लंबी अवधि के बॉन्ड से सावधानी, छोटी अवधि में अवसर: UBS की निवेश सलाह
UBS ने 30 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के पीछे भागने के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा निवेश बढ़ाने की सलाह दी है। लंबी अवधि की यील्ड पर महंगाई की चिंता, बढ़ते राजकोषीय घाटे, भारी बॉन्ड सप्लाई और कमजोर मांग का दबाव है, जबकि ETF प्रवाह छोटी अवधि और अधिक तरल उत्पादों की ओर झुकाव दिखाता है।
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UBS ने 30 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के पीछे भागने के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा निवेश बढ़ाने की सलाह दी है।
लंबी अवधि की यील्ड पर महंगाई की चिंता, बढ़ते राजकोषीय घाटे, भारी बॉन्ड सप्लाई और कमजोर मांग का दबाव है, जबकि ETF प्रवाह छोटी अवधि और अधिक तरल उत्पादों की ओर झुकाव दिखाता है।
What is UBS’s August 18 recommendation for investors amid the global long-duration bond selloff, why does it favor short- and medium-maturitIllustration of the contrast between front-end bond income and long-duration market risk.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is UBS’s August 18 recommendation for investors amid the global long-duration bond selloff, why does it favor short- and medium-maturit. Article summary: UBS’s August 18 view is to keep adding selectively to high-quality short- and medium-maturity bonds, rather than chasing 30-year government debt. The bank sees attractive income and materially lower exposure to fiscal, i. Topic tags: general, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clic
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UBS की 18 अगस्त की सलाह साफ है: वैश्विक लंबी अवधि वाले बॉन्ड की बिकवाली के बीच 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड में जल्दबाजी से निवेश करने के बजाय उच्च-गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा तरीके से निवेश बढ़ाया जाए। बैंक के मुताबिक, मौजूदा ऊंची यील्ड से आकर्षक आय मिल सकती है और छोटी अवधि के बॉन्ड लंबी अवधि की तुलना में राजकोषीय तथा महंगाई से जुड़े झटकों के प्रति कम संवेदनशील होते हैं।
2–5 साल के बॉन्ड में 100–230 बेसिस पॉइंट का आय कुशन
UBS का अनुमान है कि उसके पसंदीदा अमेरिकी ट्रेजरी सेगमेंट—यानी 2 से 5 साल की अवधि—में यील्ड को तत्कालीन स्तरों से लगभग 100 से 230 बेसिस पॉइंट बढ़ना होगा, तभी बॉन्ड कीमतों में गिरावट एक साल की आय को पूरी तरह खत्म कर पाएगी। यह पूरे 2–5 साल के सेगमेंट के लिए दी गई सीमा है, हर अवधि के लिए अलग-अलग सीमा नहीं।
Studio Global AI
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"लंबी अवधि के बॉन्ड से सावधानी, छोटी अवधि में अवसर: UBS की निवेश सलाह" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
UBS ने 30 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के पीछे भागने के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा निवेश बढ़ाने की सलाह दी है।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
UBS ने 30 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के पीछे भागने के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा निवेश बढ़ाने की सलाह दी है। लंबी अवधि की यील्ड पर महंगाई की चिंता, बढ़ते राजकोषीय घाटे, भारी बॉन्ड सप्लाई और कमजोर मांग का दबाव है, जबकि ETF प्रवाह छोटी अवधि और अधिक तरल उत्पादों की ओर झुकाव दिखाता है।
लंबी अवधि के बॉन्ड से सावधानी, छोटी अवधि में अवसर: UBS की निवेश सलाह
UBS ने 30 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के पीछे भागने के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा निवेश बढ़ाने की सलाह दी है। लंबी अवधि की यील्ड पर महंगाई की चिंता, बढ़ते राजकोषीय घाटे, भारी बॉन्ड सप्लाई और कमजोर मांग का दबाव है, जबकि ETF प्रवाह छोटी अवधि और अधिक तरल उत्पादों की ओर झुकाव दिखाता है।
