NUS में स्थापित 20 CL1 यूनिट का यह सेटअप पारंपरिक डेटा सेंटर का विकल्प नहीं, बल्कि जैविक कंप्यूटिंग का शोध और सत्यापन प्रोटोटाइप है। हर CL1 में कम से कम 2,00,000 प्रयोगशाला में विकसित मानव न्यूरॉन्स होते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रोड लगे सिलिकॉन चिप पर संवर्धित किया जाता है। साझेदार तकनीकी परीक्षण, जैव सुरक्षा और नियामकीय...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is Singapore’s new brain-cell-powered biological data centre at NUS, launched by Cortical Labs in partnership with NUS and DayOne, how. Article summary: Singapore’s new facility is a 20-unit biological-computing prototype at NUS’s Centre for Life Sciences, operated by Cortical Labs with NUS Medicine and DayOne. It is not a replacement for conventional cloud infrastructur. Topic tags: general, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, click
सिंगापुर में एक ऐसा डेटा सेंटर शुरू हुआ है जिसके कंप्यूटिंग सिस्टम में पारंपरिक सिलिकॉन चिप्स के साथ जीवित मानव न्यूरॉन्स भी शामिल हैं। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) के Centre for Life Sciences में स्थापित शुरुआती सेटअप में Cortical Labs के 20 CL1 जैविक कंप्यूटर हैं। इसे NUS Medicine और डेटा सेंटर कंपनी DayOne के सहयोग से चलाया जा रहा है। फिलहाल यह व्यावसायिक सर्वर फार्म नहीं, बल्कि शोध और तकनीकी सत्यापन का प्रोटोटाइप है।
इस परियोजना का उद्देश्य क्लाउड कंप्यूटिंग या बड़े भाषा मॉडल (LLM) चलाने वाले सिलिकॉन हार्डवेयर को बदलना नहीं है। इसके बजाय, यह जांच की जा रही है कि जीवित न्यूरल नेटवर्क ऐसे विशेष कंप्यूटिंग कार्यों में उपयोगी हो सकते हैं या नहीं, जहां डेटा सीमित हो, परिस्थितियां लगातार बदलती हों और हर संभावित स्थिति का पहले से अनुमान लगाना मुश्किल हो।
यह एक हाइब्रिड यानी ‘वेटवेयर’ कंप्यूटिंग सिस्टम है। इसमें जीवित न्यूरॉन्स अनुकूलनशील प्रोसेसिंग का हिस्सा संभालते हैं, जबकि सिलिकॉन चिप्स, सॉफ्टवेयर और प्रयोगशाला उपकरण विद्युत संकेतों का आदान-प्रदान, डेटा इनपुट, पर्यावरण नियंत्रण और कोशिकाओं की देखभाल करते हैं।
NUS में शुरुआती तैनाती एक रैक में रखी 20 CL1 यूनिट की है। साझेदारों के अनुसार, यह जीवित जैविक घटकों से एकीकृत और स्वतंत्र रूप से संचालित सर्वर रैक का शुरुआती उदाहरण है। अगला संभावित चरण DayOne की व्यावसायिक डेटा सेंटर सुविधा में विस्तार का है।
हर CL1 में कम-से-कम 2,00,000 प्रयोगशाला में विकसित मानव न्यूरॉन्स होते हैं। ये कोशिकाएं रक्त कोशिकाओं को दोबारा प्रोग्राम करके स्टेम सेल में बदलने के बाद विकसित की जाती हैं। फिर इन्हें इलेक्ट्रोड लगे सिलिकॉन चिप पर संवर्धित किया जाता है।
इन इलेक्ट्रोड्स के जरिए कंप्यूटर और न्यूरल नेटवर्क के बीच दोतरफा संपर्क बनता है:
यह बंद फीडबैक लूप जीवित न्यूरल नेटवर्क को एक सिम्युलेटेड वातावरण के साथ संपर्क करने और अपनी प्रतिक्रियाओं को बदलने देता है। यानी न्यूरॉन्स केवल दिखावे के लिए नहीं हैं; वे सिस्टम के अनुकूलनशील कंप्यूटिंग हिस्से का काम करते हैं। सिलिकॉन चिप, इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर इंटरफेस तथा नियंत्रण की भूमिका निभाते हैं।
