| पैरामीटर | H1 2026 | H1 2025 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| रेवेन्यू | 1,736 करोड़ रुपये (~$257M) | ~701 करोड़ रुपये | +147.42% |
| ग्रॉस प्रॉफिट | 989 करोड़ रुपये | 486 करोड़ रुपये | +103.78% |
| ग्रॉस मार्जिन | 56.9% | ~70% | गिरावट |
| नेट लॉस (शेयरधारकों को देय) | -11.6 करोड़ रुपये (~$1.7M) | -270.9 करोड़ रुपये | -95.73% |
H1 2026 का अकेला रेवेन्यू कंपनी के पूरे साल 2025 के राजस्व (लगभग 1,500 करोड़ रुपये) को पार कर गया । गौरतलब है कि मूर थ्रेड्स ने Q1 2026 में शेयरधारकों को देय आधार पर 29.36 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज कर मुनाफे में वापसी की थी, लेकिन H1 के लिए यह आंकड़ा मामूली नुकसान में आ गया ।
रेवेन्यू में जबरदस्त उछाल के पीछे मूर थ्रेड्स के फ्लैगशिप GPU चिप्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन (मास प्रोडक्शन) है । इसने चीन में AI कंप्यूटिंग की मांग को तेजी से बढ़ा दिया है। चीनी कंपनियां Nvidia के विकल्प के तौर पर तेजी से देशी चिप्स अपनाने लगी हैं । डेटा सेंटर और AI ट्रेनिंग तथा इंफेरेंस वर्कलोड में मूर थ्रेड्स के फुल-फंक्शन GPU की मांग को AI इंडस्ट्री के बूम ने और बढ़ावा दिया । कंपनी ने कई हज़ार GPU वाले इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग क्लस्टर की तैनाती को एक प्रमुख कारण बताया है ।
बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक बाधाओं के बीच सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए, मूर थ्रेड्स ने सक्रिय रूप से इन्वेंट्री (मालसूची) की खरीद बढ़ा दी । इसके चलते H1 2026 में ऑपरेटिंग गतिविधियों से नकदी बहिर्वाह (net cash outflow) -2,169 करोड़ रुपये हो गया। यह चिप की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारी प्री-पेमेंट और इन्वेंट्री बिल्ड-अप को दर्शाता है । Q1 2026 के अंत तक, कंपनी के प्रीपेमेंट 2,361 करोड़ रुपये और इन्वेंट्री 2,195 करोड़ रुपये हो गए थे, जो सप्लाई चेन स्टॉकपाइलिंग (जमाखोरी) के पैमाने को दर्शाता है ।