Sustainable AI Group (SAIG) की शुरुआत 13 मई 2026 को साशा लुचियोनी और बोरिस गामाज़ायचिकोव ने की, जिसका उद्देश्य कंपनियों को AI के पर्यावरणीय प्रभाव को मापने और कम करने में मदद करना है [5]। संस्थापकों का तर्क है कि एंटरप्राइज़ ग्राहक RFP, वेंडर चयन और कॉन्ट्रैक्ट शर्तों के जरिए AI कंपनियों से ऊर्जा उपयोग और डेटा‑सेंटर...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is the Sustainable AI Group, who founded it, what problem is it trying to solve around AI’s environmental impact, how do the founders a. Article summary: Sustainable AI Group is a new AI sustainability research and advisory firm launched on May 13, 2026 to help enterprises measure, compare, and reduce the environmental impacts of AI, especially as AI data center and infra. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# Sustainable AI: How your organization can reduce environmental impact. As an outcome of the summit, a new international **Coalition for Environmentally Sustainable AI** was creat" source context "Sustainable Ai in Action: How Your Organization Can Reduce Environmental Impact | EY - US" Reference image 2: visual
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तेजी से फैल रही है—लेकिन इसके साथ‑साथ उसे चलाने वाला विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। बड़े डेटा सेंटर, विशेष चिप्स, कूलिंग सिस्टम और बिजली की नई क्षमता—ये सब AI वर्कलोड के बढ़ते दबाव को संभालने के लिए बन रहे हैं। इसके साथ एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है: AI की असली पर्यावरणीय कीमत क्या है?
इसी सवाल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए Sustainable AI Group (SAIG) नाम की एक नई रिसर्च और एडवाइजरी फर्म लॉन्च की गई है। इसका दावा है कि AI के पर्यावरणीय प्रभाव को बदलने की सबसे बड़ी ताकत डेटा सेंटर में नहीं, बल्कि AI खरीदने वाली कंपनियों के हाथ में है।
Sustainable AI Group (SAIG) की स्थापना 13 मई 2026 को की गई। इसका उद्देश्य एंटरप्राइज़ कंपनियों को AI सिस्टम के ऊर्जा उपयोग, उत्सर्जन और संसाधन प्रभाव को समझने और कम करने में मदद करना है ।
इस संगठन की स्थापना दो प्रमुख AI‑सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों ने की:
दोनों का कहना है कि आज अधिकांश कंपनियां AI का इस्तेमाल तो कर रही हैं, लेकिन उन्हें यह पता ही नहीं होता कि उस AI की ऊर्जा खपत या पर्यावरणीय असर कितना है ।
AI सिस्टम चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग शक्ति चाहिए। जैसे‑जैसे AI मॉडल बड़े होते जा रहे हैं, वैसे‑वैसे उनकी ऊर्जा मांग भी बढ़ रही है। लेकिन समस्या यह है कि अक्सर कंपनियों को इन चीजों का स्पष्ट डेटा नहीं मिलता:
इसके अलावा, अलग‑अलग AI मॉडल का पर्यावरणीय प्रभाव भी बहुत अलग हो सकता है। कई बार छोटे या फाइन‑ट्यून किए गए मॉडल वही काम बहुत कम कंप्यूटिंग शक्ति में कर सकते हैं, जो बड़े "फ्रंटियर" मॉडल करते हैं ।
फिर भी कई कंपनियां सिर्फ लोकप्रिय या बड़े मॉडल चुन लेती हैं—बिना यह समझे कि उनका ऊर्जा प्रभाव कितना अधिक है।
ज्यादातर कंपनियां खुद AI मॉडल ट्रेन नहीं करतीं और न ही अपने डेटा सेंटर बनाती हैं। वे क्लाउड प्रदाताओं और AI विक्रेताओं पर निर्भर रहती हैं।
लेकिन SAIG का तर्क है कि पैसा वहीं से आता है—एंटरप्राइज़ ग्राहकों से।
जब बड़ी कंपनियां AI सेवाएं खरीदती हैं, तो वही मांग आगे जाकर तय करती है कि टेक कंपनियां किस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएंगी। यानी:
