प्रीमियम स्नैपड्रैगन X एलीट और X प्लस चिप्स ओरियन (Oryon) नाम के कस्टम CPU कोर पर बने हैं। यह एक खास माइक्रोआर्किटेक्चर है जिसे कंपनी ने Nuvia के अधिग्रहण से हासिल किया था और इसे Apple की M-सीरीज सिलिकॉन को टक्कर देने के लिए डिजाइन किया गया था ।
लेकिन स्नैपड्रैगन C में क्रायो (Kryo) कोर का इस्तेमाल हुआ है। ये कोर एआरएम के स्टैंडर्ड कॉर्टेक्स डिजाइन पर आधारित होते हैं और यही वो परिवार है जिसे क्वालकॉम अपने सस्ते स्मार्टफोन और क्रोमबुक चिप्स में इस्तेमाल करता है ।
यही दोनों चिप्स के बीच सबसे बड़ा आर्किटेक्चरल अंतर है। ओरियन कोर को बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि क्रायो कोर के इस्तेमाल से क्वालकॉम अपनी चिप बनाने की लागत को काफी हद तक कम कर पाता है। मोबाइल फोन से निकली इस तकनीक को लैपटॉप में रखकर स्नैपड्रैगन C का लक्ष्य बुनियादी प्रोडक्टिविटी पर है—जैसे वेब ब्राउजिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, डॉक्यूमेंट एडिटिंग और वीडियो कॉल्स । इसे भारी-भरकम कामों के लिए नहीं बनाया गया है।
दोनों ही प्लेटफॉर्म्स में ऑन-डिवाइस AI के लिए एक इंटीग्रेटेड न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट (NPU) मौजूद है, लेकिन इनकी क्षमताओं में जमीन-आसमान का फर्क है। स्नैपड्रैगन X सीरीज का हेक्सागॉन NPU 45 TOPS (खरबों ऑपरेशन प्रति सेकंड) की स्पीड देता है, जो माइक्रोसॉफ्ट के ‘कॉपायलट+’ (Copilot+) फीचर्स को चलाने के लिए जरूरी 40 TOPS की सीमा को आसानी से पार कर जाता है । लेकिन क्वालकॉम ने साफ कहा है कि स्नैपड्रैगन C का NPU उस स्तर का नहीं है, इसलिए उसमें कॉपायलट+ सपोर्ट नहीं मिलेगा
। इसका मतलब यह है कि आपको Recall जैसे नेक्स्ट-जेन AI फीचर्स का फायदा नहीं मिलेगा, लेकिन आप एआई-पावर्ड कैमरा इफेक्ट्स और नॉइज़ कैंसिलेशन जैसे फीचर्स का मजा जरूर ले पाएंगे।
क्वालकॉम ने साफ शब्दों में अपने टार्गेट ऑडियंस का जिक्र किया है: छात्र, परिवार और छोटे बिजनेस। ऐसे लोग जिन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए एक फुर्तीली मशीन चाहिए, जो पूरे दिन चले और गर्म भी न हो—संभव है कि इसमें पंखा भी न लगा हो ।
भारत जैसे देश में जहां गर्मी एक बड़ा मुद्दा है, “कूल और क्वाइट” डिजाइन का वादा बहुत मायने रखता है। भले ही क्रोमबुक लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में इस सेगमेंट पर राज कर रहे हैं, लेकिन स्नैपड्रैगन C एक बड़ा फायदा देता है: विंडोज 11 का पूरा अनुभव। इसका मतलब है क्रोम ओएस के सीमित एप इकोसिस्टम के मुकाबले, यहां आपको वो सारे फीचर्स और सॉफ्टवेयर मिलेंगे, जिनसे आप पहले से वाकिफ हैं ।
क्वालकॉम के निशाने पर एक और बड़ा नाम है: एप्पल का मैकबुक नियो (MacBook Neo)। यह एप्पल की किफायती एआरएम-बेस्ड लैपटॉप सीरीज की रिपोर्टेड कीमत 50,000 रुपये ($599) से शुरू होती है । ऐसे में 25,000 से 35,000 रुपये की रेंज वाले स्नैपड्रैगन C लैपटॉप एप्पल से करीब 15,000 से 25,000 रुपये सस्ते पड़ेंगे। यह उन खरीदारों के लिए विंडोज को फिर से बजट का बादशाह बना सकता है, जो पहले केवल क्रोमबुक या एंट्री-लेवल मैक ही खरीदने की सोचते थे
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स्नैपड्रैगन C लैपटॉप की पहली खेप एसर, HP और लेनोवो जैसे ब्रांड्स से आएगी। इन डिवाइसेज के 2026 की दूसरी छमाही तक भारतीय बाजार में दस्तक देने की उम्मीद है ।
एसर ने तो अपना पहला मॉडल अस्पायर गो 15 (Acer Aspire Go 15) पहले ही दिखा दिया है। यह एक 15.6 इंच का लैपटॉप है जिसमें 8GB रैम, 512GB SSD स्टोरेज, एक 1080p वेबकैम, 53Wh की बैटरी और वाई-फाई 6E सपोर्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं । हालांकि अभी तक भारत में इसकी आधिकारिक कीमत का एलान नहीं किया गया है, मगर माना जा रहा है कि यह 25,000 से 35,000 रुपये के बीच लॉन्च होगा
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फिलहाल कई अहम जानकारियां सामने आनी बाकी हैं। क्वालकॉम ने अभी तक स्नैपड्रैगन C की सटीक NPU टॉप्स रेटिंग, कोर काउंट, या क्लॉक स्पीड को सार्वजनिक नहीं किया है । इन स्पेसिफिकेशन्स के बिना इसकी रॉ परफॉर्मेंस की तुलना, चाहे वह सबसे सस्ते स्नैपड्रैगन X प्लस चिप से हो या इंटेल के जंगली झील (Wildcat Lake) प्रोसेसर या मैकबुक नियो से, फिलहाल नामुमकिन है।
इससे भी ज्यादा जरूरी सवाल यह है कि आखिर 25,000 रुपये वाला यह विंडोज लैपटॉप असल जिंदगी में कैसा प्रदर्शन करेगा। इस कीमत पर आपको 8GB रैम और एक कम लागत वाला ARM प्रोसेसर मिल रहा है। अब यह देखना होगा कि क्या यह कॉम्बिनेशन बिना किसी रुकावट के तेज़ विंडोज 11 का अनुभव दे पाता है, या फिर यह नेटबुक जमाने की सुस्ती को दोहरा देता है । क्वालकॉम का बड़ा दांव इसी बात पर है कि चुपचाप चलने वाली और मैराथन बैटरी लाइफ वाली मशीनें खरीदारों का दिल जीत लेंगी—एक जुआ जिसका नतीजा तभी पता चलेगा, जब पहली रिव्यू यूनिट्स हम तक पहुंचेंगी।
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