CL1 सामान्य सिलिकॉन सर्वर की तरह अकेले चलने वाली मशीन नहीं है। इसके न्यूरॉन्स को जीवित और नियंत्रित परिस्थितियों में बनाए रखना पड़ता है।
तकनीशियन हर तीन दिन में शुगर, सूक्ष्म पोषक तत्वों और pH बफर वाला पोषक मिश्रण बदलते या भरते हैं। गैस-मिश्रण प्रणाली कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन की आपूर्ति करती है। पूरा सेटअप कोशिका-संवर्धन के लिए जरूरी पर्यावरणीय स्थितियों को नियंत्रित करता है।
इसलिए जैविक कंप्यूटिंग का अर्थ बिना बुनियादी ढांचे वाली कंप्यूटिंग नहीं है। बिजली और पारंपरिक सर्वर-कूलिंग की जरूरत कुछ हद तक कम हो सकती है, लेकिन इसके बदले प्रयोगशाला सामग्री, पोषक द्रव, गैस नियंत्रण, जैविक रखरखाव और प्रशिक्षित ऑपरेटरों की जरूरत पड़ती है।
Cortical Labs का कहना है कि जैविक न्यूरल नेटवर्क अपेक्षाकृत कम उदाहरणों से सीख सकते हैं और परिस्थितियां बदलने पर अधिक लचीले ढंग से प्रतिक्रिया दे सकते हैं। यदि यह दावा स्वतंत्र परीक्षणों में साबित होता है, तो ऐसी प्रणालियां उन कामों के लिए उपयोगी हो सकती हैं जहां बड़े और पूरी तरह लेबल किए गए डेटासेट जुटाना कठिन है।
कंपनी और उसके साझेदारों ने जिन संभावित क्षेत्रों का उल्लेख किया है, उनमें शामिल हैं:
हालांकि, ये अभी प्रस्तावित या प्रायोगिक उपयोग हैं। उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि जैविक कंप्यूटर उत्पादन स्तर के रोबोटिक्स या साइबर सुरक्षा कार्यों में सिलिकॉन सिस्टम से बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके लिए स्वतंत्र और कार्य-विशिष्ट बेंचमार्क जरूरी होंगे।
Cortical Labs के अनुसार, लाइफ-सपोर्ट उपकरण समेत एक CL1 लगभग 30 वाट बिजली लेता है और उसे पारंपरिक सर्वर कूलिंग की जरूरत नहीं होती। तुलना के लिए, Nvidia H100 SXM की अधिकतम रेटेड खपत 700 वाट तक बताई गई है, जबकि सहायक हार्डवेयर सहित आठ H100 वाले सर्वर की खपत लगभग 10,200 वाट बताई गई है।
इसी वजह से यह विचार सिंगापुर में खास ध्यान खींच रहा है। 2020 में देश की कुल बिजली खपत का 7% डेटा सेंटरों से जुड़ा था। डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने की बहस में बिजली और पानी की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं।
फिर भी, किसी एक डिवाइस की कम बिजली खपत अपने-आप में कम कुल लागत या बेहतर पर्यावरणीय प्रभाव साबित नहीं करती। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में पानी के उपयोग, पूरे जीवन-चक्र के पर्यावरणीय प्रभाव या समान कार्य के लिए GPU इंफ्रास्ट्रक्चर से सीधी तुलना का निर्णायक आकलन नहीं है। पोषक द्रव, गैस नियंत्रण, कोशिका उत्पादन, प्रयोगशाला उपकरण और मानव श्रम को भी पूरी गणना में शामिल करना होगा।
CL1 का सबसे मजबूत संभावित उपयोग विशेष और अनुकूलनशील प्रोसेसिंग में है, न कि सामान्य उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग में। Cortical Labs के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी माना है कि बड़े भाषा मॉडल जैसे कार्यों में इस्तेमाल होने वाली तेज, सटीक और दोहराने योग्य गणनाओं के लिए सिलिकॉन अभी काफी बेहतर है।
व्यावहारिक मॉडल संभवतः पूरक भूमिका का होगा:
