नई नीति के मुख्य बिंदु:
यह €3 शुल्क एक सरल अंतरिम उपाय है, क्योंकि EU भविष्य में एक केंद्रीकृत कस्टम सिस्टम विकसित कर रहा है जिसमें EU Customs Authority और एक साझा EU Customs Data Hub शामिल होगा।
दुनिया की बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनियां—DHL, FedEx और UPS—इस सुधार के उद्देश्य से सहमत हैं, लेकिन उनका कहना है कि पूरी व्यवस्था अभी तकनीकी और कानूनी रूप से तैयार नहीं है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों ने EU के वित्त मंत्रियों को पत्र लिखकर कहा कि:
उनका कहना है कि यदि सभी नियम एक साथ लागू कर दिए गए तो:
कंपनियों ने चेतावनी दी कि अगर कस्टम क्लियरेंस में बड़ी देरी हुई तो कुछ मामलों में चिकित्सा उपकरण और अन्य जरूरी सामान की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।
EU का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सीधे उपभोक्ताओं को भेजे जाने वाले छोटे पार्सलों की संख्या तेजी से बढ़ी है, खासकर एशिया से।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Shein और Temu कम कीमत वाले उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक छोटे‑छोटे पार्सलों में भेजते हैं। अक्सर इनकी कीमत €150 से कम होती है, इसलिए ये पार्सल पहले ड्यूटी‑फ्री EU में प्रवेश कर जाते थे।
EU नीति‑निर्माताओं का तर्क है कि इस व्यवस्था से:
नई नीति के बाद हर आयातित पार्सल पर किसी न किसी रूप में कस्टम शुल्क लगेगा, चाहे उसकी कीमत कितनी भी कम क्यों न हो।
सुधार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि शिपमेंट के साथ अधिक विस्तृत उत्पाद जानकारी देनी होगी—जैसे उत्पाद की श्रेणी, पहचान संख्या और अन्य विवरण।
EU का उद्देश्य इससे निगरानी और अनुपालन बेहतर करना है, लेकिन लॉजिस्टिक्स कंपनियों का कहना है कि इससे:
क्योंकि एक्सप्रेस कैरियर्स रोज़ लाखों पार्सल संभालते हैं, इसलिए प्रक्रिया में थोड़ा सा भी अतिरिक्त समय पूरे नेटवर्क में देरी पैदा कर सकता है।
€3 का शुल्क स्थायी समाधान नहीं है। यह एक संक्रमणकालीन व्यवस्था है जब तक EU अपना नया डिजिटल कस्टम ढांचा तैयार नहीं कर लेता।
भविष्य की प्रणाली में शामिल होंगे:
यह ढांचा लगभग 2028 के आसपास चालू होने की उम्मीद है, जिसके बाद EU अधिक स्वचालित और विस्तृत कस्टम प्रोसेसिंग लागू कर सकता है।
€150 की ड्यूटी‑फ्री सीमा को खत्म करना वैश्विक ई‑कॉमर्स व्यापार में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 2026 से EU में आने वाले छोटे पार्सलों पर €3 कस्टम शुल्क लागू होगा, जिससे पहले ड्यूटी‑फ्री आने वाली लाखों शिपमेंट प्रभावित होंगी।
हालांकि लॉजिस्टिक्स उद्योग का कहना है कि सुधार जरूरी है, लेकिन इसे धीरे‑धीरे लागू करना बेहतर होगा, ताकि कस्टम सिस्टम पर दबाव न बढ़े और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन बाधित न हो।
Comments
0 comments