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UBS ने 30 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के पीछे भागने के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा निवेश बढ़ाने की सलाह दी है।
लंबी अवधि की यील्ड पर महंगाई की चिंता, बढ़ते राजकोषीय घाटे, भारी बॉन्ड सप्लाई और कमजोर मांग का दबाव है, जबकि ETF प्रवाह छोटी अवधि और अधिक तरल उत्पादों की ओर झुकाव दिखाता है।
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UBS की 18 अगस्त की सलाह साफ है: वैश्विक लंबी अवधि वाले बॉन्ड की बिकवाली के बीच 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड में जल्दबाजी से निवेश करने के बजाय उच्च-गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा तरीके से निवेश बढ़ाया जाए। बैंक के मुताबिक, मौजूदा ऊंची यील्ड से आकर्षक आय मिल सकती है और छोटी अवधि के बॉन्ड लंबी अवधि की तुलना में राजकोषीय तथा महंगाई से जुड़े झटकों के प्रति कम संवेदनशील होते हैं।
2–5 साल के बॉन्ड में 100–230 बेसिस पॉइंट का आय कुशन
UBS का अनुमान है कि उसके पसंदीदा अमेरिकी ट्रेजरी सेगमेंट—यानी 2 से 5 साल की अवधि—में यील्ड को तत्कालीन स्तरों से लगभग 100 से 230 बेसिस पॉइंट बढ़ना होगा, तभी बॉन्ड कीमतों में गिरावट एक साल की आय को पूरी तरह खत्म कर पाएगी। यह पूरे 2–5 साल के सेगमेंट के लिए दी गई सीमा है, हर अवधि के लिए अलग-अलग सीमा नहीं।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"लंबी अवधि के बॉन्ड से सावधानी, छोटी अवधि में अवसर: UBS की निवेश सलाह" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
UBS ने 30 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के पीछे भागने के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा निवेश बढ़ाने की सलाह दी है।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
UBS ने 30 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के पीछे भागने के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड में चुनिंदा निवेश बढ़ाने की सलाह दी है। लंबी अवधि की यील्ड पर महंगाई की चिंता, बढ़ते राजकोषीय घाटे, भारी बॉन्ड सप्लाई और कमजोर मांग का दबाव है, जबकि ETF प्रवाह छोटी अवधि और अधिक तरल उत्पादों की ओर झुकाव दिखाता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि जोखिम खत्म हो गया है। यील्ड बढ़ने पर बॉन्ड की कीमतें गिर सकती हैं, लेकिन ऊंची शुरुआती यील्ड निवेशकों को मध्यम स्तर की बढ़ोतरी से होने वाले नुकसान को आय के जरिए कुछ हद तक संभालने का बेहतर आधार देती है।
30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड को लेकर UBS सतर्क क्यों है?
लंबी अवधि वाले बॉन्ड यील्ड और टर्म प्रीमियम में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। टर्म प्रीमियम वह अतिरिक्त रिटर्न है, जिसकी मांग निवेशक लंबे समय तक बॉन्ड रखने के जोखिम के बदले करते हैं। UBS के अनुसार 30-वर्षीय सेगमेंट पर कई दबाव एक साथ काम कर रहे हैं:
लगातार महंगाई की आशंका: अगर निवेशकों को लगता है कि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रह सकती है, तो वे लंबी अवधि के बॉन्ड रखने के लिए अधिक रिटर्न मांग सकते हैं।
राजकोषीय घाटे और नई बॉन्ड सप्लाई: बड़े उधारी कार्यक्रम वाली सरकारों को बाजार में अधिक कर्ज जारी करना पड़ता है, जिससे निवेशकों पर अतिरिक्त बॉन्ड सोखने का दबाव बढ़ता है।
कमजोर नीलामी मांग: लंबी अवधि की ट्रेजरी नीलामी को कमजोर प्रतिक्रिया मिलना इस बात का संकेत हो सकता है कि निवेशक अतिरिक्त अवधि-जोखिम लेने से पहले अधिक यील्ड चाहते हैं।
तरलता का जोखिम: बाजार में तनाव के समय लंबी अवधि वाले बॉन्ड को कुशलता से खरीदना-बेचना मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रह सकती है या और बढ़ सकती है, भले ही निवेशक कमजोर आर्थिक वृद्धि या केंद्रीय बैंक की कम सख्त नीति की उम्मीद करने लगें।
वैश्विक बॉन्ड बिकवाली कितनी दूर तक पहुंची?
