Elkann पहले से कई बड़े पद संभाल रहे हैं:
इन जिम्मेदारियों के कारण निवेशकों को आशंका है कि Meta के बोर्ड में उनकी सक्रिय भागीदारी सीमित हो सकती है।
बोर्ड मीटिंग में उपस्थिति अब बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण गवर्नेंस मानक बन चुकी है। कुछ निवेशक समूहों ने पहले भी नोट किया था कि Elkann कुछ समीक्षाओं में न्यूनतम उपस्थिति मानक तक नहीं पहुंच पाए।
नॉर्वे का यह फंड आम तौर पर प्रबंधन (management) के साथ वोट करता है। इसलिए Meta की 27 मई 2026 की बैठक से पहले उसका कई शेयरहोल्डर प्रस्तावों का समर्थन करना असामान्य माना जा रहा है।
इन प्रस्तावों में कई संवेदनशील और उभरते जोखिमों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं, जैसे:
Meta की 2026 प्रॉक्सी फाइलिंग में AI गवर्नेंस, डेटा सुरक्षा, मानवाधिकार ड्यू डिलिजेंस और अन्य जोखिमों से जुड़े कई प्रस्ताव शामिल हैं।
इन प्रस्तावों का समर्थन करके फंड ने संकेत दिया कि उसे Meta की AI रणनीति, प्लेटफॉर्म गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन को लेकर व्यापक चिंता है।
इन सभी बहसों के बावजूद, Meta में शेयरधारकों की वास्तविक शक्ति सीमित है। इसका कारण है कंपनी की dual‑class share structure।
इस व्यवस्था में कुछ शेयरों को अधिक वोटिंग अधिकार मिलते हैं। इससे कंपनी के संस्थापक और CEO Mark Zuckerberg के पास कंपनी के निर्णयों और बोर्ड संरचना पर निर्णायक नियंत्रण बना रहता है।
कुछ निवेशकों ने प्रस्ताव रखा है कि Meta को “one‑share, one‑vote” मॉडल अपनाना चाहिए, ताकि हर शेयर का वोट समान हो और नियंत्रण आर्थिक हिस्सेदारी के अनुसार हो।
लेकिन मौजूदा संरचना के कारण ऐसे बदलावों को मंजूरी मिलना कठिन माना जाता है।
भले ही इन प्रस्तावों के पारित होने की संभावना कम हो, बड़े निवेशकों के सार्वजनिक वोट कंपनी पर दबाव बना सकते हैं।
नॉर्वे का वेल्थ फंड दुनिया भर की हजारों कंपनियों में निवेश रखता है और उसके मतदान निर्णय अक्सर निवेशकों के व्यापक रुख का संकेत माने जाते हैं।
Meta के लिए यह संदेश साफ है: जैसे‑जैसे कंपनी जनरेटिव AI, बड़े डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेटफॉर्म मॉडरेशन जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है, वैसे‑वैसे निवेशक जवाबदेही, जोखिम प्रबंधन और बोर्ड की स्वतंत्रता पर अधिक सख्त निगरानी चाहते हैं।
27 मई की वार्षिक बैठक में अंतिम परिणाम चाहे जो भी हो, यह विवाद दिखाता है कि टेक कंपनियों में संस्थापक‑नियंत्रित संरचना और निवेशकों की निगरानी के बीच टकराव अभी खत्म होने वाला नहीं है।