चीन में जन्मे टाइकून चेन झी पर कंबोडिया से संचालित 15 अरब डॉलर के ट्रांसनेशनल साइबर फ्रॉड साम्राज्य का आरोप लगा है। उन्हें जनवरी 2026 में कंबोडिया से चीन प्रत्यर्पित किया गया। उनके शीर्ष ऑपरेटिव लियू रेन, जो जिनबेई ग्रुप के संस्थापक थे, को जून 2026 में प्रत्यर्पित किया गया। यह मेकांग क्षेत्र में स्कैम सेंटरों के खिल...

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दक्षिण पूर्व एशिया में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई जून 2026 में एक नए शिखर पर पहुंच गई, जब चीनी अधिकारियों ने कंबोडिया से लियू रेन का प्रत्यर्पण करवाया। चीनी अधिकारियों के अनुसार, लियू रेन कथित अपराध सरगना चेन झी का "शीर्ष ऑपरेटिव" था । यह मामला दुनिया भर के पीड़ितों से अरबों डॉलर की ठगी करने वाले स्कैम सेंटर उद्योग के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक है।
37 वर्षीय चेन झी, चीन में जन्मे प्रिंस होल्डिंग ग्रुप के संस्थापक थे, जिन्हें कंबोडिया में गिरफ्तार किया गया और 6-7 जनवरी 2026 को चीन प्रत्यर्पित कर दिया गया । चीनी और कंबोडिया दोनों की नागरिकता रखने वाले चेन को चीनी अधिकारियों ने एक बड़े सीमा पार जुए और धोखाधड़ी सिंडिकेट का सरगना बताया
।
अमेरिकी न्याय विभाग ने 2025 में चेन पर वायर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए थे। आरोप था कि वह एशिया के सबसे बड़े ट्रांसनेशनल आपराधिक संगठनों में से एक चला रहा था और ठगी से जुड़े मामलों में 15 अरब डॉलर तक का बिटकॉइन ट्रांसफर कर चुका था । कथित तौर पर उसके गिरोह ने कंबोडिया में साइबर स्कैम कंपाउंड संचालित किए, जहां नकली रोमांटिक रिश्तों और क्रिप्टोकरेंसी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को ठगा जाता था
। चेन के प्रत्यर्पण के बाद, कंबोडिया के केंद्रीय बैंक ने उसके समूह से जुड़े प्रिंस बैंक को बंद करने का आदेश दिया
।
चीनी मंत्रालय ने लियू रेन को चेन झी के आपराधिक समूह का "एक केंद्रीय व्यक्ति" बताया । उसे 17 जून 2026 को कंबोडिया से चीन प्रत्यर्पित किया गया
। चीनी लोक सुरक्षा मंत्रालय (MPS) के अधिकारी उसे नोम पेन्ह से लेकर आए और MPS ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें लियू को हथकड़ी लगी हुई दिखाया गया, जब उसे चाइना सदर्न एयरलाइंस के विमान से उतारा जा रहा था
।
गिरफ्तारी से पहले लियू रेन कंबोडिया में अंहुई चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष थे। उसे नोम पेन्ह में साइबर फ्रॉड, मानव तस्करी, हथियारों की तस्करी, जबरन वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह में गिरफ्तार किया गया था । उसका प्रत्यर्पण दर्शाता है कि स्कैम सेंटरों पर कार्रवाई केवल शीर्ष नेतृत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे संगठनात्मक ढांचे को ध्वस्त करने के लिए फैल रही है
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चेन झी के निर्देशन में, लियू रेन ने 2016 में कंबोडिया में जिनबेई ग्रुप (जिन बेई ग्रुप के रूप में भी रिपोर्ट) की स्थापना की थी । यह समूह कई ऑनलाइन जुआ प्लेटफॉर्म और तथाकथित "टेलीकॉम फ्रॉड पार्क" संचालित करता था, जो आक्रामक रूप से चीनी नागरिकों को ऑनलाइन जुआ और बड़े पैमाने पर टेलीकॉम धोखाधड़ी में फंसाता था
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चेन और लियू पर कई देशों में गंभीर आरोप लगे हैं:
अमेरिकी ट्रेजरी ने चेन और उसके व्यवसायों पर भी प्रतिबंध लगाए थे, जो कंबोडिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय समूहों में से एक, प्रिंस ग्रुप का हिस्सा थे ।
चेन झी और लियू रेन के लगातार प्रत्यर्पण चीन और कंबोडिया के बीच कानून प्रवर्तन सहयोग में एक महत्वपूर्ण वृद्धि का संकेत देते हैं। कंबोडिया के विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा पार आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ देश की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, और स्कैम सेंटरों पर कार्रवाई जारी रहेगी । मेकांग क्षेत्र में स्कैम-सेंटर उद्योग के लिए, यह मामला एक स्पष्ट चेतावनी है कि अच्छी तरह से जुड़े ऑपरेटर भी अंतरराष्ट्रीय न्याय का सामना कर सकते हैं।
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चीन में जन्मे टाइकून चेन झी पर कंबोडिया से संचालित 15 अरब डॉलर के ट्रांसनेशनल साइबर फ्रॉड साम्राज्य का आरोप लगा है। उन्हें जनवरी 2026 में कंबोडिया से चीन प्रत्यर्पित किया गया।
चीन में जन्मे टाइकून चेन झी पर कंबोडिया से संचालित 15 अरब डॉलर के ट्रांसनेशनल साइबर फ्रॉड साम्राज्य का आरोप लगा है। उन्हें जनवरी 2026 में कंबोडिया से चीन प्रत्यर्पित किया गया। उनके शीर्ष ऑपरेटिव लियू रेन, जो जिनबेई ग्रुप के संस्थापक थे, को जून 2026 में प्रत्यर्पित किया गया। यह मेकांग क्षेत्र में स्कैम सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई का एक बड़ा कदम है।