सरकार ने कहा कि कंपनी में गंभीर प्रबंधन कमियाँ थीं और यह खतरा था कि महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर तकनीक या उत्पादन क्षमता यूरोप से बाहर जा सकती है। इस कानून के तहत सरकार उन कंपनियों में हस्तक्षेप कर सकती है जो आवश्यक वस्तुएँ बनाती हैं और जिनकी आपूर्ति जोखिम में पड़ सकती है।
इस कदम के बाद Nexperia पर सरकारी निगरानी कड़ी हो गई और कई रणनीतिक फैसलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
सरकारी हस्तक्षेप के तुरंत बाद डच अदालत ने भी कदम उठाया।
7 अक्टूबर 2025 को एम्स्टर्डम कोर्ट ऑफ अपील की एंटरप्राइज चैंबर ने Nexperia के सीईओ और Wingtech के संस्थापक झांग शुएझेंग को पद से निलंबित कर दिया। अदालत ने कहा कि कंपनी के प्रबंधन को लेकर गंभीर संदेह के पर्याप्त कारण हैं।
इसके साथ ही Wingtech के शेयरधारक मतदान अधिकार एक स्वतंत्र ट्रस्टी को सौंप दिए गए, जिससे चीनी मूल कंपनी का प्रभाव काफी सीमित हो गया।
डच अधिकारियों का कहना था कि ये कदम यूरोप में महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर क्षमता की सुरक्षा और कंपनी के प्रशासन को स्थिर करने के लिए जरूरी थे।
इस कार्रवाई के बाद विवाद जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल गया।
4 अक्टूबर 2025 को चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने Nexperia की चीन स्थित इकाइयों द्वारा बनाए गए कुछ सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट्स के निर्यात पर पाबंदी लगा दी।
चूंकि Nexperia के चिप्स ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं, इस कदम से कार निर्माताओं के लिए सप्लाई की चिंता बढ़ गई।
कुछ हफ्तों बाद चीन ने नीति में आंशिक नरमी दिखाई और नागरिक उपयोग (civilian use) के लिए कुछ चिप्स के निर्यात को छूट दे दी, ताकि वैश्विक ऑटो उद्योग पर दबाव कम किया जा सके।
ग्वांगडोंग का मुकदमा Wingtech की कानूनी रणनीति का केवल एक हिस्सा है। कंपनी कई मोर्चों पर कार्रवाई कर रही है:
इन समानांतर कानूनी प्रक्रियाओं के कारण यह विवाद कई वर्षों तक चल सकता है।
Nexperia डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर और पावर चिप्स का प्रमुख निर्माता है—ये छोटे लेकिन जरूरी चिप्स कारों के इलेक्ट्रिकल सिस्टम और औद्योगिक उपकरणों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं।
इसलिए कंपनी के संचालन या निर्यात में बाधा आने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। पहले ही कुछ रिपोर्टों में कारों में इस्तेमाल होने वाले चिप्स की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता की बात कही गई है।
अगर यह टकराव और बढ़ता है तो संभावित जोखिमों में शामिल हैं:
कार उद्योग में किसी नए सप्लायर को अपनाने की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है, इसलिए ऐसी बाधाएँ उत्पादन पर महीनों या सालों तक असर डाल सकती हैं।
Nexperia विवाद यह दिखाता है कि आज के दौर में सेमीकंडक्टर कंपनियाँ सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि भू‑राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी हैं। सरकारें अब तकनीकी ज्ञान, उत्पादन क्षमता और सप्लाई चेन को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक शक्ति से जोड़कर देख रही हैं।
Wingtech और Nexperia के बीच चल रही यह लड़ाई—जो चीन, नीदरलैंड्स और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता मंचों तक फैली है—आने वाले वर्षों में यह तय कर सकती है कि विदेशी स्वामित्व वाली चिप कंपनियों को लेकर सरकारें कितनी दूर तक हस्तक्षेप कर सकती हैं।