यही फर्क सबसे अहम है: कोई युद्धविराम कागज़ पर जारी रह सकता है, लेकिन लगातार घटनाएं उसे व्यवहार में कमजोर कर सकती हैं। हालिया रिपोर्टों में होर्मुज़ के भीतर और आसपास संघर्षविराम शुरू होने के बाद की सबसे बड़ी झड़पों का जिक्र है, फिर भी अमेरिका और ईरान की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि समझौते की कोशिश जारी है ।
कूटनीतिक मोर्चे पर सबसे बड़ा सवाल ईरान के जवाब का है। 8 मई को अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि उन्हें उसी दिन तक ईरान से उस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया मिल सकती है, जिसका उद्देश्य खाड़ी में युद्ध को खत्म करना है—और यह सब ऐसे समय हो रहा था जब होर्मुज़ के आसपास लड़ाई फिर भड़क रही थी । 9 मई की रिपोर्ट में कहा गया कि तेहरान ने यह संकेत नहीं दिया था कि वह ट्रंप प्रशासन के ताज़ा प्रस्ताव को स्वीकार कर सकता है या नहीं
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इसका मतलब है कि शांति योजना अभी बीच रास्ते में अटकी हुई है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में प्रस्ताव को खारिज बताए जाने की बात नहीं है, लेकिन कोई पुष्ट समझौता भी सामने नहीं आया है। जब तक ईरान का जवाब लंबित है, हर नई समुद्री घटना दोनों पक्षों की राजनीतिक गणना को प्रभावित कर सकती है ।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य खाड़ी क्षेत्र का बेहद अहम समुद्री मार्ग है, इसलिए वहां की हर सैन्य हलचल सिर्फ स्थानीय घटना नहीं रहती। यह जगह अब युद्धविराम की असली परीक्षा बन गई है, क्योंकि अमेरिका और ईरान एक ही समुद्री क्षेत्र को बिल्कुल अलग नजरिए से देख रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य में किसी भी अमेरिकी दखल को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा, जबकि ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अवरुद्ध जलमार्ग से जहाज़ों को एस्कॉर्ट करना शुरू करेगा । अमेरिकी अधिकारी इसके उलट Project Freedom को युद्धविराम से अलग, अस्थायी और वाणिज्यिक जहाज़ों को मार्गदर्शन देने वाला अभियान बता रहे हैं
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ईरानी कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि कोई भी विदेशी सशस्त्र बल—खासकर अमेरिकी बल—अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास आते हैं या उसमें प्रवेश करते हैं, तो उन पर हमला किया जाएगा; उन्होंने वाणिज्यिक जहाज़ों और टैंकरों को भी बिना समन्वय के गुजरने से बचने को कहा । यह रुख सीधे अमेरिकी कोशिशों से टकराता है, जिनका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाज़ों को उस जलमार्ग से एस्कॉर्ट करना है
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यहीं से खतरनाक अस्पष्टता पैदा होती है। अमेरिका उसी कार्रवाई को व्यापारिक नौवहन की रक्षात्मक सुरक्षा बता सकता है, जबकि ईरान उसी को जलडमरूमध्य में दखल और इसलिए युद्धविराम का उल्लंघन कह सकता है ।
Institute for the Study of War यानी ISW ने 4 मई के आकलन में कहा कि ईरान, अमेरिका की वाणिज्यिक नौवहन-स्वतंत्रता सुरक्षित करने की कोशिशों के जवाब में होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना “नियंत्रण” दिखाने की कोशिश कर रहा है । ISW ने इस प्रयास को वाणिज्यिक जहाज़ों, संयुक्त अरब अमीरात के तेल ढांचे और ओमान की एक नागरिक इमारत से जुड़े हमलों या व्यवधानों से जोड़ा
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इसलिए होर्मुज़ सिर्फ नौसैनिक टकराव का बिंदु नहीं है। यह बातचीत की मेज पर दबाव बनाने का साधन भी है: जलमार्ग तक पहुंच पर असर वाणिज्यिक नौवहन और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करता है, इसलिए वहां की कोई भी चुनौती व्यापक शांति वार्ता का हिस्सा बन सकती है ।
हालिया रिपोर्टें ऐसे माहौल की तस्वीर दिखाती हैं जहां मिसाइलें, ड्रोन, छोटी नावें, टैंकर, वाणिज्यिक जहाज़, अमेरिकी विध्वंसक और खाड़ी देशों का ढांचा—सब टकराव के दायरे में आ गए हैं। 8 मई की एक रिपोर्ट के अनुसार जलडमरूमध्य के पास तीन अमेरिकी नौसेना विध्वंसकों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमले हुए, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि किसी अमेरिकी जहाज़ को नुकसान नहीं हुआ । एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार ईरानी बलों से गोलीबारी के बाद अमेरिकी बलों ने दो ईरानी तेल टैंकरों पर हमला कर उन्हें अक्षम किया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने एक और ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले की सूचना दी
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CBS ने यह भी रिपोर्ट किया कि ईरान ने Project Freedom के तहत संरक्षित जहाज़ों पर मिसाइलें दागीं और ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी बलों ने अभियान में बाधा डालने की कोशिश कर रही सात ईरानी छोटी नावों को नष्ट किया । खतरा धीरे-धीरे जमा हो रहा है: भले ही दोनों पक्ष व्यापक युद्ध न चाहने की बात करें, बार-बार की सामरिक झड़पें वह घटना पैदा कर सकती हैं जिसे कोई पक्ष युद्धविराम की नाकामी का सबूत मान ले
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पहला संकेत ईरान के जवाब से मिलेगा। अमेरिकी अधिकारी 8 मई के आसपास प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन बाद की रिपोर्टिंग में कहा गया कि तेहरान ने यह साफ नहीं किया कि वह प्रस्ताव स्वीकार कर सकता है या नहीं ।
दूसरा मुद्दा होर्मुज़ के नियमों का है। ईरान कहता है कि जलडमरूमध्य में अमेरिकी कार्रवाई युद्धविराम का उल्लंघन हो सकती है, जबकि अमेरिकी अधिकारी वाणिज्यिक जहाज़ों के एस्कॉर्ट को अलग और अस्थायी अभियान बताते हैं ।
तीसरा जोखिम यह है कि टकराव अब सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच सीमित नहीं दिख रहा। रिपोर्टों में वाणिज्यिक शिपिंग, ईरानी टैंकरों, अमेरिकी नौसैनिक जहाज़ों और UAE से जुड़ी घटनाएं शामिल हैं, जिससे यह आशंका बढ़ती है कि कोई और क्षेत्रीय पक्ष या नागरिक लक्ष्य भी तनाव के चक्र में खिंच सकता है ।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कागज़ पर अभी जिंदा है, लेकिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य यह तय कर रहा है कि वह व्यवहार में टिक पाएगा या नहीं। कूटनीति की खिड़की खुली है, क्योंकि वॉशिंगटन अब भी ईरान के जवाब का इंतज़ार कर रहा है और अमेरिकी अधिकारी कह रहे हैं कि संघर्षविराम लागू है । लेकिन समुद्री मोर्चा वह जगह बन चुका है जहां दोनों पक्ष अपनी लाल रेखाएं परख रहे हैं। यही वजह है कि होर्मुज़ वह बिंदु है जहां यह नाज़ुक युद्धविराम या तो मजबूत हो सकता है—या टूट सकता है
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