2026 के युद्ध के दौरान ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को पूरी तरह नहीं खोला है; वह परमिट सिस्टम और चयनात्मक अनुमति के जरिए जहाज़ों की आवाजाही नियंत्रित कर रहा है। चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान और इराक जैसे देशों के जहाज़ों को गुजरने दिया गया है, जबकि अमेरिका या इज़राइल से जुड़े जहाज़ों पर प्रतिबंध लगाया गया है। अमेरिका से...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is Iran’s current policy on controlling the Strait of Hormuz during the ongoing war, which countries are being allowed to pass, what co. Article summary: Iran is trying to control passage through the Strait of Hormuz rather than fully reopen it, using a prior-permit system and selectively allowing some traffic, especially Chinese ships. Evidence is limited and partly come. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "List of Countries Allowed by Iran to Pass Through Strait of Hormuz · Russia, China, India, Pakistan, and Iraq · Malaysia · Thailand · Bangladesh." source context "List of Countries Allowed by Iran to Pass Through Strait of Hormuz - World En.tempo.co" Reference image 2: visual subject "List of Countries Allowed by
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को तुरंत प्रभावित करता है।
2026 में ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच युद्ध भड़कने के बाद यह जलडमरूमध्य संघर्ष का प्रमुख केंद्र बन गया। शुरुआत में ईरान ने यहां से गुजरने वाली शिपिंग को कड़े तरीके से रोक दिया, जिसके जवाब में 19 मार्च 2026 को अमेरिका ने ईरानी ठिकानों के खिलाफ हवाई अभियान शुरू किया ताकि अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों के लिए मार्ग दोबारा खोला जा सके।
यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के लिए मुख्य समुद्री रास्ता है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया के लगभग पाँचवें हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंचता है।
इस वजह से यहां किसी भी तरह का अवरोध तुरंत तेल कीमतों, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर असर डालता है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने के बजाय नियंत्रित आवागमन (controlled access) की नीति अपनाई है।
इसके तहत तेहरान ने एक “पूर्व‑अनुमति परमिट प्रणाली” लागू की है, जिसके तहत किसी भी जहाज़ को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजरने से पहले ईरानी अधिकारियों से अनुमति लेनी होती है। यह व्यवस्था जहाज़ों के लिए विस्तृत नियमों और निर्देशों के साथ लागू की गई है।
इस रणनीति से ईरान दो लक्ष्य साधने की कोशिश कर रहा है:
यानी रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन कौन गुजर सकता है और कैसे—यह फैसला ईरान कर रहा है।
समुद्री निगरानी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान मुख्यतः उन देशों के जहाज़ों को गुजरने दे रहा है जिन्हें वह राजनीतिक रूप से तटस्थ या मित्र मानता है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
इसके विपरीत, अमेरिका या इज़राइल से जुड़े जहाज़ों पर प्रतिबंध या रोक लगाई गई है, जो मौजूदा सैन्य टकराव को दर्शाता है।
चीन के जहाज़ों को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 30 चीनी जहाज़ों को ईरान के प्रबंधन प्रोटोकॉल के तहत गुजरने की अनुमति दी गई।
इस चयनात्मक नीति के जरिए तेहरान यह संदेश भी देना चाहता है कि जो देश उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं करते, वे व्यापार जारी रख सकते हैं।
तेहरान ने इस समुद्री संकट को कूटनीतिक दबाव के साधन के रूप में भी इस्तेमाल किया है। ईरान की अर्ध-आधिकारिक फ़ार्स समाचार एजेंसी के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिका के साथ नई वार्ता शुरू करने से पहले पाँच “विश्वास निर्माण” शर्तें पूरी करनी होंगी।
ये शर्तें बताई जाती हैं:
ईरान का कहना है कि ये बातचीत शुरू करने के लिए न्यूनतम गारंटी हैं।
ईरान की इस नीति के जवाब में अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों ने सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर कदम उठाए हैं।
सैन्य स्तर पर, अमेरिका ने जहाज़ों की सुरक्षा और ईरान की नाकाबंदी क्षमता को कमजोर करने के लिए अभियान शुरू किया।
कूटनीतिक मोर्चे पर, अमेरिका और कई खाड़ी देशों—जैसे बहरीन, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात—ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव का मसौदा पेश किया है। इसमें ईरान से मांग की गई है कि वह:
प्रस्ताव में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि समुद्री मार्ग की स्वतंत्रता बहाल नहीं होती तो ईरान पर प्रतिबंध या अन्य कदम उठाए जा सकते हैं।
वर्तमान स्थिति एक तरह के अस्थिर संतुलन जैसी है। जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन उस पर भारी राजनीतिक और सैन्य दबाव बना हुआ है।
ईरान चयनात्मक अनुमति और नियामकीय नियंत्रण के जरिए अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी पूरी तरह मुक्त नौवहन (freedom of navigation) बहाल करवाना चाहते हैं।
क्योंकि दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इस टकराव का परिणाम केवल युद्ध की दिशा ही नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में वैश्विक तेल बाज़ार और समुद्री सुरक्षा नीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।
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2026 के युद्ध के दौरान ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को पूरी तरह नहीं खोला है; वह परमिट सिस्टम और चयनात्मक अनुमति के जरिए जहाज़ों की आवाजाही नियंत्रित कर रहा है।
2026 के युद्ध के दौरान ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को पूरी तरह नहीं खोला है; वह परमिट सिस्टम और चयनात्मक अनुमति के जरिए जहाज़ों की आवाजाही नियंत्रित कर रहा है। चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान और इराक जैसे देशों के जहाज़ों को गुजरने दिया गया है, जबकि अमेरिका या इज़राइल से जुड़े जहाज़ों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
अमेरिका से नई बातचीत शुरू करने के लिए ईरान ने पाँच शर्तें रखी हैं—युद्ध समाप्त करना, प्रतिबंध हटाना, जमे हुए ईरानी धन को जारी करना, युद्ध क्षतिपूर्ति और स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता।