इसका मतलब है कि अलग‑अलग देशों और फसल प्रणालियों में किसान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग तरीकों से खेती कर सकते हैं, लेकिन उनके पर्यावरणीय परिणाम एक ही मानक के तहत मापे जा सकते हैं।
इस कार्यक्रम का ढांचा चार वैश्विक पर्यावरणीय क्षेत्रों पर केंद्रित है:
इन सभी क्षेत्रों के लिए साझा संकेतक तय किए गए हैं ताकि कंपनियाँ अपनी सप्लाई‑चेन में पर्यावरणीय प्रगति को ट्रैक कर सकें और अलग‑अलग क्षेत्रों में तुलना कर सकें।
इस कार्यक्रम में एक चार‑स्टेप फ्रेमवर्क शामिल है जिसका उद्देश्य कंपनियों को अपनी कृषि सप्लाई‑चेन को धीरे‑धीरे रेजेनेरेटिव खेती की ओर ले जाने में मदद करना है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह फ्रेमवर्क:
हालाँकि सार्वजनिक स्रोतों में इन चारों चरणों के सटीक नाम या विस्तृत कार्यप्रणाली पूरी तरह उपलब्ध नहीं है, इसलिए प्रत्येक चरण का विस्तृत क्रम स्पष्ट रूप से वर्णित नहीं किया जा सकता।
फिर भी यह स्पष्ट है कि फ्रेमवर्क तीन मुख्य सिद्धांतों पर जोर देता है:
वैश्विक स्तर पर कार्यक्रम लागू करने से पहले SAI Platform ने इसे वास्तविक सप्लाई‑चेन में परीक्षण के लिए एक बड़े पायलट चरण से गुजारा।
मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार रहे:
पायलट परिणामों से यह सामने आया कि एक साझा परिणाम‑आधारित फ्रेमवर्क विभिन्न कृषि प्रणालियों में भी लागू किया जा सकता है, जबकि स्थानीय स्तर पर अनुकूलन की गुंजाइश बनी रहती है।
2026 में इस पहल को नई गति मिली जब 40 वैश्विक खाद्य और कृषि कंपनियों ने संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
कार्यक्रम का सार्वजनिक लॉन्च 22–24 जून 2026 को कनाडा के सस्काटून (Saskatoon) में आयोजित SAI Platform Annual Event के दौरान होने वाला है।
यह लॉन्च पायलट परीक्षणों से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर उद्योग‑स्तरीय कार्यान्वयन की शुरुआत का संकेत देता है।
पिछले कुछ वर्षों में रेजेनेरेटिव कृषि पर वैश्विक चर्चा तेज हुई है, लेकिन एक बड़ी समस्या रही है—परिभाषाओं और मापदंडों की असंगति।
यदि साझा मानक न हों तो:
Regenerating Together Programme इस समस्या को दूर करने के लिए उद्योग‑व्यापी परिभाषाएँ, संकेतक और रिपोर्टिंग पद्धति प्रदान करता है।
यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि वैश्विक खाद्य प्रणाली कई परस्पर जुड़े संकटों का सामना कर रही है, जैसे:
SAI Platform और उसके साझेदारों का मानना है कि इन समस्याओं का समाधान पूरी सप्लाई‑चेन के सामूहिक प्रयास से ही संभव है, न कि अलग‑अलग कंपनियों की अलग‑थलग पहलों से।
इस कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य है कि कंपनियाँ दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता को सुरक्षित रखते हुए पर्यावरणीय प्रभाव कम करें। साझा संकेतकों और मापनीय परिणामों के जरिए उद्योग को उम्मीद है कि रेजेनेरेटिव खेती तेजी से अपनाई जा सकेगी—even उन बाजारों में भी जहाँ अभी उपभोक्ता मांग स्पष्ट नहीं है।
यदि यह मॉडल व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो यह वैश्विक खाद्य सप्लाई‑चेन में रेजेनेरेटिव कृषि के लिए एक सामान्य आधार बन सकता है—जहाँ कंपनियाँ, किसान और आपूर्तिकर्ता सभी मापने योग्य पर्यावरणीय परिणामों के लक्ष्य पर एक साथ काम करें।
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