फिर भी कई कंपनियां सिर्फ लोकप्रिय या बड़े मॉडल चुन लेती हैं—बिना यह समझे कि उनका ऊर्जा प्रभाव कितना अधिक है।
ज्यादातर कंपनियां खुद AI मॉडल ट्रेन नहीं करतीं और न ही अपने डेटा सेंटर बनाती हैं। वे क्लाउड प्रदाताओं और AI विक्रेताओं पर निर्भर रहती हैं।
लेकिन SAIG का तर्क है कि पैसा वहीं से आता है—एंटरप्राइज़ ग्राहकों से।
जब बड़ी कंपनियां AI सेवाएं खरीदती हैं, तो वही मांग आगे जाकर तय करती है कि टेक कंपनियां किस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएंगी। यानी:
SAIG के अनुसार, कंपनियां अपने सामान्य खरीद प्रक्रियाओं में बदलाव करके AI उद्योग पर असर डाल सकती हैं।
जब कंपनियां AI वेंडर चुनने के लिए Request for Proposal (RFP) जारी करती हैं, तो वे उनसे ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय रिपोर्टिंग से जुड़े डेटा मांग सकती हैं।
इससे खरीदारों को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन‑सा विक्रेता वास्तव में टिकाऊ तकनीक पर काम कर रहा है ।
यदि कंपनियां उन AI सेवाओं को चुनें जिनकी ऊर्जा खपत कम है या जिनकी रिपोर्टिंग पारदर्शी है, तो बाजार में प्रतिस्पर्धा का नया पैमाना बन सकता है।
तब कंपनियां सिर्फ प्रदर्शन और कीमत पर नहीं, बल्कि ऊर्जा दक्षता पर भी प्रतिस्पर्धा करेंगी।
एंटरप्राइज़ अनुबंधों में ऐसे क्लॉज जोड़े जा सकते हैं जिनमें वेंडरों को यह बताना पड़े कि:
इस तरह की शर्तें कंपनियों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में अधिक पारदर्शी बनने के लिए प्रेरित कर सकती हैं ।
Sustainable AI Group खुद को सिर्फ रिसर्च संस्था नहीं बल्कि रणनीतिक सलाहकार के रूप में भी पेश करता है।
संस्था AI के पर्यावरणीय प्रभाव पर सार्वजनिक शोध प्रकाशित करेगी—जिसमें मॉडल ट्रेनिंग, इनफेरेंस और डेटा सेंटर संचालन से जुड़ी ऊर्जा खपत शामिल होगी ।
SAIG कंपनियों को उनकी AI रणनीति में सस्टेनेबिलिटी जोड़ने में मदद करेगा, जैसे:
यह कंपनियों को यह भी समझने में मदद करेगा कि उनके संगठन में AI कहां‑कहां इस्तेमाल हो रहा है और उसका पर्यावरणीय आधार स्तर क्या है ।
SAIG जिन प्रमुख पहलों से जुड़ा है उनमें AI Energy Score शामिल है। यह एक बेंचमार्किंग प्रणाली है जो अलग‑अलग AI मॉडलों की ऊर्जा खपत को मापकर सार्वजनिक रेटिंग देती है ।
इस प्रणाली में:
SAIG का मानना है कि अभी निर्णय लेने का समय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
यदि डेटा सेंटर, बिजली अनुबंध और हार्डवेयर सप्लाई चेन एक बार स्थापित हो गए, तो बाद में उन्हें पर्यावरण के अनुकूल बनाना बहुत कठिन हो जाएगा।
Sustainable AI Group का मूल विचार यह है कि बाजार की मांग ही उद्योग को बदल सकती है।
अगर बड़ी कंपनियां AI खरीदते समय ऊर्जा दक्षता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देंगी, तो टेक कंपनियां भी उसी दिशा में प्रतिस्पर्धा करने लगेंगी—जैसे आज वे प्रदर्शन और कीमत पर करती हैं।
आखिरकार सवाल यही है: क्या एंटरप्राइज़ कंपनियां अपने इस प्रभाव का इस्तेमाल करेंगी या नहीं।
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