18 अगस्त को अमेरिकी 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.31% से ऊपर चली गई, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। 30-वर्षीय जर्मन बंड यील्ड 3.75% तक पहुंची, जो 2011 के बाद सबसे अधिक थी। वहीं 30-वर्षीय ब्रिटिश गिल्ट यील्ड करीब 5.85% रही—यह मई के शिखर के आसपास और 1998 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।
UBS ने इस दबाव को लगातार महंगाई की चिंता, बिगड़ती राजकोषीय स्थिति और भविष्य में बढ़ती सरकारी उधारी से जोड़ा है। लंबी अवधि वाले कॉरपोरेट बॉन्ड की भारी बिक्री ने भी निवेशकों के सामने मौजूद अवधि-जोखिम बढ़ाया। इसमें टेक्नोलॉजी कंपनियों की AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च से जुड़ी उधारी भी शामिल है।
लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रहने पर भी छोटी अवधि के बॉन्ड क्यों चल सकते हैं?
छोटी अवधि वाले बॉन्ड आम तौर पर केंद्रीय बैंक की नीतिगत दरों की उम्मीदों से अधिक सीधे प्रभावित होते हैं। इसके विपरीत, लंबी अवधि वाले बॉन्ड पर टर्म प्रीमियम के साथ-साथ महंगाई, राजकोषीय नीति और बॉन्ड सप्लाई को लेकर बदलते विचारों का असर अधिक होता है।
UBS को उम्मीद है कि महंगाई में नरमी जारी रहेगी और बाजार में केंद्रीय बैंकों की ओर से आगे और सख्ती की जो कीमत तय की जा रही है, वह जरूरत से ज्यादा आक्रामक है। यदि निवेशक भविष्य में कम दर बढ़ोतरी या दरों में कटौती की संभावना को शामिल करने लगते हैं, तो 2 से 5 साल की यील्ड गिर सकती है और बॉन्ड की कीमतें बढ़ सकती हैं—भले ही 30-वर्षीय यील्ड ऊंची रहे या और बढ़ जाए।
यही UBS की सलाह का मुख्य बिंदु है: बॉन्ड बाजार की बिकवाली हर अवधि को एक जैसा प्रभावित नहीं करती। नीतिगत दरों की उम्मीदों में बदलाव से छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड को फायदा हो सकता है, जबकि लंबी अवधि वाले बॉन्ड पर राजकोषीय और सप्लाई से जुड़े दबाव बने रह सकते हैं।
ETF प्रवाह छोटी अवधि और तरलता की ओर संकेत देते हैं
उसी अवधि के यूरोपीय ETF आंकड़ों में फिक्स्ड-इनकम उत्पादों में €11.9 अरब का निवेश आया। इसमें €4.5 अरब सरकारी बॉन्ड उत्पादों में और €3.8 अरब अल्ट्राशॉर्ट उत्पादों में गया, जिनमें अधिकांश यूरो में थे। यह पैटर्न बताता है कि निवेशक बॉन्ड से आय चाहते हुए छोटी अवधि और आसानी से खरीदे-बेचे जा सकने वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, यह पूरी दुनिया में निवेशकों की स्थिति का संपूर्ण माप नहीं है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। ETF प्रवाह यह दिखा सकता है कि कुछ निवेशक पूंजी कहां लगा रहे हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि पूरे बाजार ने छोटी अवधि की रणनीति अपना ली है।
