यह परियोजना केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत में केवल अंतिम उत्पाद असेंबली नहीं बल्कि पूरी वैल्यू चेन का निर्माण विकसित करना है।
लावा का कहना है कि नई यूनिट के जरिए कंपनी घरेलू वैल्यू एडिशन (Domestic Value Addition) बढ़ा सकेगी—यानी मोबाइल डिवाइस के अधिक हिस्से भारत में ही बनाए जाएंगे या स्थानीय स्तर पर स्रोत किए जाएंगे।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक घरेलू वैल्यू एडिशन से कई लाभ मिलते हैं:
नोएडा की यह यूनिट लावा की व्यापक विस्तार योजना का एक हिस्सा है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अगले पाँच वर्षों में लगभग ₹1,100 करोड़ निवेश करके भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करेगी।
इस निवेश के तहत कंपनी निम्न क्षेत्रों में निर्माण क्षमता विकसित करने की योजना बना रही है:
अगर यह योजना सफल होती है तो स्मार्टफोन निर्माण की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ भारत में ही पूरी की जा सकेंगी।
नीतिनिर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनने के लिए असेंबली से आगे बढ़कर कंपोनेंट निर्माण में मजबूत होना होगा। लावा की नई यूनिट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यदि अन्य कंपनियाँ भी इसी तरह स्थानीय कंपोनेंट निर्माण में निवेश करती हैं, तो भारत का मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम अधिक मजबूत हो सकता है—जहाँ सिर्फ फोन असेंबल नहीं किए जाएंगे बल्कि उनके प्रमुख हिस्से भी देश में ही बनाए जाएंगे।
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