तुर्किये के दक्षिणी तट पर केकोवा द्वीप के पास मिला समुद्री स्थल दुनिया के सबसे पुराने ज्ञात जहाज़-मलबों में से एक हो सकता है। वहां मिले मिट्टी के भंडारण-पात्रों की उम्र करीब 4,400–4,700 साल आंकी गई है। यह काल प्रारंभिक कांस्य युग का है—मोटे तौर पर वह समय जब मिस्र का विशाल पिरामिड बन रहा था। लेकिन जहाज़ की लकड़ी नहीं बची है, इसलिए यह अनुमान उसके माल की उम्र पर आधारित है, न कि जहाज़ की सीधी जांच पर।
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समुद्र की तलहटी से क्या मिला?
केकोवा द्वीप के पास, सतह से करीब 30 मीटर नीचे, पानी के भीतर हुई खुदाई में 30 से अधिक मिट्टी के भंडारण-पात्र मिले। ऐसे बड़े पात्रों को एम्फ़ोरा कहा जाता है। इनके साथ तीन पत्थर के लंगर भी मिले हैं।
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30 ये अवशेष बहुत पुराने समुद्री माल-परिवहन की ओर इशारा करते हैं, हालांकि जहाज़ का ढांचा खुद लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
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मिले एम्फ़ोरा के दो हत्थे, बीच में उभरी पट्टी और सपाट तली बताई गई है। उनका आकार मिस्र और मध्य पूर्व के उन पात्रों से मिलता-जुलता है जिन्हें इसी व्यापक कालखंड का माना जाता है।
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उम्र का अनुमान कैसे लगाया गया?
शोधकर्ताओं ने पात्रों के आकार और बनावट की तुलना दूसरे पुरातात्विक स्थलों से मिले मिट्टी के बर्तनों से की। शोध में शामिल एक विशेषज्ञ ने इसकी संभावित तारीख लगभग 2700–2400 ईसा पूर्व बताई है; अन्य खबरों में इसे 4,400–4,700 साल पुराना बताया गया है।
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लकड़ी का ढांचा न बचने के कारण जहाज़ की लकड़ी पर रेडियोकार्बन डेटिंग नहीं की जा सकी। इसलिए पात्रों की तुलना से मिली तारीख पुरातात्विक अनुमान है—यह ठीक-ठीक नहीं बताती कि जहाज़ कब डूबा।
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30 इस अनुमान के अनुसार मलबा प्रारंभिक कांस्य युग का है और मिस्र के महान पिरामिड के निर्माण के आसपास के समय का हो सकता है।
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कुछ रिपोर्टों में इसकी तुलना ग्रीस के लगभग 4,200 साल पुराने डोकोस मलबे से की गई है और केकोवा स्थल को उससे पुराना बताया गया है। हालांकि यह तुलना दोनों स्थलों की तारीख तय करने के तरीकों पर निर्भर करती है, और केकोवा की काल-निर्धारण संबंधी जानकारी अभी अनुमानित है।
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माल से क्या पता चलता है—और क्या नहीं?
एम्फ़ोरा से पता चलता है कि उस दौर में सामान समुद्र के रास्ते ले जाया जाता था। इनमें जैतून का तेल या शराब हो सकती थी, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टें हर पात्र की सामग्री की पुष्टि नहीं करतीं।
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6 कुछ विवरणों में मिले बर्तनों के भीतर चमकदार अवशेष का भी उल्लेख है; आगे की जांच से इनके बारे में संकेत मिल सकते हैं।
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एक पात्र में दो छेद और नौ निशान हैं। तुर्किये के संस्कृति और पर्यटन मंत्री मेहमत नूरी एरसोय ने सुझाव दिया कि इसका इस्तेमाल पनीर या मक्खन बनाने के लिए हुआ होगा। यह उस असामान्य पात्र की एक संभावित व्याख्या है, जहाज़ पर जीवन का पक्का प्रमाण नहीं।
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स्थल पर तीन पत्थर के लंगर भी मिले हैं। वे पुरातात्विक तस्वीर का हिस्सा हैं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टें यह साबित नहीं करतीं कि हर लंगर इसी जहाज़ का था या उसका इस्तेमाल किस तरह हुआ।
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‘दुनिया का सबसे पुराना’ कहने में सावधानी क्यों?
यह खोज इसलिए अहम है क्योंकि मिट्टी के पात्र समुद्री यात्रा के बेहद शुरुआती दौर की ओर संकेत करते हैं। फिर भी किसी मलबे को ‘दुनिया का सबसे पुराना’ कहना इस बात पर निर्भर करता है कि जहाज़-मलबे की पहचान और उसकी तारीख कैसे तय की गई। केकोवा में जहाज़ का ढांचा नहीं बचा और प्रस्तावित उम्र दूसरे स्थलों के पात्रों से तुलना पर आधारित है।
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फिलहाल सबसे सावधान निष्कर्ष यही है कि केकोवा में दुनिया के सबसे पुराने ज्ञात समुद्री जहाज़-मलबों में से एक हो सकता है। इसकी अनुमानित उम्र, प्रारंभिक कांस्य युग से संबंध और मिले माल की जानकारी रिपोर्ट की गई है; लेकिन डूबने की सटीक तारीख और विश्व-रिकॉर्ड का निर्णायक दर्जा अभी स्थापित नहीं हुआ है।