रिपोर्ट किए गए प्रमुख नतीजे इस प्रकार थे:
चिली की मिशेल बाचेलेट, इक्वाडोर की मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, सेनेगल के मैकी साल और युगांडा के ओलारा ओतुनु पहले दौर में शीर्ष तीन उम्मीदवारों से पीछे रहे। यह मतदान उम्मीदवारों की व्यवहारिक संभावना पर शुरुआती राय जानने का तरीका था, बाध्यकारी वोट या अंतिम रैंकिंग नहीं।
अब दौड़ में शामिल उम्मीदवार हैं:
पहले सुरक्षा परिषद स्ट्रॉ पोल में ठोस समर्थन के संकेत केवल ग्रिन्सपैन, रोड्रिग्स-बिर्केट और ग्रॉसी के पक्ष में मिले थे। इवोन बाक़ी की स्थिति का अनुमान उस मतदान से नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि उन्होंने इसके बाद दौड़ में प्रवेश किया।
टोंगा ने इस सप्ताह इक्वाडोर की राजनयिक और पूर्व सरकारी मंत्री इवोन बाक़ी को नामित किया। इसके साथ ही वह आठवीं उम्मीदवार और मैदान में दूसरी इक्वाडोरियन बन गईं। वह राजदूत के रूप में काम कर चुकी हैं, लेकिन 30 जुलाई के स्ट्रॉ पोल में उनका नाम शामिल नहीं था।
बाक़ी ने अपने अभियान में संघर्षों की रोकथाम और संयुक्त राष्ट्र के नवीनीकरण को प्रमुख मुद्दा बनाया है। अपने एजेंडे पर बात करते हुए उन्होंने लेबनान के गृहयुद्ध के दौरान के निजी अनुभव का भी उल्लेख किया।
बाक़ी को औपचारिक अमेरिकी समर्थन मिलने या डोनाल्ड ट्रंप और बिल क्लिंटन से उनके कथित संबंधों को अमेरिकी वोटिंग प्रतिबद्धता मानने की बातें उपलब्ध रिपोर्टिंग से साबित नहीं होतीं। दिए गए स्रोतों में अमेरिका का कोई आधिकारिक समर्थन या समर्थन का वादा दर्ज नहीं है। इसलिए इन दावों को पुष्ट तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
महासभा की अध्यक्ष अनालेना बैरबॉक चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाने पर जोर देती रही हैं। इसमें समय पर नामांकन, उम्मीदवारों के सार्वजनिक संवाद और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को उम्मीदवारों से सीधे विचार जानने के अधिक अवसर देने की मांग शामिल है। उनके कार्यालय ने सुरक्षा परिषद के निर्णय से पहले सभी उम्मीदवारों के लिए समान परिस्थितियों और व्यापक भागीदारी पर बल दिया है।
अमेरिका और रूस ने बैरबॉक की भूमिका को सुरक्षा परिषद की चयन प्रक्रिया में दखल या अधिकार-क्षेत्र से आगे बढ़ने के रूप में देखा है। रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन ने उन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया है, जबकि रूस ने भी उनके द्वारा निभाई जा रही भूमिका पर आपत्ति जताई है।
यह विवाद प्रक्रिया में मौजूद एक बुनियादी तनाव को दिखाता है। महासभा पारदर्शिता और भागीदारी की मांग कर सकती है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 97 महासचिव के लिए सिफारिश करने का चरण सुरक्षा परिषद को सौंपता है। स्ट्रॉ पोल स्वयं अनौपचारिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली होते हैं; वे कानूनी रूप से बाध्यकारी निर्णय नहीं हैं।
रूस ने संकेत दिया है कि आगे और उम्मीदवार सामने आ सकते हैं। उसने संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता और संघर्ष प्रबंधन के व्यापक संदर्भ में मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुतारेस के रिकॉर्ड की भी आलोचना की है। इससे मॉस्को के पास मौजूदा अग्रणी उम्मीदवारों के बीच जल्द सहमति बनने से रोकने की गुंजाइश बनी हुई है।
उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह साबित नहीं होता कि रूस ने किसी नामित उम्मीदवार के समर्थन या विरोध को औपचारिक रूप से तय कर लिया है। इसलिए नए नामों के लिए उसका खुलापन इस संकेत के रूप में समझना बेहतर है कि उम्मीदवारों की सूची और उनसे जुड़ी कूटनीतिक सौदेबाजी अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई है।
