रूस की संघीय राज्य सांख्यिकी सेवा—रोसस्टैट—ने कहा कि 29 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 के बीच उसके सूचना संसाधनों पर साइबर हमले हुए। एजेंसी के मुताबिक, उसे डेटाबेस में सेंध या कानूनी रूप से संरक्षित जानकारी के लीक होने के सबूत नहीं मिले। दूसरी ओर, बेलारूसी साइबर पार्टिज़न्स और यूक्रेन-समर्थक समूह साइलेंट क्रो ने कहीं बड़े स्तर पर नेटवर्क में घुसपैठ करने का दावा किया है। डेटा चोरी और नुकसान के उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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रोसस्टैट ने क्या पुष्ट किया?
रोसस्टैट ने हमलों को सावधानी से तैयार किया गया बताया। उसके अनुसार, कई क्षेत्रों को एक साथ निशाना बनाया गया। खबरों में यह भी दर्ज किया गया कि एजेंसी की वेबसाइटों पर दोनों समूहों के लोगो और बेलारूसी भाषा में एक संदेश दिखा, जिसका अनुवाद है—“कोई भी जिम्मेदारी से नहीं बच पाएगा।”
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इससे हमले और वेबसाइटों पर संदेश दिखने की बात पुष्ट होती है, लेकिन यह अपने आप में रोसस्टैट के आंतरिक सिस्टम तक पहुंच की सीमा नहीं बताता। डेटाबेस में सेंध या संरक्षित जानकारी के लीक होने के सबूत न मिलने की बात एजेंसी का अपना बयान है; इससे हैकर समूहों के अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
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हैकर समूहों का दावा क्या है?
साइबर पार्टिज़न्स और साइलेंट क्रो ने कहा कि उन्होंने रोसस्टैट के मुख्यालय, क्षेत्रीय इकाइयों और प्रमुख अंतरक्षेत्रीय डेटा-प्रोसेसिंग केंद्र में करीब 25,000 कंप्यूटरों पर नियंत्रण हासिल किया। उनका दावा है कि उन्होंने लगभग 23 टेराबाइट जानकारी निकाली और एजेंसी के आंतरिक आईटी ढांचे को नुकसान पहुंचाया या नष्ट कर दिया।
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समूहों ने यह भी कहा कि कथित तौर पर निकाली गई सामग्री में यूक्रेन में रूस के सैन्य नुकसान से जुड़ी जानकारी थी। लेकिन उपलब्ध खबरें स्वतंत्र रूप से यह साबित नहीं करतीं कि डेटा वास्तव में चुराया गया, उसमें क्या था या आईटी ढांचे को कितना नुकसान हुआ।
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वेबसाइट पर हैकरों के संदेश या लोगो दिखना सार्वजनिक वेबसाइटों पर असर का संकेत है। इससे अकेले यह साबित नहीं होता कि हजारों कंप्यूटरों पर नियंत्रण मिला या किसी खास मात्रा में डेटा निकाला गया। इसलिए रोसस्टैट द्वारा स्वीकार किए गए हमले और समूहों के व्यापक दावों के बीच फर्क बनाए रखना अहम है।
कथित डेटा को लेकर दिलचस्पी क्यों है?
हमले से जुड़ी खबरों के मुताबिक, रोसस्टैट ने 2024 में मृत्यु के कारणों का सालाना विवरण प्रकाशित करना बंद कर दिया था।
12 ऐसे में सैन्य मौतों से संबंधित रिकॉर्ड का दावा ध्यान खींचता है। लेकिन यदि कोई रिकॉर्ड सामने आता भी है, तो उसका महत्व इस बात पर निर्भर करेगा कि वह कितना पूरा है और उसमें जानकारी को किस तरह वर्गीकृत किया गया है। समूहों का सामान्य दावा यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं कि सामग्री से हताहतों की प्रमाणित संख्या पता चलती है।
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फिलहाल सबसे ठोस निष्कर्ष
उपलब्ध जानकारी से इतना कहा जा सकता है कि रोसस्टैट ने कई दिनों तक चले, समन्वित और सावधानी से तैयार किए गए साइबर हमलों की पुष्टि की। एजेंसी ने बताया कि उसे डेटाबेस में सेंध या कानूनी रूप से संरक्षित जानकारी लीक होने के सबूत नहीं मिले। हैकर समूहों के नेटवर्क तक व्यापक पहुंच, डेटा चोरी और नुकसान के दावे—जिनमें 23 टेराबाइट का आंकड़ा भी शामिल है—उपलब्ध रिपोर्टिंग में स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
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