संयुक्त बयान में तीनों देशों ने इज़राइल की कार्रवाई को “अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का घोर उल्लंघन” बताया . उन्होंने खास तौर पर स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा ढांचे को निशाना बनाए जाने तथा महिलाओं और बच्चों समेत नागरिकों के हताहत होने पर आपत्ति जताई .
मध्यस्थ देशों का कहना है कि जारी सैन्य अभियान स्वयं युद्धविराम समझौते का भी उल्लंघन है . हालांकि बयान में लगाए गए ये आरोप संबंधित देशों की आधिकारिक स्थिति को दर्शाते हैं।
कतर, मिस्र और तुर्किये ने चेतावनी दी कि हमले युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण को लागू करने की कोशिशों को खतरे में डाल रहे हैं . बयान के अनुसार, यह स्थिति उस समय और गंभीर है जब हमास ने रोडमैप को स्वीकार किया है—विशेष रूप से हथियारों को सीमित करने से जुड़ी व्यवस्था को .
मध्यस्थ देशों ने कहा कि अगर संघर्ष जारी रहा, तो हाल में कम हुई तनावपूर्ण स्थिति फिर बिगड़ सकती है और गाज़ा का पहले से ही गंभीर मानवीय संकट और गहरा सकता है .
संयुक्त बयान के बाद सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल के नए हमलों में 20 से अधिक लोग मारे गए . उसी दिन गाज़ा शहर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में हुए ताज़ा हमलों में कम-से-कम दो लोगों की मौत की भी अलग से खबर सामने आई .
इसके अलावा, फलस्तीनी पक्ष ने युद्धविराम शुरू होने के बाद से इज़राइल द्वारा 4,059 उल्लंघन दर्ज किए जाने का दावा किया है। इस आंकड़े में 1,804 हवाई हमले और गोलाबारी शामिल बताई गई हैं . यह आंकड़ा संयुक्त बयान का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बाहरी पर्यवेक्षक द्वारा उद्धृत फलस्तीनी दस्तावेज़ीकरण पर आधारित है .
तीनों मध्यस्थ देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इज़राइल पर आवश्यक दबाव डालने की अपील की, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों और युद्धविराम ढांचे के तहत की गई प्रतिबद्धताओं का पालन करे .
उन्होंने विशेष रूप से इन कदमों की मांग की:
यह संयुक्त बयान कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि गाज़ा युद्धविराम के तीनों प्रमुख मध्यस्थों ने एक ही मंच से हमलों को समझौते और अंतरराष्ट्रीय कानून, दोनों के लिए खतरा बताया है।