अनुच्छेद 97 के तहत महासभा, सुरक्षा परिषद की सिफारिश मिलने के बाद महासचिव की नियुक्ति करती है। व्यवहार में उम्मीदवार को सुरक्षा परिषद के 15 में से कम-से-कम नौ वोट हासिल करने होते हैं और पाँच स्थायी सदस्यों—चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका—में से किसी का वीटो नहीं झेलना होता है।
बाद के स्ट्रॉ पोल आम तौर पर स्थायी सदस्यों के रुख को निर्वाचित सदस्यों से अलग करके दिखाते हैं। इससे वीटो के जोखिम का पता अधिक स्पष्ट रूप से चलता है। कई बार यह जानकारी किसी उम्मीदवार के कुल “प्रोत्साहित” वोटों से भी ज्यादा निर्णायक होती है।
गुतारेस का दूसरा कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। इस बार लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र की मजबूत मौजूदगी आंशिक रूप से उस अनौपचारिक क्षेत्रीय-रोटेशन परंपरा से जुड़ी है, जिसके अनुसार इस क्षेत्र की बारी मानी जा रही है। हालांकि यह राजनीतिक परंपरा है, बाध्यकारी नियम नहीं; यह सुरक्षा परिषद की सिफारिश करने की शक्ति को बदल नहीं सकती।
यदि स्थायी सदस्य बंटे रहते हैं या नए उम्मीदवार सामने आते हैं, तो सितंबर और अक्टूबर में—या उसके बाद भी—और स्ट्रॉ पोल हो सकते हैं। दूसरे मतदान से पहले की रिपोर्टिंग में भी संकेत था कि फैसला तुरंत होने के बजाय अभी कुछ सप्ताह दूर है।
सबसे अहम संकेत यह होगा कि क्या ग्रिन्सपैन अपनी बढ़त कायम रखती हैं, क्या रोड्रिग्स-बिर्केट या ग्रॉसी अंतर कम करते हैं, और क्या कोई उम्मीदवार समझौते के विकल्प के रूप में पर्याप्त समर्थन जुटा पाता है। बाक़ी की देर से आई उम्मीदवारी में गति के संकेत भी देखे जाएंगे, हालांकि अकेला स्ट्रॉ पोल उनकी जीत की राह साबित नहीं कर सकता।
इस पूरी प्रक्रिया की केंद्रीय कसौटी सीधी है: क्या कोई उम्मीदवार नौ वोट जुटाने के साथ-साथ पाँचों स्थायी सदस्यों को स्वीकार्य रह सकता है? जब तक इसका जवाब नहीं मिलता, पहले मतदान के नतीजे केवल संकेत हैं—फैसला नहीं।
रिपोर्ट किए गए प्रमुख नतीजे इस प्रकार थे:
चिली की मिशेल बाचेलेट, इक्वाडोर की मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, सेनेगल के मैकी साल और युगांडा के ओलारा ओतुनु पहले दौर में शीर्ष तीन उम्मीदवारों से पीछे रहे। यह मतदान उम्मीदवारों की व्यवहारिक संभावना पर शुरुआती राय जानने का तरीका था, बाध्यकारी वोट या अंतिम रैंकिंग नहीं।
अब दौड़ में शामिल उम्मीदवार हैं:
पहले सुरक्षा परिषद स्ट्रॉ पोल में ठोस समर्थन के संकेत केवल ग्रिन्सपैन, रोड्रिग्स-बिर्केट और ग्रॉसी के पक्ष में मिले थे। इवोन बाक़ी की स्थिति का अनुमान उस मतदान से नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि उन्होंने इसके बाद दौड़ में प्रवेश किया।
टोंगा ने इस सप्ताह इक्वाडोर की राजनयिक और पूर्व सरकारी मंत्री इवोन बाक़ी को नामित किया। इसके साथ ही वह आठवीं उम्मीदवार और मैदान में दूसरी इक्वाडोरियन बन गईं। वह राजदूत के रूप में काम कर चुकी हैं, लेकिन 30 जुलाई के स्ट्रॉ पोल में उनका नाम शामिल नहीं था।
बाक़ी ने अपने अभियान में संघर्षों की रोकथाम और संयुक्त राष्ट्र के नवीनीकरण को प्रमुख मुद्दा बनाया है। अपने एजेंडे पर बात करते हुए उन्होंने लेबनान के गृहयुद्ध के दौरान के निजी अनुभव का भी उल्लेख किया।
बाक़ी को औपचारिक अमेरिकी समर्थन मिलने या डोनाल्ड ट्रंप और बिल क्लिंटन से उनके कथित संबंधों को अमेरिकी वोटिंग प्रतिबद्धता मानने की बातें उपलब्ध रिपोर्टिंग से साबित नहीं होतीं। दिए गए स्रोतों में अमेरिका का कोई आधिकारिक समर्थन या समर्थन का वादा दर्ज नहीं है। इसलिए इन दावों को पुष्ट तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
महासभा की अध्यक्ष अनालेना बैरबॉक चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाने पर जोर देती रही हैं। इसमें समय पर नामांकन, उम्मीदवारों के सार्वजनिक संवाद और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को उम्मीदवारों से सीधे विचार जानने के अधिक अवसर देने की मांग शामिल है। उनके कार्यालय ने सुरक्षा परिषद के निर्णय से पहले सभी उम्मीदवारों के लिए समान परिस्थितियों और व्यापक भागीदारी पर बल दिया है।
