इस खोज में शामिल फ़िनिश गोताखोर मिको पासी ने राहत के इस पल को, लेकिन आने वाले ख़तरे को एक लाइन में बयाँ किया: “यह बस थोड़ी देर की राहत है क्योंकि पांचों बचे हुए लोग अभी भी ऑपरेशन के सबसे आखिरी और नाज़ुक चरण में हैं” । बाक़ी दो ग्रामीणों का अब तक कोई पता नहीं है, और पूरे मिशन का सबसे ख़तरनाक हिस्सा—यानी सबको ज़िंदा बाहर निकालना—अब शुरू हुआ है।
ये सातों सोना खोदने वाले एक बड़े समूह का हिस्सा थे। ख़बरों के मुताबिक, चीनी निवेशकों वाली एक कंपनी ने उन्हें 150 बात (लगभग 350 रुपये) प्रतिदिन पर सोना ढूँढने के लिए रखा था । बाढ़ का पानी बढ़ने पर तीन मज़दूर किसी तरह भागने में सफल रहे, लेकिन बाक़ी सात अंदर ही क़ैद हो गए
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लाओस और थाईलैंड की बचाव टीमों के साथ-साथ मिको पासी जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इस बाढ़ग्रस्त और बिना नक्शे वाली गुफा प्रणाली में कई दिनों तक जान जोखिम में डालकर खोजबीन की। 27 मई को, स्थानीय समयानुसार शाम करीब 4:30 बजे (0930 GMT), गोताखोरों ने एक छोटे, कीचड़ भरे कक्ष में ऊँचाई पर बनी चट्टान पर बैठे पांच लोगों को ढूँढ निकाला । इन लोगों ने बिना खाने के आठ दिन से ज़्यादा का समय गुज़ारा था। गोताखोरों द्वारा शूट किए गए वीडियो में बेहद भावुक कर देने वाला पल क़ैद हुआ जब बचावकर्मियों ने अँधेरी गुफा को रोशन किया और फंसे हुए लोगों से कहा, “ज़रूरी बात ये है कि आप ज़िंदा हैं”
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बचावकर्मियों ने स्थिति को “वक़्त के ख़िलाफ़ एक जंग” बताया है । तुरंत और सुरक्षित निकासी में ये चुनौतियाँ सबसे बड़ी रुकावट हैं:
29 मई तक, पाँचों जीवित व्यक्ति अभी भी गुफा के अंदर ही हैं और पूरा ऑपरेशन एक साथ कई मोर्चों पर केंद्रित है, जिसमें पानी बाहर निकालना फ़िलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता है ।
यह प्राथमिक योजना है। हाई-कैपेसिटी वाले शक्तिशाली पंप साइट पर लगाए जा चुके हैं और बचावकर्मी लगातार पानी का स्तर कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसका लक्ष्य है कि इतना पानी निकाल दिया जाए कि फंसे हुए लोग गुफा के ऊपरी, सूखे हिस्सों से पैदल चलकर या स्ट्रेचर पर लिटाकर बाहर आ सकें और उन्हें गोता लगाने की ज़रूरत ही न पड़े । थाई बचावकर्मी केंगकड बोंगकावोंग ने 28 मई को उम्मीद जताई थी कि अगर रातों-रात काफ़ी पानी निकाल लिया गया, तो ये लोग खुद ही रेंगकर बाहर निकल सकते हैं
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अगर पंपिंग नाकाम रहती है या नई बारिश पानी निकालने की रफ़्तार से तेज़ होती है, तो बचावकर्मी अंतिम उपाय के रूप में स्कूबा गियर की मदद से बाढ़ वाले हिस्सों से इन्हें बाहर निकालने की कोशिश कर सकते हैं। यह तरीका सबसे आखिरी और बेहद ख़तरनाक विकल्प माना जा रहा है। इनमें से किसी भी फंसे हुए ग्रामीण को डाइविंग का कोई अनुभव नहीं है, और घबराए हुए, कमज़ोर लोगों को संकीर्ण, अँधेरी, मलबे से भरी पानी के अंदर की सुरंगों से गुज़ारना असाधारण रूप से जानलेवा होगा । एक आपातकालीन योजना के तहत, संकरी गुफाओं के लिए ख़ास स्ट्रेचर और ज़रूरी ऑक्सीजन सिलिंडरों की माँग भी की गई है
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टीमें ज़मीन के ऊपर से भी सर्वेक्षण कर रही हैं ताकि कोई और वैकल्पिक छेद या ऊपरी मार्ग खोजा जा सके जो बचे हुए लोगों तक पहुँचने का कोई सूखा या आसान रास्ता मुहैया करा सके ।
यह पूरी रणनीति 2018 में थाईलैंड के प्रसिद्ध थाम लुआंग गुफा बचाव अभियान की प्रतिध्वनि है, जहाँ आख़िरकार पंपिंग और बच्चों को गोता लगाना सिखाने, दोनों की ज़रूरत पड़ी थी। उस मिशन में शामिल रहे कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ अब इस लाओस अभियान का भी हिस्सा बन चुके हैं ।
बाक़ी दो लापता लोगों की तलाश अभी भी जारी है। हो सकता है कि वे गुफा के किसी और गहरे, अनदेखे कक्ष में हों या हो सकता है कि वे शुरुआती बाढ़ में ही जीवित न बचे हों । इस बहुराष्ट्रीय बचाव अभियान में अब लाओ अधिकारी, “रेस्क्यू वालंटियर फॉर पीपल” जैसे स्वयंसेवी समूह, मेट्टा थाम रेस्क्यू ग्रुप सहित थाई बचाव दल, फ़िनिश केव-डाइविंग विशेषज्ञ और चीन से आए विशेषज्ञ शामिल हैं
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लाओस सरकार ने 26 मई को सरकारी समाचार एजेंसी केपीएल के ज़रिए आधिकारिक रूप से खोज अभियान की पुष्टि की थी और चल रही आपातकालीन प्रतिक्रिया का समन्वय कर रही है । तात्कालिक स्थिति अभी भी बहुत अनिश्चित है। मानसून की बारिश का लगातार ख़तरा और गुफा की भयावह स्थितियाँ हर कदम पर बाधा बन रही हैं। इन पाँच लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए समय का दायरा बहुत संकीर्ण है और लगातार सिकुड़ता जा रहा है।
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