WhatsApp ने 29 जून 2026 से वैकल्पिक usernames रिजर्व करने की सुविधा शुरू की है; username से चैटिंग का व्यापक रोलआउट साल के आगे के महीनों में चरणबद्ध तरीके से होगा। [17][31] व्यक्ति और व्यवसाय WhatsApp या उसके बिजनेस टूल्स के जरिए उपलब्ध हैंडल पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर रिजर्व कर सकते हैं; हाई प्रोफाइल नामों और उनक...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is WhatsApp’s new username-based privacy feature, expected to roll out later in 2026, how can users and businesses reserve first-come-f. Article summary: WhatsApp’s planned username feature is an optional way to start chats using a unique handle rather than disclosing a mobile number. Username reservations have opened ahead of a phased country-by-country rollout later in . Topic tags: general, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers
WhatsApp अब आपकी सार्वजनिक संपर्क पहचान को मोबाइल नंबर से अलग करने की तैयारी कर रहा है। नया, वैकल्पिक username फीचर शुरू होने के बाद लोग और व्यवसाय नए चैट की शुरुआत करते समय अपना फोन नंबर साझा करने के बजाय एक unique handle इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि WhatsApp अकाउंट बनाने और चलाने के लिए verified phone number जरूरी रहेगा।
Username रिजर्वेशन 29 जून 2026 से शुरू हो चुका है, लेकिन username के जरिए मैसेजिंग अभी सभी जगह उपलब्ध नहीं है। इसका रोलआउट साल के आगे के महीनों में धीरे-धीरे किया जाएगा।
Username ऐसा वैकल्पिक हैंडल होगा जिसे नए संपर्कों के साथ साझा करके फोन नंबर छिपाया जा सकेगा। यानी कोई ग्राहक, खरीदार, क्रिएटर, ग्रुप सदस्य या अनजान व्यक्ति आपसे संपर्क करना चाहे, तो उसे हर बार आपका निजी मोबाइल नंबर जानना जरूरी नहीं होगा।
लेकिन यह WhatsApp को anonymous या बिना नंबर वाला अकाउंट सिस्टम नहीं बनाता। अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने के लिए verified phone number आगे भी जरूरी रहेगा। जो लोग username नहीं अपनाना चाहते, वे पहले की तरह फोन नंबर के जरिए WhatsApp इस्तेमाल कर सकेंगे।
एक अहम बात यह भी है कि username रिजर्व करना और username से चैट करना दो अलग चरण हैं। रिजर्वेशन मिलने का मतलब यह नहीं है कि आपके अकाउंट या देश में username-based messaging उसी समय शुरू हो गई है।
व्यक्तिगत अकाउंट में WhatsApp इस विकल्प को account या profile settings के जरिए उपलब्ध करा रहा है। जब आपके अकाउंट तक सुविधा पहुंचेगी, तो ऐप के भीतर सूचना दिखाई दे सकती है। सामान्य उपलब्ध usernames पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिए जा रहे हैं, इसलिए लोकप्रिय नाम जल्दी खत्म हो सकते हैं।
व्यवसाय WhatsApp Business और उससे जुड़े business-management tools के जरिए अपना branded username लेने की कोशिश कर सकते हैं। इससे कंपनी नए ग्राहकों के सामने अपना एकसमान WhatsApp identity दिखा सकेगी, बिना हर नए संपर्क को customer-service नंबर सार्वजनिक किए।
सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि username उसी आधिकारिक WhatsApp, WhatsApp Business या Meta business account पर रिजर्व किया जाए जो उस पहचान का वास्तविक मालिक है। किसी तीसरी वेबसाइट, अनजान संदेश या ऐसे व्यक्ति पर भरोसा न करें जो username “सुरक्षित” कराने के बदले login details, verification code या भुगतान मांगे।
WhatsApp ने सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं और अन्य चर्चित पहचानों से जुड़े usernames को सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए खुला नहीं छोड़ा है। उद्देश्य यह है कि कोई व्यक्ति किसी नेता या संस्था का विश्वसनीय दिखने वाला नाम अपनाकर लोगों से पैसे, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी न मांगे।
सिंगापुर में की गई जांच में प्रधानमंत्री Lawrence Wong, स्वास्थ्य मंत्री Ong Ye Kung और विदेश मंत्री Vivian Balakrishnan के नामों से जुड़े handles उपलब्ध नहीं मिले। इनके मिलते-जुलते रूप—जैसे underscore, नंबर या बदली हुई spelling वाले usernames—भी ब्लॉक किए गए हैं।
इस व्यवस्था का एक व्यावहारिक अपवाद भी है। यदि किसी आम व्यक्ति का वास्तविक नाम किसी सुरक्षित सार्वजनिक नाम से मेल खाता है, तो वह उसी नाम का username पाने में सक्षम नहीं हो सकता। WhatsApp का कहना है कि protected names को उनके वैध मालिकों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए, लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से हर विवाद के लिए पूरी तरह पारदर्शी और स्वतंत्र appeal process स्पष्ट नहीं है।
WhatsApp usernames को Instagram या अन्य सोशल मीडिया की तरह खुली directory बनाने की योजना नहीं है। कंपनी के अनुसार कोई public directory, autocomplete suggestion या discovery feed नहीं होगा। पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को exact username जानना होगा; वह केवल अधूरे नाम या broad search से अकाउंट नहीं खोज सकेगा।