ये सब मिलकर पूरे AI सप्लाई चेन को प्रभावित करते हैं ।
SAIG के अनुसार, कंपनियां अपने सामान्य खरीद प्रक्रियाओं में बदलाव करके AI उद्योग पर असर डाल सकती हैं।
जब कंपनियां AI वेंडर चुनने के लिए Request for Proposal (RFP) जारी करती हैं, तो वे उनसे ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय रिपोर्टिंग से जुड़े डेटा मांग सकती हैं।
इससे खरीदारों को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन‑सा विक्रेता वास्तव में टिकाऊ तकनीक पर काम कर रहा है ।
यदि कंपनियां उन AI सेवाओं को चुनें जिनकी ऊर्जा खपत कम है या जिनकी रिपोर्टिंग पारदर्शी है, तो बाजार में प्रतिस्पर्धा का नया पैमाना बन सकता है।
तब कंपनियां सिर्फ प्रदर्शन और कीमत पर नहीं, बल्कि ऊर्जा दक्षता पर भी प्रतिस्पर्धा करेंगी।
एंटरप्राइज़ अनुबंधों में ऐसे क्लॉज जोड़े जा सकते हैं जिनमें वेंडरों को यह बताना पड़े कि:
इस तरह की शर्तें कंपनियों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में अधिक पारदर्शी बनने के लिए प्रेरित कर सकती हैं ।
Sustainable AI Group खुद को सिर्फ रिसर्च संस्था नहीं बल्कि रणनीतिक सलाहकार के रूप में भी पेश करता है।
संस्था AI के पर्यावरणीय प्रभाव पर सार्वजनिक शोध प्रकाशित करेगी—जिसमें मॉडल ट्रेनिंग, इनफेरेंस और डेटा सेंटर संचालन से जुड़ी ऊर्जा खपत शामिल होगी ।
SAIG कंपनियों को उनकी AI रणनीति में सस्टेनेबिलिटी जोड़ने में मदद करेगा, जैसे:
यह कंपनियों को यह भी समझने में मदद करेगा कि उनके संगठन में AI कहां‑कहां इस्तेमाल हो रहा है और उसका पर्यावरणीय आधार स्तर क्या है ।
SAIG जिन प्रमुख पहलों से जुड़ा है उनमें AI Energy Score शामिल है। यह एक बेंचमार्किंग प्रणाली है जो अलग‑अलग AI मॉडलों की ऊर्जा खपत को मापकर सार्वजनिक रेटिंग देती है ।
इस प्रणाली में:
जैसे फीचर शामिल हैं। पहले चरण में 166 से अधिक लोकप्रिय AI मॉडलों का मूल्यांकन किया जा चुका है ।
SAIG का मानना है कि अभी निर्णय लेने का समय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
अनुमान है कि इस दशक के अंत तक AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है ।
यदि डेटा सेंटर, बिजली अनुबंध और हार्डवेयर सप्लाई चेन एक बार स्थापित हो गए, तो बाद में उन्हें पर्यावरण के अनुकूल बनाना बहुत कठिन हो जाएगा।
Sustainable AI Group का मूल विचार यह है कि बाजार की मांग ही उद्योग को बदल सकती है।
अगर बड़ी कंपनियां AI खरीदते समय ऊर्जा दक्षता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देंगी, तो टेक कंपनियां भी उसी दिशा में प्रतिस्पर्धा करने लगेंगी—जैसे आज वे प्रदर्शन और कीमत पर करती हैं।
आखिरकार सवाल यही है: क्या एंटरप्राइज़ कंपनियां अपने इस प्रभाव का इस्तेमाल करेंगी या नहीं।
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Sustainable AI Group (SAIG) की शुरुआत 13 मई 2026 को साशा लुचियोनी और बोरिस गामाज़ायचिकोव ने की, जिसका उद्देश्य कंपनियों को AI के पर्यावरणीय प्रभाव को मापने और कम करने में मदद करना है [5]।
Sustainable AI Group (SAIG) की शुरुआत 13 मई 2026 को साशा लुचियोनी और बोरिस गामाज़ायचिकोव ने की, जिसका उद्देश्य कंपनियों को AI के पर्यावरणीय प्रभाव को मापने और कम करने में मदद करना है [5]। संस्थापकों का तर्क है कि एंटरप्राइज़ ग्राहक RFP, वेंडर चयन और कॉन्ट्रैक्ट शर्तों के जरिए AI कंपनियों से ऊर्जा उपयोग और डेटा‑सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक पारदर्शिता की मांग कर सकते हैं [1][2]।
SAIG ओपन रिसर्च, रणनीतिक सलाह, मापन फ्रेमवर्क और AI Energy Score जैसे टूल प्रदान करेगा ताकि अलग‑अलग AI मॉडलों की ऊर्जा दक्षता की तुलना की जा सके [5][11]।