इन पाबंदियों का मुख्य कारण यह चिंता है कि चश्मे सामान्य eyewear जैसे दिखते हैं और इनके कैमरे से ग्राहकों या कर्मचारियों की बिना सहमति तस्वीरें और वीडियो बनाए जा सकते हैं।
Jeremy King के रेस्तरां: लंदन के मशहूर रेस्तरां संचालक Jeremy King, जिनके वेन्यू Simpsons in the Strand, Arlington और The Park शामिल हैं, ने कहा कि मेहमानों को रिकॉर्डिंग-सक्षम चश्मे पहनकर अंदर नहीं आना चाहिए। उन्होंने The Guardian से कहा, “मैं जानबूझकर अपने मेहमानों की निजता में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करूंगा—सिवाय उन आंखों के, जिनके साथ हम पैदा हुए हैं” ।
Wetherspoons: इस पब चेन ने UK के 800 से अधिक वेन्यू में Meta ग्लासेस से फिल्म बनाने पर रोक लगा दी है। कंपनी के अनुसार, बिना सहमति ग्राहकों या कर्मचारियों की रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं है और Meta की ग्लासेस “छिपकर निगरानी” को संभव बनाकर इस नियम और सामान्य समझ—दोनों का उल्लंघन करती दिखती हैं । ग्राहकों से कैमरा बंद करने को कहा जा सकता है ।
Soho House: निजी सदस्यों वाले इस क्लब ने अपने पहले से लागू filming ban में स्मार्ट ग्लासेस को भी स्पष्ट रूप से शामिल कर लिया है। ऐसे चश्मे पहनने वाले सदस्यों से उन्हें उतारने के लिए कहा जा सकता है ।
ATG Theatres: लंदन, ब्रिस्टल और एडिनबर्ग में थिएटर चलाने वाले ATG Theatres ने कहा है कि शो के दौरान दर्शकों से स्मार्ट ग्लासेस उतारने को कहा जाएगा, क्योंकि थिएटर के अंदर फिल्म बनाना पहले से प्रतिबंधित है ।
7 अगस्त 2026 को ऑस्ट्रेलिया की अटॉर्नी-जनरल Michelle Rowland ने Privacy Commissioner Carly Kind को पत्र लिखकर स्मार्ट ग्लासेस के गोपनीयता प्रभावों की तत्काल जांच का अनुरोध किया । Rowland ने चेतावनी दी कि महिलाओं और बच्चों को “अनुचित रिकॉर्डिंग”, उत्पीड़न, निगरानी या अन्य हानिकारक व्यवहार का असमान रूप से अधिक जोखिम हो सकता है ।
यह कदम उस समय उठाया गया जब Kmart Australia में A$89 कीमत वाले Anko camera glasses दुकानों और ऑनलाइन—दोनों जगह बिक गए। एक डिजिटल अधिकार विशेषज्ञ ने इस स्थिति को “privacy nightmare” कहा । इन चश्मों से 8-मेगापिक्सल तक की तस्वीरें और 1080p वीडियो रिकॉर्ड किए जा सकते हैं । कम कीमत ने यह चिंता बढ़ाई कि कैमरा-सक्षम eyewear अब सीमित संख्या में तकनीकी उत्साही लोगों तक नहीं रहेगा।
Carly Kind ने कहा है कि ऐसे उपकरण निजी और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के आपसी व्यवहार को “मौलिक रूप से बदल” सकते हैं। उनकी चिंता यह है कि लोग अपनी निजता से जुड़े फैसले तब नहीं ले पाएंगे, जब उन्हें पता ही न हो कि उन्हें किसी भी समय रिकॉर्ड किया जा सकता है ।
यह विवाद केवल सैद्धांतिक नहीं है। BBC की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पुरुषों ने Meta Ray-Bans पहनकर समुद्र तटों, दुकानों के बाहर और सड़कों पर महिलाओं को उनकी जानकारी या सहमति के बिना रिकॉर्ड किया। बाद में ये वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किए गए ।
Jurist के विश्लेषण में कहा गया कि इस प्रवृत्ति से image-based sexual abuse—यानी किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो का बिना सहमति यौन या अपमानजनक इस्तेमाल—का नया दौर बढ़ सकता है। इसमें महिलाएं और लड़कियां असमान रूप से प्रभावित हो सकती हैं ।
ACLU और अन्य नागरिक स्वतंत्रता संगठनों के गठबंधन ने Meta से facial-recognition features की तैनाती रोकने की अपील की। पत्र में ऐसी तकनीक को निजता और नागरिक स्वतंत्रता के लिए “गंभीर खतरा” बताया गया, खासकर घरेलू हिंसा से बचे लोगों, stalkers के निशाने पर रहने वाले लोगों और अन्य संवेदनशील समुदायों के लिए ।
Meta AI companion app में “NameTag” नाम से पहचाने गए facial-recognition सिस्टम का dormant code मिलने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। खोज के बाद Meta ने उस code को हटा दिया ।
