वियतनाम के वित्त मंत्रालय के अनुसार, हरित विकास और सतत विकास के जरिए 2050 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने के लिए देश की दीर्घकालिक निवेश जरूरत 670–700 अरब डॉलर के बीच है । यह रकम सरकारी बजट और पारंपरिक बैंक ऋण की क्षमता से कहीं अधिक है । इसलिए निजी क्षेत्र, पूंजी बाजार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से पूंजी जुटाना आवश्यक होगा।
उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय के अधीन Institute of Energy का अनुमान कुछ कम है। उसके अनुसार कुल जरूरत 533.9–657.8 अरब डॉलर हो सकती है। इसमें से 499–631 अरब डॉलर बिजली उत्पादन और ऊर्जा स्रोतों के विकास पर खर्च होंगे, जिनमें ऑनशोर और ऑफशोर पवन ऊर्जा, पंप्ड-स्टोरेज जलविद्युत और हाइड्रोजन शामिल हैं ।
इस जरूरत का बड़ा हिस्सा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में लगेगा। वित्त मंत्रालय ने जलवायु अनुकूलन की लागत करीब 368 अरब डॉलर बताई है, जो हर साल सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के लगभग 6.8% के बराबर है ।
विश्व बैंक के 2024 के आकलन के अनुसार, 2022 से 2050 के बीच वियतनाम की वाणिज्यिक और औद्योगिक परिसंपत्तियों को जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक सक्षम बनाने में करीब 228 अरब डॉलर लग सकते हैं । विश्व बैंक ने 2040 तक जलवायु-लचीले और नेट-ज़ीरो विकास मार्ग की कुल जरूरत लगभग 368 अरब डॉलर आंकी है ।
सम्मेलन में International Finance Corporation (IFC), FiinGroup और अन्य विशेषज्ञों ने कहा कि चुनौती धन की उपलब्धता से अधिक परियोजनाओं की गुणवत्ता और निवेश-योग्यता की है । प्रमुख बाधाएं ये हैं:
“Where Green Capital Connects Investment Opportunities” थीम पर आयोजित इस सम्मेलन की सह-मेजबानी Nam A Bank, हो ची मिन्ह सिटी स्थित Vietnam International Financial Centre (VIFC-HCMC), FiinGroup और Global Green Growth Institute (GGGI) Vietnam ने की ।
वियतनाम का ग्रीन बॉन्ड बाजार अभी शुरुआती चरण में है। 2025 में स्थानीय मुद्रा में केवल 5 ग्रीन बॉन्ड निर्गम हुए, जिनकी कुल कीमत 3,407 अरब वियतनामी डोंग, यानी लगभग 14 करोड़ डॉलर, रही ।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय मानकों, जैसे International Capital Market Association (ICMA) के Green Bond Principles, के अनुरूप एक स्पष्ट और साझा ग्रीन बॉन्ड टैक्सोनॉमी बनाने की मांग की । इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है, सत्यापन प्रक्रिया सरल हो सकती है और बॉन्ड जारी करने की लागत घट सकती है ।
29 जून 2026 को वियतनाम ने अपने घरेलू कार्बन बाजार का पायलट चरण शुरू किया और राष्ट्रीय कार्बन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया । यह कदम उत्सर्जन घटाने वाली परियोजनाओं और हरित वित्त के बीच बेहतर संपर्क बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सम्मेलन में VIFC-HCMC को भविष्य में ग्रीन बॉन्ड की लिस्टिंग और कार्बन क्रेडिट कारोबार के लिए एक केंद्रीकृत केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा पर चर्चा हुई । VIFC-HCMC के कार्यकारी बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. Nguyen Huu Huan के अनुसार, इसका लक्ष्य एक “Green Capital Conversion Hub” बनना है—ऐसा केंद्र जो परियोजनाओं को मानकीकृत करे, जोखिम घटाए और हरित परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाना आसान बनाए ।
Nam A Bank ने VIFC के तहत Green Finance Community बनाने का प्रस्ताव भी रखा। इसका उद्देश्य साझा मानक तैयार करना, निवेश योग्य परियोजनाओं की जानकारी साझा करना और छोटी-छोटी हरित परियोजनाओं को मिलाकर ऐसे वित्तीय साधन बनाना है जिनमें बड़े निवेशक भी भाग ले सकें ।
सम्मेलन के दौरान Nam A Bank ने SIFEM AG के साथ 2 करोड़ डॉलर के अंतरराष्ट्रीय ग्रीन क्रेडिट समझौते पर हस्ताक्षर किए। SIFEM AG स्विस संघीय सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली विकास वित्त संस्था है। बैंक ने responsAbility Investments AG द्वारा प्रबंधित फंडों से भी अतिरिक्त पूंजी हासिल की, जिससे इस नई सुविधा का कुल आकार 2 करोड़ डॉलर हो गया ।
इस समझौते के बाद Nam A Bank द्वारा जुटाई गई कुल अंतरराष्ट्रीय हरित पूंजी करीब 35 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई । बैंक के उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी Vo Hoang Hai ने बताया कि पहले जुटाई गई हरित पूंजी पूरी तरह परियोजनाओं को ऋण के रूप में दी जा चुकी है ।
नई पूंजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs), नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाली पहलों के लिए किया जाएगा । Nam A Bank के अनुसार, हरित ऋणों की ब्याज दर आम तौर पर पारंपरिक ऋण की तुलना में 0.5–1 प्रतिशत कम होती है ।
वियतनाम के सामने अब दोहरी चुनौती है। पहली, 2050 के लक्ष्य के लिए सैकड़ों अरब डॉलर की पूंजी जुटाना; दूसरी, ऐसी परियोजनाएं तैयार करना जिनमें स्पष्ट राजस्व मॉडल, विश्वसनीय ESG डेटा, पारदर्शी जोखिम आकलन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रिपोर्टिंग हो।
ग्रीन बॉन्ड के साझा मानक, राष्ट्रीय कार्बन बाजार और VIFC-HCMC के प्रस्तावित केंद्रीकृत ढांचे से इस दिशा में आधार तैयार हो सकता है। लेकिन इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी तेजी से बेहतर परियोजना-तैयारी, जोखिम-साझाकरण और विश्वसनीय सत्यापन व्यवस्था में बदलती हैं।