अमेरिका और रूस ने बैरबॉक की भूमिका को सुरक्षा परिषद की चयन प्रक्रिया में दखल या अधिकार-क्षेत्र से आगे बढ़ने के रूप में देखा है। रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन ने उन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया है, जबकि रूस ने भी उनके द्वारा निभाई जा रही भूमिका पर आपत्ति जताई है।
यह विवाद प्रक्रिया में मौजूद एक बुनियादी तनाव को दिखाता है। महासभा पारदर्शिता और भागीदारी की मांग कर सकती है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 97 महासचिव के लिए सिफारिश करने का चरण सुरक्षा परिषद को सौंपता है। स्ट्रॉ पोल स्वयं अनौपचारिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली होते हैं; वे कानूनी रूप से बाध्यकारी निर्णय नहीं हैं।
रूस ने संकेत दिया है कि आगे और उम्मीदवार सामने आ सकते हैं। उसने संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता और संघर्ष प्रबंधन के व्यापक संदर्भ में मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुतारेस के रिकॉर्ड की भी आलोचना की है। इससे मॉस्को के पास मौजूदा अग्रणी उम्मीदवारों के बीच जल्द सहमति बनने से रोकने की गुंजाइश बनी हुई है।
उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह साबित नहीं होता कि रूस ने किसी नामित उम्मीदवार के समर्थन या विरोध को औपचारिक रूप से तय कर लिया है। इसलिए नए नामों के लिए उसका खुलापन इस संकेत के रूप में समझना बेहतर है कि उम्मीदवारों की सूची और उनसे जुड़ी कूटनीतिक सौदेबाजी अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई है।
अनुच्छेद 97 के तहत महासभा, सुरक्षा परिषद की सिफारिश मिलने के बाद महासचिव की नियुक्ति करती है। व्यवहार में उम्मीदवार को सुरक्षा परिषद के 15 में से कम-से-कम नौ वोट हासिल करने होते हैं और पाँच स्थायी सदस्यों—चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका—में से किसी का वीटो नहीं झेलना होता है।
बाद के स्ट्रॉ पोल आम तौर पर स्थायी सदस्यों के रुख को निर्वाचित सदस्यों से अलग करके दिखाते हैं। इससे वीटो के जोखिम का पता अधिक स्पष्ट रूप से चलता है। कई बार यह जानकारी किसी उम्मीदवार के कुल “प्रोत्साहित” वोटों से भी ज्यादा निर्णायक होती है।
गुतारेस का दूसरा कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। इस बार लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र की मजबूत मौजूदगी आंशिक रूप से उस अनौपचारिक क्षेत्रीय-रोटेशन परंपरा से जुड़ी है, जिसके अनुसार इस क्षेत्र की बारी मानी जा रही है। हालांकि यह राजनीतिक परंपरा है, बाध्यकारी नियम नहीं; यह सुरक्षा परिषद की सिफारिश करने की शक्ति को बदल नहीं सकती।
यदि स्थायी सदस्य बंटे रहते हैं या नए उम्मीदवार सामने आते हैं, तो सितंबर और अक्टूबर में—या उसके बाद भी—और स्ट्रॉ पोल हो सकते हैं। दूसरे मतदान से पहले की रिपोर्टिंग में भी संकेत था कि फैसला तुरंत होने के बजाय अभी कुछ सप्ताह दूर है।
सबसे अहम संकेत यह होगा कि क्या ग्रिन्सपैन अपनी बढ़त कायम रखती हैं, क्या रोड्रिग्स-बिर्केट या ग्रॉसी अंतर कम करते हैं, और क्या कोई उम्मीदवार समझौते के विकल्प के रूप में पर्याप्त समर्थन जुटा पाता है। बाक़ी की देर से आई उम्मीदवारी में गति के संकेत भी देखे जाएंगे, हालांकि अकेला स्ट्रॉ पोल उनकी जीत की राह साबित नहीं कर सकता।
इस पूरी प्रक्रिया की केंद्रीय कसौटी सीधी है: क्या कोई उम्मीदवार नौ वोट जुटाने के साथ-साथ पाँचों स्थायी सदस्यों को स्वीकार्य रह सकता है? जब तक इसका जवाब नहीं मिलता, पहले मतदान के नतीजे केवल संकेत हैं—फैसला नहीं।