Wayve का मॉडल end‑to‑end न्यूरल नेटवर्क पर आधारित है, जो मुख्य रूप से कैमरों से आने वाले वास्तविक दुनिया के डेटा से ड्राइविंग व्यवहार सीखता है।
कई पारंपरिक ऑटोनॉमस सिस्टम बहुत विस्तृत HD मैप्स और सीमित जियो‑फेंस्ड क्षेत्रों पर निर्भर होते हैं। इसके विपरीत Wayve का मॉडल सड़क की परिस्थितियों को सीधे सेंसर डेटा से समझकर निर्णय लेना सीखता है। कंपनी का दावा है कि इससे तकनीक नई जगहों पर जल्दी स्केल हो सकती है और भारी मैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत कम पड़ती है।
Wayve इस तरीके को अक्सर “embodied AI” कहता है—यानी वाहन वास्तविक ड्राइविंग डेटा से लगातार सीखते हुए अपने मॉडल को बेहतर बनाते रहते हैं।
Stellantis के अनुसार Wayve‑पावर्ड सिस्टम से लैस पहला नॉर्थ अमेरिकी वाहन 2028 में लॉन्च होने की उम्मीद है।
यह सिस्टम Stellantis की सॉफ्टवेयर‑डिफाइंड वाहन रणनीति का हिस्सा होगा, जिसमें वाहन के कई फीचर सॉफ्टवेयर और AI के माध्यम से विकसित किए जाते हैं।
यह साझेदारी Stellantis के पहले किए गए निवेश के बाद आई है। Wayve ने $1.2 बिलियन की Series D फंडिंग जुटाई थी, जिसमें Microsoft, NVIDIA, Uber, Mercedes‑Benz, Nissan और Stellantis जैसे बड़े निवेशकों ने भाग लिया।
इस फंडिंग राउंड में कंपनी का मूल्यांकन लगभग $8.6 बिलियन आंका गया था और इसका उद्देश्य Wayve के ऑटोनॉमस‑ड्राइविंग प्लेटफॉर्म को वैश्विक स्तर पर तेजी से तैनात करना था।
Stellantis के लिए यह निवेश एक उन्नत AI‑ड्राइविंग टेक्नोलॉजी तक पहुंच देता है, जबकि Wayve को बड़े पैमाने पर वाहन उत्पादन के माध्यम से अपनी तकनीक को स्केल करने का मौका मिलता है।
यह डील Stellantis की FaSTLAne 2030 रणनीति का हिस्सा है, जिसमें लगभग €60 बिलियन का निवेश सॉफ्टवेयर‑डिफाइंड वाहन, AI और उन्नत ड्राइवर‑सहायता प्रणालियों पर किया जा रहा है।
इस रणनीति के तहत:
Wayve केवल निजी कारों तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी ने Uber के साथ 2026 से रोबोटैक्सी ट्रायल शुरू करने की योजना भी घोषित की है।
अगर ये प्रयास सफल होते हैं, तो Wayve की तकनीक दो बड़े रास्तों से बाजार में आ सकती है—एक तरफ राइड‑हेलिंग और रोबोटैक्सी सेवाएं, और दूसरी तरफ बड़े ऑटोमेकरों की प्रोडक्शन कारें।
Stellantis और Wayve की साझेदारी ऑटोनॉमस ड्राइविंग के उस नए रुझान को दिखाती है जिसमें सिस्टम मैप‑केंद्रित मॉडल से हटकर AI‑केंद्रित मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो ऑटोमेटेड ड्राइविंग तकनीक अधिक शहरों और सड़कों पर आसानी से लागू हो सकती है।
हालांकि शुरुआती चरण में यह पूरी तरह ड्राइवरलेस नहीं होगा। यह Level 2++ सुपरवाइज़्ड सिस्टम होगा, इसलिए चालक को वाहन की निगरानी करते रहना होगा। समय के साथ तकनीक के और उन्नत स्तर आने की उम्मीद है।
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