इस ओपन-सोर्स रिलीज़ के साथ ही X ने 'अंडर द हुड' नाम का एक नया ट्रांसपेरेंसी टूल भी लॉन्च किया है । यह फीचर अकाउंट सेटिंग्स में एक नए पेज के रूप में दिखाई देगा। जो यूजर पिछले एक महीने में कम से कम 10 पोस्ट कर चुके हैं, वे एक JSON फ़ाइल डाउनलोड कर सकते हैं। इस फ़ाइल की मदद से वे देख सकते हैं कि उनके अकाउंट या उनकी किसी पोस्ट पर कोई ऐसा लेबल (जैसे NSFW या Civic Integrity) तो नहीं लगा है, जिसने उनकी दृश्यता को सीमित किया हो । X के VP ऑफ प्रोडक्ट कीथ कोलमैन ने TechCrunch को बताया कि यूजर इस JSON फ़ाइल को एक LLM (जैसे Grok) में डालकर भी समझ सकते हैं कि एल्गोरिदम ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया ।
डेवलपर्स और रिसर्चर्स अब इस पब्लिक GitHub रिपॉजिटरी में पुल अनुरोध (पुल रिक्वेस्ट) सबमिट कर सकते हैं, रैंकिंग के तंत्र का अध्ययन कर सकते हैं, और रैंकर के कुछ हिस्सों को अपने सिस्टम पर भी चला सकते हैं ।
इस रिलीज़ में जानबूझकर Grok-आधारित मॉडरेशन सिस्टम को शामिल नहीं किया गया । कोलमैन के अनुसार, ऐसा इसलिए किया गया ताकि बैड एक्टर इन सिस्टम्स को रिवर्स-इंजीनियर करके उन्हें बायपास न कर सकें ।
यह पूरा कदम यूजर्स और नियामकों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही चिंताओं का जवाब है, जिनमें ओपेक शैडोबैनिंग, कंटेंट क्यूरेशन में कथित राजनीतिक पूर्वाग्रह और चुनावों पर संभावित प्रभाव शामिल हैं । रैंकिंग लॉजिक को ऑडिट करने योग्य बनाकर और प्रति-अकाउंट विजिबिलिटी डेटा देकर X यह साबित करना चाहता है कि उसके सिस्टम लेबल राजनीतिक दृष्टिकोण के बजाय नियम उल्लंघन के आधार पर लागू करते हैं। कोलमैन ने इस पहल को 'रैडिकल ट्रांसपेरेंसी' के ज़रिए विश्वास बनाने की कोशिश बताया और कहा कि कंपनी ऐसी चीज़ें जारी कर रही है जिसे देख 'लोग चौंक जाएंगे' ।
इस ओपन-सोर्स रिलीज़ के साथ ही X ने 'अंडर द हुड' नाम का एक नया ट्रांसपेरेंसी टूल भी लॉन्च किया है । यह फीचर अकाउंट सेटिंग्स में एक नए पेज के रूप में दिखाई देगा। जो यूजर पिछले एक महीने में कम से कम 10 पोस्ट कर चुके हैं, वे एक JSON फ़ाइल डाउनलोड कर सकते हैं। इस फ़ाइल की मदद से वे देख सकते हैं कि उनके अकाउंट या उनकी किसी पोस्ट पर कोई ऐसा लेबल (जैसे NSFW या Civic Integrity) तो नहीं लगा है, जिसने उनकी दृश्यता को सीमित किया हो । X के VP ऑफ प्रोडक्ट कीथ कोलमैन ने TechCrunch को बताया कि यूजर इस JSON फ़ाइल को एक LLM (जैसे Grok) में डालकर भी समझ सकते हैं कि एल्गोरिदम ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया ।
डेवलपर्स और रिसर्चर्स अब इस पब्लिक GitHub रिपॉजिटरी में पुल अनुरोध (पुल रिक्वेस्ट) सबमिट कर सकते हैं, रैंकिंग के तंत्र का अध्ययन कर सकते हैं, और रैंकर के कुछ हिस्सों को अपने सिस्टम पर भी चला सकते हैं ।
इस रिलीज़ में जानबूझकर Grok-आधारित मॉडरेशन सिस्टम को शामिल नहीं किया गया । कोलमैन के अनुसार, ऐसा इसलिए किया गया ताकि बैड एक्टर इन सिस्टम्स को रिवर्स-इंजीनियर करके उन्हें बायपास न कर सकें ।
यह पूरा कदम यूजर्स और नियामकों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही चिंताओं का जवाब है, जिनमें ओपेक शैडोबैनिंग, कंटेंट क्यूरेशन में कथित राजनीतिक पूर्वाग्रह और चुनावों पर संभावित प्रभाव शामिल हैं । रैंकिंग लॉजिक को ऑडिट करने योग्य बनाकर और प्रति-अकाउंट विजिबिलिटी डेटा देकर X यह साबित करना चाहता है कि उसके सिस्टम लेबल राजनीतिक दृष्टिकोण के बजाय नियम उल्लंघन के आधार पर लागू करते हैं। कोलमैन ने इस पहल को 'रैडिकल ट्रांसपेरेंसी' के ज़रिए विश्वास बनाने की कोशिश बताया और कहा कि कंपनी ऐसी चीज़ें जारी कर रही है जिसे देख 'लोग चौंक जाएंगे' ।