यूजर एक अलग username key भी सक्रिय कर सकेंगे। यह विकल्प चालू होने पर केवल username जान लेना किसी को बातचीत शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा; संदेश भेजने वाले को अलग key भी पता होनी चाहिए। यह उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो अपना username सार्वजनिक रूप से साझा करना चाहते हैं, लेकिन हर व्यक्ति को पहली बार संपर्क शुरू करने की अनुमति नहीं देना चाहते।
WhatsApp का कहना है कि पहली बार संपर्क करने वाले संदेशों के साथ संदर्भ-आधारित safety information दिखाई जाएगी। इसमें sender का देश और अकाउंट से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। प्राप्तकर्ता के पास संदेश को block या report करने के विकल्प भी रहेंगे।
कंपनी संदिग्ध अकाउंट पहचानने और किसी अकाउंट के नए संपर्कों तक पहुंचने की संख्या सीमित करने वाली प्रणालियां विकसित कर रही है। इससे बड़े पैमाने पर spam और scam अभियान चलाना कठिन हो सकता है। फिर भी कोई भी automated system हर धोखाधड़ी वाले अकाउंट को संदेश पहुंचने से पहले पकड़ने की गारंटी नहीं देता।
इस फीचर का सीधा लाभ यह है कि अनजान लोगों से संपर्क करते समय निजी मोबाइल नंबर बार-बार साझा करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे unwanted calls और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नंबरों का अनौपचारिक संग्रह घट सकता है।
लेकिन username इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसके पीछे मौजूद व्यक्ति असली है। ठग मिलते-जुलते handles, चोरी की गई profile photos, आकर्षक display names, hacked accounts या भरोसेमंद संस्थाओं जैसे दिखने वाले links का इस्तेमाल कर सकते हैं। केवल नेताओं, सरकारी संस्थाओं और कुछ चर्चित नामों को सुरक्षित कर देने से आम लोगों, रिश्तेदारों, स्थानीय कारोबारों या कम चर्चित अधिकारियों की impersonation पूरी तरह नहीं रुकेगी।
फोन नंबर की privacy भी हर स्थिति में पूरी तरह खत्म नहीं होगी। मौजूदा chats, groups, पहले से जुड़े contacts या ऐसे interactions में नंबर दिखाई दे सकता है जहां यूजर ने खुद उसे साझा किया हो। इसलिए username exposure कम करता है, उसे पूरी तरह समाप्त नहीं करता।
भारत के Ministry of Electronics and Information Technology ने WhatsApp से देश में username rollout रोकने को कहा है, ताकि इस व्यवस्था पर बातचीत हो सके और कंपनी यह स्पष्ट करे कि दुरुपयोग कैसे रोका जाएगा। मंत्रालय की चिंता है कि फोन नंबर दिखाए बिना होने वाला pseudonymous first contact phishing, impersonation और financial fraud के मामलों में जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान और जांच को कठिन बना सकता है।
WhatsApp का पक्ष है कि usernames optional हैं, अकाउंट बनाने के लिए verified phone number अब भी आवश्यक है और व्यवस्था में protected high-profile names, exact-handle contact तथा anti-abuse systems जैसे सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
यही इस फीचर का मूल trade-off है: आम यूजर को अपना निजी नंबर कम साझा करना पड़ेगा, लेकिन ठगों को एक नया ऐसा identity format भी मिल सकता है जिसे भरोसेमंद और branded दिखाना आसान हो। इसलिए reservation system के साथ-साथ तेज platform enforcement और स्पष्ट username-dispute प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
WhatsApp usernames उन लोगों और व्यवसायों के लिए लंबे समय से मौजूद privacy gap को कम कर सकते हैं जिन्हें अनजान लोगों से संपर्क करना पड़ता है। लेकिन इस सुविधा की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि WhatsApp नंबर छिपाने का लाभ देते हुए impersonation और scam को कितना प्रभावी ढंग से रोक पाता है।
Studio Global AI
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WhatsApp ने 29 जून 2026 से वैकल्पिक usernames रिजर्व करने की सुविधा शुरू की है; username से चैटिंग का व्यापक रोलआउट साल के आगे के महीनों में चरणबद्ध तरीके से होगा। [17][31]
WhatsApp ने 29 जून 2026 से वैकल्पिक usernames रिजर्व करने की सुविधा शुरू की है; username से चैटिंग का व्यापक रोलआउट साल के आगे के महीनों में चरणबद्ध तरीके से होगा। [17][31] व्यक्ति और व्यवसाय WhatsApp या उसके बिजनेस टूल्स के जरिए उपलब्ध हैंडल पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर रिजर्व कर सकते हैं; हाई प्रोफाइल नामों और उनके मिलते जुलते रूपों को नकल रोकने के लिए ब्लॉक किया जा रहा है। [1][7][45]
फीचर में exact username संपर्क, वैकल्पिक username key, पहली बार संपर्क की चेतावनियां, ब्लॉक रिपोर्ट विकल्प और संदिग्ध अकाउंट पर सीमाएं शामिल हैं—फिर भी भारत ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और पहचान छिपाने के जोखिम को लेकर रोलआउट र...