Huawei का प्रस्ताव इस सोच को थोड़ा बदल देता है। कंपनी कहती है कि भविष्य में असली प्रगति का पैमाना सिर्फ आकार नहीं बल्कि समय (τ) होना चाहिए।
सरल शब्दों में:
अगर चिप के अंदर सिग्नल तेजी से एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुँचते हैं, तो पूरा सिस्टम तेज़ और अधिक कुशल बन सकता है—भले ही मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया बहुत ज्यादा छोटी न हुई हो।
Huawei के अनुसार, सिग्नल propagation delay को कम करने से चिप की प्रभावी क्षमता बढ़ सकती है और ट्रांजिस्टर डेंसिटी का बेहतर उपयोग संभव हो सकता है।
Tau Scaling को लागू करने के लिए Huawei ने LogicFolding नाम का डिज़ाइन तरीका भी पेश किया है।
इसका मुख्य विचार है कि चिप के अंदर लॉजिक ब्लॉक्स को इस तरह व्यवस्थित किया जाए कि उनके बीच की वायरिंग दूरी कम हो जाए।
जब तारों की दूरी छोटी होती है:
Huawei का कहना है कि 2026 में आने वाले Kirin प्रोसेसर इस LogicFolding आर्किटेक्चर का उपयोग करने वाले पहले चिप हो सकते हैं।
यह सोच पूरी तरह नई नहीं है—आजकल चिप उद्योग में advanced packaging, chiplets और आर्किटेक्चर ऑप्टिमाइज़ेशन जैसी तकनीकों में भी इसी तरह डिज़ाइन‑आधारित सुधार पर जोर दिया जा रहा है।
हालाँकि Tau Scaling को सार्वजनिक रूप से 2026 में घोषित किया गया, Huawei का कहना है कि यह अवधारणा कंपनी के अंदर पहले से इस्तेमाल हो रही थी।
कंपनी के अनुसार पिछले छह वर्षों में उसने 381 चिप्स इसी सिद्धांत के आधार पर डिज़ाइन और बड़े पैमाने पर तैयार किए हैं, जिनका उपयोग स्मार्टफोन और AI कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में हुआ है।
हालाँकि इन चिप्स की तकनीकी जानकारी अभी तक पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई है।
Huawei का सबसे बड़ा दावा यह है कि Tau Scaling और LogicFolding की मदद से वह 2031 तक ऐसे चिप डिज़ाइन कर सकता है जिनकी ट्रांजिस्टर डेंसिटी 1.4‑nanometre प्रोसेस के बराबर हो।
यह समझना जरूरी है कि इसका मतलब यह नहीं है कि चिप वास्तव में 1.4‑nm तकनीक पर बनाए जाएंगे।
कंपनी का कहना है कि आर्किटेक्चर और डिज़ाइन सुधार से समान स्तर का प्रदर्शन या डेंसिटी हासिल की जा सकती है, भले ही असली निर्माण प्रक्रिया थोड़ी बड़ी हो।
तुलना के लिए:
इस हिसाब से Huawei का लक्ष्य कुछ साल पीछे हो सकता है, लेकिन कंपनी का दावा है कि डिज़ाइन नवाचार से तकनीकी अंतर कम किया जा सकता है।
यह घोषणा ऐसे समय आई है जब चीन के सेमीकंडक्टर उद्योग को उन्नत चिप‑निर्माण उपकरणों तक पहुँच पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है।
इसलिए Huawei की रणनीति एक व्यापक दिशा को दिखाती है—केवल मैन्युफैक्चरिंग नोड पर निर्भर रहने के बजाय आर्किटेक्चर और सिस्टम डिज़ाइन से प्रगति करना।
अगर यह रणनीति सफल होती है, तो इससे:
फिलहाल Tau Scaling और LogicFolding के बारे में कई तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए विशेषज्ञों के लिए यह अभी एक उभरती डिज़ाइन फिलॉसफी और रोडमैप की तरह है, न कि पूरी तरह सिद्ध तकनीकी बदलाव।
फिर भी संदेश साफ है: यदि ट्रांजिस्टर को छोटा करना धीमा पड़ रहा है, तो चिप आर्किटेक्चर और सिग्नल टाइमिंग का अनुकूलन भविष्य में प्रदर्शन बढ़ाने का बड़ा रास्ता बन सकता है।