UBS की पहले की सलाह का ही विस्तार
18 अगस्त की यह सिफारिश UBS के पहले के रुख को बदलती नहीं, बल्कि मजबूत करती है। अप्रैल के House View में बैंक ने महंगाई और कर्ज से जुड़ी चिंताओं के बावजूद उच्च-गुणवत्ता वाले करीब 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड को आकर्षक यील्ड और पोर्टफोलियो विविधीकरण का स्रोत बताया था। मई के आउटलुक में भी वैश्विक निवेशकों के लिए छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड को प्राथमिकता दी गई थी। UBS ने यह भी कहा था कि छोटी अवधि के बॉन्ड को मनी-मार्केट फंड, बैंकों की बैलेंस शीट और अन्य तरलता पूलों के लिए सोखना आम तौर पर आसान होता है।
मुद्रा के स्तर पर UBS का रुख थोड़ा अलग है। बैंक खास तौर पर अमेरिकी डॉलर और ब्रिटिश पाउंड में छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड को प्राथमिकता देता है। वहीं, अलग-अलग क्षेत्रों में मौद्रिक नीति, आर्थिक चक्र, राजकोषीय स्थिति और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यूरोप के कुछ लंबी अवधि वाले बॉन्ड में भी मूल्य नजर आ सकता है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
UBS यह नहीं कह रहा कि 30-वर्षीय बॉन्ड का कोई मूल्य नहीं है या छोटी अवधि के बॉन्ड में नुकसान नहीं हो सकता। संदेश यह है कि मौजूदा जोखिम-रिटर्न संतुलन उच्च-गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के कर्ज में अधिक अनुकूल दिखता है:
अभी आय उपलब्ध है: ऊंची शुरुआती यील्ड से निवेशक मौजूदा स्तरों पर आय लॉक कर सकते हैं।
अवधि-जोखिम कम है: 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की तुलना में यील्ड बढ़ने पर कीमतों में संवेदनशीलता कम रहती है।
नीतिगत बदलाव से सहारा मिल सकता है: दरों में कटौती या कम बढ़ोतरी की उम्मीद 2 से 5 साल के बॉन्ड की कीमतों को समर्थन दे सकती है।
राजकोषीय और सप्लाई के झटके कम केंद्रित हैं: ये जोखिम लंबी अवधि की तुलना में फ्रंट एंड पर अपेक्षाकृत कम तीव्र हो सकते हैं।
तरलता की प्राथमिकता दिख रही है: ETF प्रवाह, खासकर अल्ट्राशॉर्ट उत्पादों में निवेश, इसका संकेत देता है।
इसलिए अलग-अलग अवधि के बॉन्ड की तुलना करने वाले निवेशकों के लिए UBS की 18 अगस्त की राय का सार यह है कि सरकारी बॉन्ड बाजार के सबसे अधिक अवधि-संवेदनशील हिस्से में बड़ा दांव लगाने से पहले उच्च-गुणवत्ता वाली छोटी और मध्यम अवधि की आय को पोर्टफोलियो में जगह दी जाए।
इसका मतलब यह नहीं है कि जोखिम खत्म हो गया है। यील्ड बढ़ने पर बॉन्ड की कीमतें गिर सकती हैं, लेकिन ऊंची शुरुआती यील्ड निवेशकों को मध्यम स्तर की बढ़ोतरी से होने वाले नुकसान को आय के जरिए कुछ हद तक संभालने का बेहतर आधार देती है।
30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड को लेकर UBS सतर्क क्यों है?
