बेंगलुरु स्थित Pixxel एक स्पेसटेक कंपनी है जो पृथ्वी-अवलोकन (Earth observation) के लिए इमेजिंग सैटेलाइट, उनके डेटा का विश्लेषण करने वाला सॉफ्टवेयर और वाणिज्यिक व संप्रभु ग्राहकों के लिए सैटेलाइट सिस्टम विकसित करती है। Google कंपनी के पहले के Series B निवेशकों में शामिल रहा है।
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7 सितंबर 2026 को Pixxel ने 10 करोड़ डॉलर की Series C फंडिंग जुटाने की घोषणा की। इस निवेश के बाद कंपनी की कुल फंडिंग 19.5 करोड़ डॉलर हो गई। कंपनी और Reuters के अनुसार, यह किसी भारतीय स्पेसटेक कंपनी द्वारा जुटाया गया सबसे बड़ा एकल फंडिंग राउंड है।
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Series C में किन निवेशकों ने भाग लिया?
इस राउंड का सह-नेतृत्व Temasek और Seraphim ने किया। नए निवेशकों में 360 ONE Asset और IMM Investment शामिल हैं। मौजूदा निवेशकों Radical Ventures और growX Ventures ने भी, अन्य निवेशकों के साथ, इसमें भाग लिया।
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Pixxel की तकनीक अलग कैसे है?
Pixxel ने शुरुआत हाइपरस्पेक्ट्रल Earth-imaging सैटेलाइट से की थी। हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग में सामान्य तस्वीर के लाल, हरे और नीले (RGB) चैनलों से कहीं अधिक प्रकाश-बैंड की जानकारी दर्ज की जाती है। इससे धरती पर मौजूद बदलावों या स्थितियों के ऐसे संकेत पहचाने जा सकते हैं जो सामान्य ऑप्टिकल तस्वीरों में उतनी स्पष्टता से नहीं दिखते।
कंपनी Firefly सैटेलाइट लॉन्च कर चुकी है। उसका अगली पीढ़ी का Honeybee बेड़ा Firefly सैटेलाइटों के साथ काम करने के लिए बनाया जा रहा है और इसमें विस्तारित शॉर्टवेव इन्फ्रारेड (SWIR) क्षमताएं होंगी।
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सैटेलाइट तस्वीरों से आगे: Earth Intelligence की रणनीति
Pixxel का लक्ष्य अब केवल हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन चलाना नहीं है। कंपनी खुद को “प्लैनेटरी इन्फ्रास्ट्रक्चर” कंपनी के रूप में पेश करती है और एडवांस्ड सेंसिंग सैटेलाइट, Earth-intelligence सॉफ्टवेयर, संप्रभु अंतरिक्ष प्रणालियों और सैटेलाइट निर्माण में विस्तार कर रही है।
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इस रणनीति का अहम हिस्सा Aurora है, जो Pixxel का Earth Observation Studio है और 2024 में सार्वजनिक रूप से लॉन्च हुआ था। इसका उद्देश्य हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा के विश्लेषण को अधिक सुलभ बनाना है—यानी केवल कच्ची सैटेलाइट इमेज उपलब्ध कराने के बजाय उनसे उपयोगी निष्कर्ष निकालने में मदद करना।
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Earth-observation के ग्राहकों को अक्सर पिक्सेल वाली इमेज फाइल नहीं, बल्कि किसी इलाके में बदलाव या किसी स्थिति की पहचान जैसे व्यावहारिक उत्तर चाहिए होते हैं। Pixxel सेंसिंग हार्डवेयर, डेटा उत्पादों और सिस्टम क्षमता के मेल से वाणिज्यिक तथा सरकारी ग्राहकों को यही परिचालन-स्तर की जानकारी उपलब्ध कराने पर काम कर रही है।
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10 करोड़ डॉलर का इस्तेमाल कहां होगा?
Pixxel के अनुसार, Series C की रकम उसके अगली पीढ़ी के Honeybee हाइपरस्पेक्ट्रल कॉन्स्टेलेशन के विकास, व्यापक इमेजिंग क्षमताओं और भारत व अमेरिका में सैटेलाइट उत्पादन बढ़ाने में लगाई जाएगी।
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निवेश Aurora और कंपनी के व्यापक डेटा प्लेटफॉर्म के विस्तार में भी मदद करेगा। व्यावहारिक रूप से Pixxel एक ऐसा एकीकृत Earth-observation कारोबार बनाना चाहती है जो कक्षा से डेटा जुटाए, सॉफ्टवेयर के जरिए उसे प्रोसेस करे और बदलती पृथ्वी की स्थितियों पर संस्थानों को उपयोगी विश्लेषण दे।
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इस फंडिंग राउंड का महत्व
10 करोड़ डॉलर की यह फंडिंग भारतीय स्पेसटेक के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। साथ ही, यह Pixxel के कारोबारी मॉडल की दिशा भी बताती है: कंपनी केवल सैटेलाइट ऑपरेटर के तौर पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष यान और इमेजिंग पेलोड से लेकर सॉफ्टवेयर व डेटा सेवाओं तक पूरे Earth-observation ढांचे में प्रतिस्पर्धा करना चाहती है।
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