यह विवरण किसी स्वास्थ्य सूत्र की शुरुआती जानकारी पर आधारित है; इसे हमले की अंतिम या स्वतंत्र रूप से प्रमाणित पुनर्रचना नहीं माना जा सकता। अफगानिस्तान के Directorate of Mine Action Coordination ने घटनास्थल की जांच के बाद ग्रेनेड विस्फोट की पुष्टि की, जो काबुल पुलिस से जुड़ी शुरुआती जानकारी के अनुरूप है।
घटना के शुरुआती घंटों में सामने आए आंकड़े अलग-अलग थे:
इन आंकड़ों में अंतर शुरुआती गिनती बदलने, अस्पतालों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली अलग-अलग सूचनाओं या “घायलों” की अलग परिभाषाओं की वजह से हो सकता है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में संयुक्त राष्ट्र का उम्र-आधारित आंकड़ा सबसे स्पष्ट बाद का आकलन है, लेकिन इससे घायलों की कुल संख्या पूरी तरह तय नहीं होती।
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि विस्फोट के पीछे इस्लामिक स्टेट या उससे जुड़े समूह हो सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जांच चल रही है और तालिबान की सुरक्षा एजेंसियां जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही हैं। यह बयान एक संभावना का उल्लेख करता है, पुष्ट जिम्मेदारी का नहीं।
इस्लामिक यूनिटी पार्टी ऑफ द पीपल ऑफ अफगानिस्तान के नेता मोहम्मद मोअक्केक ने विस्फोट की निंदा करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। उनकी प्रतिक्रिया में तालिबान को सुरक्षा नियंत्रित करने वाले वास्तविक सत्ताधारी पक्ष के रूप में जिम्मेदार बताया गया—यह एक राजनीतिक आरोप है, स्थापित जांच-निष्कर्ष नहीं।
दश्त-ए-बरची पश्चिमी काबुल का मुख्यतः हजारा और शिया आबादी वाला इलाका है। धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ यहां पहले भी हिंसक हमले हो चुके हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत यानी ISKP, जो अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट से संबद्ध संगठन है, ने हजारा और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को स्कूलों, मस्जिदों और कार्यस्थलों पर बार-बार निशाना बनाया है।
इस इलाके के हालिया इतिहास में 2021 में सैयद उल-शुहदा गर्ल्स स्कूल के पास हुआ बम धमाका और 2022 में अब्दुल रहीम शाहिद हाई स्कूल में हुआ विस्फोट शामिल हैं। ये घटनाएं इस बात का संदर्भ देती हैं कि जांच में ISKP की भूमिका पर सवाल क्यों उठ रहे हैं, लेकिन वे शाम-ए-हेदयात स्कूल विस्फोट के लिए ISKP की जिम्मेदारी साबित नहीं करतीं।
अफगानिस्तान में मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले इस “घृणित हमले” की निंदा की और कहा कि जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे तक लाने के लिए पूरी और स्वतंत्र जांच जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) ने भी विस्फोट की परिस्थितियों की जांच का आह्वान किया। इन अपीलों के पीछे मुख्य सवाल यही है: ग्रेनेड की पहचान हो चुकी है, लेकिन यह सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हुआ कि उसे किसने फेंका, स्कूल को जानबूझकर निशाना बनाया गया था या किसी संगठन ने हमले का निर्देश दिया था।
यह विस्फोट 17 अगस्त को हुआ—15 अगस्त 2021 को काबुल पर तालिबान के दोबारा कब्जे की पांचवीं बरसी के दो दिन बाद। इस बरसी के मौके पर विदेशों के कई शहरों में तालिबान की मानवाधिकार नीतियों की आलोचना करते हुए विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे।
यह घटना का राजनीतिक संदर्भ जरूर है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बरसी, विरोध-प्रदर्शनों या उनसे जुड़े किसी पक्ष ने स्कूल विस्फोट को अंजाम दिया या उसका निर्देशन किया।
उपलब्ध साक्ष्य से इतना कहा जा सकता है कि स्कूल में ग्रेनेड विस्फोट हुआ और कम से कम 42 बच्चे घायल हुए। लेकिन अभी यह स्थापित नहीं हुआ है कि:
फिलहाल सबसे जिम्मेदार निष्कर्ष यही है: काबुल के एक स्कूल में बच्चों को गंभीर रूप से घायल करने वाला ग्रेनेड विस्फोट हुआ है, लेकिन हमलावर और मकसद की पुष्टि अभी बाकी है।