लंबी अवधि वाले बॉन्ड यील्ड और टर्म प्रीमियम में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। टर्म प्रीमियम वह अतिरिक्त रिटर्न है, जिसकी मांग निवेशक लंबे समय तक बॉन्ड रखने के जोखिम के बदले करते हैं। UBS के अनुसार 30-वर्षीय सेगमेंट पर कई दबाव एक साथ काम कर रहे हैं:
लगातार महंगाई की आशंका: अगर निवेशकों को लगता है कि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रह सकती है, तो वे लंबी अवधि के बॉन्ड रखने के लिए अधिक रिटर्न मांग सकते हैं।
राजकोषीय घाटे और नई बॉन्ड सप्लाई: बड़े उधारी कार्यक्रम वाली सरकारों को बाजार में अधिक कर्ज जारी करना पड़ता है, जिससे निवेशकों पर अतिरिक्त बॉन्ड सोखने का दबाव बढ़ता है।
कमजोर नीलामी मांग: लंबी अवधि की ट्रेजरी नीलामी को कमजोर प्रतिक्रिया मिलना इस बात का संकेत हो सकता है कि निवेशक अतिरिक्त अवधि-जोखिम लेने से पहले अधिक यील्ड चाहते हैं।
तरलता का जोखिम: बाजार में तनाव के समय लंबी अवधि वाले बॉन्ड को कुशलता से खरीदना-बेचना मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रह सकती है या और बढ़ सकती है, भले ही निवेशक कमजोर आर्थिक वृद्धि या केंद्रीय बैंक की कम सख्त नीति की उम्मीद करने लगें।
वैश्विक बॉन्ड बिकवाली कितनी दूर तक पहुंची?
18 अगस्त को अमेरिकी 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.31% से ऊपर चली गई, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। 30-वर्षीय जर्मन बंड यील्ड 3.75% तक पहुंची, जो 2011 के बाद सबसे अधिक थी। वहीं 30-वर्षीय ब्रिटिश गिल्ट यील्ड करीब 5.85% रही—यह मई के शिखर के आसपास और 1998 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।
UBS ने इस दबाव को लगातार महंगाई की चिंता, बिगड़ती राजकोषीय स्थिति और भविष्य में बढ़ती सरकारी उधारी से जोड़ा है। लंबी अवधि वाले कॉरपोरेट बॉन्ड की भारी बिक्री ने भी निवेशकों के सामने मौजूद अवधि-जोखिम बढ़ाया। इसमें टेक्नोलॉजी कंपनियों की AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च से जुड़ी उधारी भी शामिल है।
लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रहने पर भी छोटी अवधि के बॉन्ड क्यों चल सकते हैं?
छोटी अवधि वाले बॉन्ड आम तौर पर केंद्रीय बैंक की नीतिगत दरों की उम्मीदों से अधिक सीधे प्रभावित होते हैं। इसके विपरीत, लंबी अवधि वाले बॉन्ड पर टर्म प्रीमियम के साथ-साथ महंगाई, राजकोषीय नीति और बॉन्ड सप्लाई को लेकर बदलते विचारों का असर अधिक होता है।
UBS को उम्मीद है कि महंगाई में नरमी जारी रहेगी और बाजार में केंद्रीय बैंकों की ओर से आगे और सख्ती की जो कीमत तय की जा रही है, वह जरूरत से ज्यादा आक्रामक है। यदि निवेशक भविष्य में कम दर बढ़ोतरी या दरों में कटौती की संभावना को शामिल करने लगते हैं, तो 2 से 5 साल की यील्ड गिर सकती है और बॉन्ड की कीमतें बढ़ सकती हैं—भले ही 30-वर्षीय यील्ड ऊंची रहे या और बढ़ जाए।
यही UBS की सलाह का मुख्य बिंदु है: बॉन्ड बाजार की बिकवाली हर अवधि को एक जैसा प्रभावित नहीं करती। नीतिगत दरों की उम्मीदों में बदलाव से छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड को फायदा हो सकता है, जबकि लंबी अवधि वाले बॉन्ड पर राजकोषीय और सप्लाई से जुड़े दबाव बने रह सकते हैं।
