लेकिन पूरे 2025 में टेलीकॉम कंपनियों के सीमित पूंजी निवेश (capex) के कारण कुल खर्च कमजोर ही रहा। इसी माहौल में CPE सेगमेंट कुछ गिने‑चुने हिस्सों में से था जहां स्पष्ट वृद्धि दिखी।
दो प्रमुख श्रेणियां खास तौर पर तेजी दिखा रही हैं:
इससे संकेत मिलता है कि बाजार की वापसी अभी मांग और नेटवर्क विस्तार से संचालित है, न कि ऊंची कीमतों से।
राजस्व के स्तर पर वृद्धि उतनी तेज नहीं है जितनी यूनिट शिपमेंट में। उदाहरण के लिए, वायरलेस ब्रॉडबैंड CPE बाजार का आकार लगभग 17.6 अरब डॉलर (2025) से बढ़कर करीब 19.4 अरब डॉलर (2026) तक पहुंचने का अनुमान है।
यह वृद्धि मजबूत है, लेकिन विस्फोटक नहीं। कारण साफ है: शिपमेंट बढ़ने के बावजूद उपकरणों की औसत कीमतें स्थिर या घटती हुई रहती हैं।
टेलीकॉम हार्डवेयर उद्योग में यह आम चक्र है—जैसे‑जैसे तकनीक परिपक्व होती है और उत्पादन बड़े पैमाने पर होने लगता है, उत्पाद कमोडिटी जैसे हो जाते हैं और मार्जिन घटते हैं।
CPE मांग का सबसे बड़ा संरचनात्मक ड्राइवर आज फाइबर नेटवर्क अपग्रेड है। कई देशों में ऑपरेटर पुराने नेटवर्क से नई पीढ़ी के PON सिस्टम की ओर जा रहे हैं। इनमें खास तौर पर XGS‑PON शामिल है, जो लगभग 10Gbps सममित ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराता है।
इन अपग्रेड का CPE शिपमेंट पर सीधा असर पड़ता है:
चीन इस मांग का बड़ा केंद्र बन चुका है। वहां राष्ट्रीय स्तर पर FTTH विस्तार और अगली पीढ़ी के PON नेटवर्क का तेजी से रोलआउट हो रहा है, जिससे ऑप्टिकल एक्सेस उपकरणों का बाजार अगले कई वर्षों तक बढ़ने की संभावना है।
भले ही मांग सुधर रही हो, लेकिन ब्रॉडबैंड CPE उद्योग में औसत बिक्री कीमत (ASP) अभी भी दबाव में है। इसके कई कारण हैं:
1. हार्डवेयर का कमोडिटीकरण
होम गेटवे, राउटर और ONT जैसे उपकरण काफी मानकीकृत हो चुके हैं। इससे अलग‑अलग कंपनियों के उत्पादों में अंतर कम होता है और कीमत पर प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
2. एशिया में केंद्रित मैन्युफैक्चरिंग
दुनिया के बड़े हिस्से के ब्रॉडबैंड उपकरण कुछ ही ODM और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स द्वारा डिजाइन या बनाए जाते हैं, जिनका उत्पादन मुख्यतः एशिया में केंद्रित है।
3. सेमीकंडक्टर सप्लाई‑चेन में बदलाव
वैश्विक AI उछाल के कारण कई चिप निर्माता अधिक लाभ वाले AI प्रोसेसर और मेमोरी पर ध्यान दे रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप नेटवर्किंग उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली mature‑node चिप उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा चीनी फाउंड्रीज़ की ओर शिफ्ट हुआ है।
इन कारकों का संयुक्त प्रभाव यह है कि शिपमेंट बढ़ते हुए भी कीमतें स्थिर या गिरती रहती हैं।
ताइवान लंबे समय से वैश्विक CPE सप्लाई‑चेन का अहम हिस्सा रहा है। WNC, Sercomm, Arcadyan, Zyxel और Alpha Networks जैसी कंपनियां दुनिया भर के टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए बड़े पैमाने पर गेटवे और फिक्स्ड‑वायरलेस डिवाइस बनाती हैं।
फिर भी कुछ संरचनात्मक बदलाव ऐसे हैं जो उनकी शिपमेंट वृद्धि को सीमित कर सकते हैं।
चीन में मांग का केंद्रित होना
चीन में PON और फाइबर अपग्रेड बहुत बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। लेकिन वहां का उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र काफी हद तक स्थानीय सप्लाई‑चेन से जुड़ा है।
लागत प्रतिस्पर्धा
टेलीकॉम ऑपरेटर लाखों यूनिट्स में CPE खरीदते हैं और कीमत पर कड़ा दबाव डालते हैं। ऐसे में उत्पादन और सप्लाई‑चेन के करीब होना बड़ा फायदा बन जाता है।
चिप सप्लाई‑चेन का स्थानांतरण
मिड‑रेंज सेमीकंडक्टर उत्पादन का कुछ हिस्सा चीन में बढ़ने से वहां की हार्डवेयर कंपनियों की लागत प्रतिस्पर्धा मजबूत हुई है।
इसका परिणाम एक दिलचस्प विरोधाभास है: वैश्विक शिपमेंट बढ़ सकते हैं, लेकिन कुछ सप्लायर्स की हिस्सेदारी घट सकती है।
2026 की शुरुआत में ब्रॉडबैंड CPE बाजार टेलीकॉम हार्डवेयर उद्योग के एक परिचित चक्र को दर्शाता है:
यदि वैश्विक स्तर पर फाइबर विस्तार और 10Gbps ब्रॉडबैंड सेवाओं का रोलआउट जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में CPE डिवाइसों की मांग बढ़ती रह सकती है। लेकिन इस बाजार में सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां सप्लाई‑चेन, लागत और उत्पादन पैमाने में कितनी प्रतिस्पर्धी हैं।