Meta का मुख्य बचाव चश्मे के फ्रेम के आगे लगी छोटी सफेद LED है। कंपनी के अनुसार, तस्वीर या वीडियो रिकॉर्ड होने पर यह लाइट blink करती है, ताकि आसपास के लोगों को कैमरा सक्रिय होने का संकेत मिल सके ।
जुलाई 2026 में Meta ने एक अनिवार्य firmware update जारी किया। इसके बाद अगर सिस्टम को LED के ढके होने, उससे छेड़छाड़ किए जाने या उसके नष्ट होने का पता चलता है, तो कैमरा बंद हो जाता है । यह अपडेट दूसरी पीढ़ी की Ray-Ban Meta, Oakley Meta और Meta की अपनी लगभग $300 वाली ग्लासेस लाइन पर भी लागू किया गया ।
Meta ने Fortune से कहा कि उसने “शुरुआत से ही कैमरे में गोपनीयता को शामिल किया है” । लेकिन आलोचकों का तर्क है कि मजबूत consent safeguards आने से पहले ही बड़ी संख्या में डिवाइस बिक चुके थे। Meta और EssilorLuxottica ने 2025 में 70 लाख से अधिक स्मार्ट ग्लासेस बेचे, जबकि 2023 और 2024 में कुल बिक्री लगभग 20 लाख थी । कुछ रिपोर्टों के अनुसार, Meta की वैश्विक smart glasses market में हिस्सेदारी लगभग 80% रही ।
LED यह संकेत दे सकती है कि रिकॉर्डिंग चल रही है, लेकिन आलोचकों के अनुसार यह तभी प्रभावी होगी जब आसपास के लोगों को पता हो कि चश्मे में कैमरा है, वे indicator को पहचान पाएं और रिकॉर्डिंग के बाद अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें। सामान्य फोन की तरह कैमरा सामने उठाने का स्पष्ट सामाजिक संकेत यहां मौजूद नहीं होता।
यही वजह है कि चिंता केवल रिकॉर्ड किए जाने तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि फुटेज कहां जाती है, कौन उसे देख सकता है, उसे AI सुविधाओं के लिए कैसे इस्तेमाल किया जाता है और जिस व्यक्ति को रिकॉर्ड किया गया है, उसके पास उसे हटवाने या आपत्ति दर्ज कराने का क्या रास्ता है।
इस प्रतिक्रिया का असर अन्य जगहों पर भी दिख रहा है। कई देशों में स्मार्ट ग्लासेस के जरिए छिपकर रिकॉर्डिंग से जुड़ी शिकायतों की जांच की जा रही है । अमेरिकी राज्य Texas के अटॉर्नी-जनरल Ken Paxton ने मई 2026 में facial geometry capture और आसानी से छिपाए जा सकने वाले LED को लेकर राज्य-स्तरीय जांच शुरू की ।
Instagram ने भी Meta Ray-Bans से बनाए गए बिना सहमति वाले वीडियो पोस्ट करने वाले “pervert glasses” कंटेंट पर कार्रवाई शुरू की । इसके अलावा, Bartone et al. v. Meta Platforms, Inc. et al. नाम से एक class action lawsuit मार्च 2026 में दाखिल किया गया । यूरोपीय privacy regulators ने चेताया है कि यह तकनीक लोगों के आपसी व्यवहार को इसलिए बदल सकती है क्योंकि सामने वाले को यह जानने का भरोसेमंद तरीका नहीं रहता कि उसे रिकॉर्ड किया जा रहा है ।
इस backlash की खासियत इसकी रफ्तार है। Kmart की A$89 वाली कैमरा ग्लासेस बिकने के कुछ ही समय बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने जांच की मांग की। UK में पत्रकारिता रिपोर्टों के बाद hospitality और entertainment sector के कई वेन्यू ने अपने नियम बदल दिए। Meta का tamper-detection update भी तब आया जब लाखों यूनिट बाजार में पहुंच चुकी थीं और कुछ उपयोगकर्ताओं द्वारा LED से छेड़छाड़ की खबरें सामने आ चुकी थीं।
यहीं इस तकनीक का मूल तनाव दिखाई देता है: बिक्री और adoption तेज हैं, लेकिन consent के नियम और सुरक्षा उपाय उतनी तेजी से विकसित नहीं हुए। अब नियामकों के सामने चुनौती यह है कि वे मौजूदा privacy laws को ऐसे उपकरणों पर कैसे लागू करें, जो कैमरे को रोजमर्रा की वस्तु—चश्मे—में छिपा देते हैं।
Carly Kind का यह कहना कि स्मार्ट ग्लासेस “interpersonal interactions को मौलिक रूप से बदल” सकते हैं, इस बहस का सार है। आने वाली पीढ़ियों के उपकरण अगर और सस्ते, छोटे और कम दिखाई देने वाले हुए, तो सवाल केवल यह नहीं रहेगा कि स्मार्ट ग्लासेस खरीदना सुरक्षित है या नहीं—बल्कि यह होगा कि सार्वजनिक जीवन में बिना जानकारी और बिना सहमति रिकॉर्ड किए जाने से बचने का अधिकार कैसे सुनिश्चित किया जाए।