ETF प्रवाह छोटी अवधि और तरलता की ओर संकेत देते हैं
उसी अवधि के यूरोपीय ETF आंकड़ों में फिक्स्ड-इनकम उत्पादों में €11.9 अरब का निवेश आया। इसमें €4.5 अरब सरकारी बॉन्ड उत्पादों में और €3.8 अरब अल्ट्राशॉर्ट उत्पादों में गया, जिनमें अधिकांश यूरो में थे। यह पैटर्न बताता है कि निवेशक बॉन्ड से आय चाहते हुए छोटी अवधि और आसानी से खरीदे-बेचे जा सकने वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, यह पूरी दुनिया में निवेशकों की स्थिति का संपूर्ण माप नहीं है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। ETF प्रवाह यह दिखा सकता है कि कुछ निवेशक पूंजी कहां लगा रहे हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि पूरे बाजार ने छोटी अवधि की रणनीति अपना ली है।
UBS की पहले की सलाह का ही विस्तार
18 अगस्त की यह सिफारिश UBS के पहले के रुख को बदलती नहीं, बल्कि मजबूत करती है। अप्रैल के House View में बैंक ने महंगाई और कर्ज से जुड़ी चिंताओं के बावजूद उच्च-गुणवत्ता वाले करीब 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड को आकर्षक यील्ड और पोर्टफोलियो विविधीकरण का स्रोत बताया था। मई के आउटलुक में भी वैश्विक निवेशकों के लिए छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड को प्राथमिकता दी गई थी। UBS ने यह भी कहा था कि छोटी अवधि के बॉन्ड को मनी-मार्केट फंड, बैंकों की बैलेंस शीट और अन्य तरलता पूलों के लिए सोखना आम तौर पर आसान होता है।
मुद्रा के स्तर पर UBS का रुख थोड़ा अलग है। बैंक खास तौर पर अमेरिकी डॉलर और ब्रिटिश पाउंड में छोटी और मध्यम अवधि के बॉन्ड को प्राथमिकता देता है। वहीं, अलग-अलग क्षेत्रों में मौद्रिक नीति, आर्थिक चक्र, राजकोषीय स्थिति और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यूरोप के कुछ लंबी अवधि वाले बॉन्ड में भी मूल्य नजर आ सकता है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
UBS यह नहीं कह रहा कि 30-वर्षीय बॉन्ड का कोई मूल्य नहीं है या छोटी अवधि के बॉन्ड में नुकसान नहीं हो सकता। संदेश यह है कि मौजूदा जोखिम-रिटर्न संतुलन उच्च-गुणवत्ता वाले छोटी और मध्यम अवधि के कर्ज में अधिक अनुकूल दिखता है:
अभी आय उपलब्ध है: ऊंची शुरुआती यील्ड से निवेशक मौजूदा स्तरों पर आय लॉक कर सकते हैं।
अवधि-जोखिम कम है: 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की तुलना में यील्ड बढ़ने पर कीमतों में संवेदनशीलता कम रहती है।
नीतिगत बदलाव से सहारा मिल सकता है: दरों में कटौती या कम बढ़ोतरी की उम्मीद 2 से 5 साल के बॉन्ड की कीमतों को समर्थन दे सकती है।
राजकोषीय और सप्लाई के झटके कम केंद्रित हैं: ये जोखिम लंबी अवधि की तुलना में फ्रंट एंड पर अपेक्षाकृत कम तीव्र हो सकते हैं।
तरलता की प्राथमिकता दिख रही है: ETF प्रवाह, खासकर अल्ट्राशॉर्ट उत्पादों में निवेश, इसका संकेत देता है।
इसलिए अलग-अलग अवधि के बॉन्ड की तुलना करने वाले निवेशकों के लिए UBS की 18 अगस्त की राय का सार यह है कि सरकारी बॉन्ड बाजार के सबसे अधिक अवधि-संवेदनशील हिस्से में बड़ा दांव लगाने से पहले उच्च-गुणवत्ता वाली छोटी और मध्यम अवधि की आय को पोर्टफोलियो में जगह दी जाए।