इस अंतर को समझना जरूरी है। किसी इंस्टॉलेशन को ‘जैविक डेटा सेंटर’ कहने का अर्थ यह नहीं है कि मुख्यधारा के क्लाउड सर्वर जल्द ही जीवित कोशिकाओं वाले रैक से बदल दिए जाएंगे।
सिंगापुर परियोजना की शुरुआत 20 CL1 यूनिट के साथ संयुक्त आंतरिक शोध और विकास के लिए हुई है। साझेदार इस प्रोटोटाइप के जरिए संचालन संबंधी विशेषज्ञता विकसित कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए निर्माण तथा सहायता प्रक्रियाओं का आकलन कर रहे हैं।
तकनीकी सत्यापन, जैव-सुरक्षा आवश्यकताओं और नियामकीय मंजूरियों के अधीन DayOne और Cortical Labs सिंगापुर की एक व्यावसायिक सुविधा में चरणबद्ध तरीके से 1,000 तक यूनिट लगाने की संभावना तलाश रहे हैं।
Cortical Labs की मेलबर्न सुविधा में 120 CL1 यूनिट संचालित हैं और रिपोर्टों के अनुसार वहां करीब 20 कॉरपोरेट शोध तथा विश्वविद्यालय ग्राहक हैं। एक CL1 तक रिमोट पहुंच की कीमत लगभग 2,200 अमेरिकी डॉलर प्रति माह बताई गई है। इसकी तुलना में प्रमुख क्लाउड सेवाओं पर हाई-एंड AI चिप का मासिक किराया करीब 4,300 अमेरिकी डॉलर बताया गया है।
यह रिमोट-एक्सेस शुल्क ग्राहक से लिया जाने वाला मूल्य है, न कि जैविक कंप्यूटर या NUS सुविधा की वास्तविक संचालन लागत। सिंगापुर इंस्टॉलेशन को बनाए रखने की पूरी लागत साझेदारों ने सार्वजनिक नहीं की है।
जैविक कंप्यूटिंग के सामने कई अनसुलझे सवाल हैं:
इन्हीं कारणों से सिंगापुर के इस सेटअप को तैयार सर्वर फार्म के बजाय चरणबद्ध सत्यापन परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
सिंगापुर का जैविक डेटा सेंटर फिलहाल एक रणनीतिक प्रयोग है। यदि सीमित डेटा से सीखने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता स्वतंत्र परीक्षणों में सफल रहती है, तो वेटवेयर कंप्यूटिंग सिंगापुर को AI क्षमता बढ़ाने का एक विशिष्ट विकल्प दे सकती है—ऐसा विकल्प जिसमें GPU-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह कूलिंग और बिजली की मांग बढ़ना जरूरी न हो।
फिलहाल उपलब्ध साक्ष्य से केवल इतना निष्कर्ष निकलता है कि सिंगापुर ने जीवित न्यूरॉन्स और सिलिकॉन नियंत्रण प्रणालियों को मिलाकर एक छोटा जैविक कंप्यूटिंग प्रोटोटाइप तैयार किया है। इसकी असली अहमियत यह परखने में है कि यह असामान्य आर्किटेक्चर उपयोगी, भरोसेमंद और व्यावसायिक रूप से बड़े पैमाने पर लागू हो सकता है या नहीं—न कि यह साबित करने में कि जैविक सर्वर मुख्यधारा के डेटा सेंटरों की जगह लेने वाले हैं।
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NUS में स्थापित 20 CL1 यूनिट का यह सेटअप पारंपरिक डेटा सेंटर का विकल्प नहीं, बल्कि जैविक कंप्यूटिंग का शोध और सत्यापन प्रोटोटाइप है।
NUS में स्थापित 20 CL1 यूनिट का यह सेटअप पारंपरिक डेटा सेंटर का विकल्प नहीं, बल्कि जैविक कंप्यूटिंग का शोध और सत्यापन प्रोटोटाइप है। हर CL1 में कम से कम 2,00,000 प्रयोगशाला में विकसित मानव न्यूरॉन्स होते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रोड लगे सिलिकॉन चिप पर संवर्धित किया जाता है।
साझेदार तकनीकी परीक्षण, जैव सुरक्षा और नियामकीय मंजूरियों के अधीन इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से 1,000 यूनिट तक बढ़ाने की संभावना तलाश रहे हैं।