिए समर्थन
प्रतिनिधियों ने नियम‑आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली को बनाए रखने और WTO की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया।
डिजिटल सहयोग और तकनीकी परिवर्तन
डिजिटल व्यापार, ई‑कॉमर्स और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े नियमों और सहयोग पर भी चर्चा हुई, क्योंकि तकनीक सीमापार व्यापार और आर्थिक विकास में तेजी से अहम भूमिका निभा रही है।
ग्रीन और सतत आर्थिक विकास
जलवायु‑अनुकूल और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ विकास को क्षेत्रीय आर्थिक रणनीति का हिस्सा बनाने पर भी विचार हुआ।
सूझोउ की बैठक ऐसे समय में हुई जब दुनिया में कई आर्थिक और राजनीतिक तनाव मौजूद हैं। रिपोर्टों के अनुसार प्रतिनिधियों ने व्यापार असंतुलन, आपूर्ति‑श्रृंखला लचीलापन और वैश्विक झटकों का व्यापार पर प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की।
टैरिफ विवाद और बड़े व्यापार अधिशेष जैसे विषय व्यापक संदर्भ का हिस्सा थे, जो यह दिखाते हैं कि क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
APEC में ट्रेड मंत्रियों की बैठक आमतौर पर होस्ट वर्ष के मध्य में आयोजित एक अहम नीतिगत पड़ाव होती है। इसका उद्देश्य आगामी नेताओं की बैठक के लिए नीति‑दिशा तय करना होता है।
सूझोउ में हुई चर्चाओं के निष्कर्ष और प्रस्ताव नवंबर 2026 में शेनझेन में होने वाले APEC Economic Leaders’ Meeting के एजेंडा को आकार देने में मदद करेंगे।
हालाँकि इस बैठक में कोई बाध्यकारी समझौते नहीं हुए, लेकिन यह इस बात का संकेत देती है कि एशिया‑प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाएँ मौजूदा वैश्विक व्यापार माहौल में कैसे आगे बढ़ना चाहती हैं। खुले बाजार, मजबूत आपूर्ति‑श्रृंखलाएँ, डिजिटल सहयोग और सतत विकास—ये सभी मुद्दे 2026 में APEC की आर्थिक चर्चा के केंद्र में बने रहने की संभावना है।
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