कई रिपोर्टों के अनुसार, कुछ बड़ी टीमों में मैनेजरों को लगभग 15–20% कर्मचारियों को सबसे निचली प्रदर्शन श्रेणी में रखना पड़ सकता है, जिससे आगे चलकर प्रदर्शन‑आधारित छंटनी या कर्मचारियों पर नौकरी छोड़ने का दबाव बन सकता है।
समर्थकों का कहना है कि इससे कंपनियां उच्च मानक बनाए रखती हैं और कमजोर प्रदर्शन को जल्दी पहचान सकती हैं। लेकिन विरोधियों के मुताबिक इससे सहयोग की बजाय आंतरिक राजनीति और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
यह मुद्दा तब व्यापक चर्चा में आया जब पूर्व Meta इंजीनियर Jeremy Bernier ने सोशल मीडिया पर अपनी छंटनी के बारे में लिखा। उनकी पोस्ट तेजी से वायरल हो गई।
Bernier ने कहा कि कंपनी छोड़ना ऐसा लगा जैसे वह “आधुनिक सभ्यता में वापस आ गए हों।” उन्होंने Meta की stack‑ranking संस्कृति को “absolute cancer” बताया। उनके अनुसार, इस प्रणाली में कर्मचारी अक्सर उत्पाद बनाने से ज्यादा अपनी रैंकिंग बचाने की चिंता में लगे रहते हैं।
उन्होंने कार्य वातावरण की तुलना एक हाई‑स्टेक्स गेम से की—जहां हर कोई लगातार इस डर में रहता है कि अगली समीक्षा में उसका स्थान क्या होगा। कुछ ऑनलाइन चर्चाओं में इसे लोकप्रिय सीरीज़ “Squid Game” से भी तुलना की गई।
हालांकि यह एक व्यक्ति का अनुभव है, लेकिन तकनीकी उद्योग में इस तरह की आलोचनाएं पहले भी सामने आती रही हैं—जिससे यह पोस्ट कई कर्मचारियों के अनुभवों से मेल खाती दिखाई दी।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब Meta बड़े पैमाने पर पुनर्गठन कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी करीब 8,000 नौकरियां खत्म करने की तैयारी में है, ताकि संचालन को सरल बनाया जा सके और AI में निवेश बढ़ाया जा सके।
इससे पहले भी कुछ छंटनियों को “performance‑based cuts” के रूप में पेश किया गया था, जिसमें लगभग 5% कर्मचारियों को कम प्रदर्शनकर्ता बताते हुए हटाया गया।
2022 से अब तक Meta कई दौर की छंटनी कर चुकी है और कुल मिलाकर दसियों हजार नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। यह CEO मार्क ज़ुकरबर्ग की उस रणनीति का हिस्सा है जिसे उन्होंने “efficiency” पर जोर देने और नई तकनीकों—खासकर AI—में संसाधन लगाने के लिए शुरू किया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, छंटनी की घोषणा के बाद कंपनी के अंदर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। कई कर्मचारियों ने इसे चिंता, अनिश्चितता और थकान से भरा वातावरण बताया है।
कुछ कर्मचारियों का कहना है कि जब नौकरी जाने का खतरा सामने हो तो काम पर ध्यान बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। एक आंतरिक चर्चा में इस इंतजार की अवधि को “28 days of hell” तक कहा गया।
AI रणनीति से जुड़े दबाव भी बढ़ रहे हैं—इंजीनियरों से उम्मीद की जा रही है कि वे नए टूल तेजी से अपनाएं और पहले से तेज परिणाम दें।
Stack ranking केवल Meta तक सीमित नहीं है। पहले Microsoft और General Electric जैसी कंपनियों में भी इसी तरह की प्रणालियां इस्तेमाल की जा चुकी हैं। लेकिन आधुनिक टेक कंपनियों में इसके दुष्प्रभाव पर बहस तेज हो रही है।
आलोचकों की मुख्य शिकायतें आम तौर पर ये हैं:
कुछ कर्मचारियों ने यह भी कहा कि उन्हें पहले सकारात्मक प्रदर्शन रेटिंग मिली थी, फिर भी बाद में उन्हें कम प्रदर्शनकर्ता बताकर नौकरी से निकाल दिया गया।
Meta ने इन आरोपों से असहमति जताते हुए कहा है कि छंटनी को सही ठहराने के लिए प्रदर्शन रेटिंग को जानबूझकर कम नहीं किया गया।
Meta के आसपास का यह विवाद दरअसल पूरे टेक सेक्टर में हो रहे बदलाव को भी दिखाता है। लंबे समय तक तेज भर्ती और सुविधाओं के बाद अब कई कंपनियां लागत कम कर रही हैं और AI‑केंद्रित निवेश पर ध्यान दे रही हैं।
Blind जैसे पेशेवर मंचों और सोशल मीडिया पर चर्चाएं दिखाती हैं कि तकनीकी कर्मचारियों में नौकरी की स्थिरता और काम के दबाव को लेकर चिंता बढ़ रही है।
आखिरकार, सवाल सिर्फ Meta का नहीं है—बल्कि यह कि बड़ी टेक कंपनियां उच्च प्रदर्शन की अपेक्षा और स्वस्थ कार्य संस्कृति के बीच संतुलन कैसे बनाएँ। Meta की stack‑ranking बहस ने इस मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है।
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