इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की गई थी और नागरिकों व नागरिक ढांचे पर हमले रोकने के साथ‑साथ क्षेत्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करने की मांग की गई थी।
यूएई का कहना है कि इस प्रस्ताव के बावजूद हमले और समुद्री व्यवधान जारी हैं। इसलिए सुरक्षा परिषद को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और नागरिक ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिक ठोस कदम उठाने चाहिए।
खाड़ी देशों के लिए यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है—उनका तर्क है कि यदि प्रस्ताव पारित हों लेकिन लागू न किए जाएँ, तो अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर पड़ जाता है और वैश्विक व्यापार असुरक्षित हो जाता है।
मई के मध्य में सुरक्षा चिंताएँ और बढ़ गईं जब यूएई के बाराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास ड्रोन हमले की खबर सामने आई।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने कहा कि 17 मई को हुए एक ड्रोन हमले से संयंत्र की परिधि के भीतर एक विद्युत जनरेटर में आग लगने की रिपोर्ट से वे "गहराई से चिंतित" हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि परमाणु प्रतिष्ठानों के आसपास किसी भी प्रकार का हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और पूरी तरह अस्वीकार्य है।
हालांकि इस घटना से कोई परमाणु आपात स्थिति पैदा नहीं हुई, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो गया कि क्षेत्रीय संघर्ष महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे को खतरे में डाल सकता है।
इस संकट का सबसे तात्कालिक असर समुद्री व्यापार पर पड़ा है।
संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के अनुसार लगभग 20,000 नाविक फारस की खाड़ी में जहाजों पर फंसे हुए हैं क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलना संभव नहीं हो पा रहा। एजेंसी ने इसे एक "अभूतपूर्व" मानवीय स्थिति बताया है।
सैन्य और समुद्री स्रोतों के अनुमान के मुताबिक संकट के दौरान लगभग 87 देशों के 1,550 जहाज फारस की खाड़ी में फंस गए हैं। यह स्थिति वैश्विक व्यापार में बड़े व्यवधान का संकेत देती है।
बीमा कंपनियाँ और शिपिंग कंपनियाँ लगातार हमलों और सैन्य तनाव के कारण इस मार्ग से जहाज भेजने से बच रही हैं।
यह संकट केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं है—इसका असर कृषि पर भी पड़ रहा है।
सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग एक‑तिहाई उर्वरक शिपमेंट होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरते हैं। अब जब जहाज फंसे हुए हैं या मार्ग अवरुद्ध है, तो किसानों को समय पर उर्वरक मिलना मुश्किल हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो दसियों लाख लोगों को भूख का खतरा हो सकता है—खासकर अफ्रीका और एशिया के उन क्षेत्रों में जहाँ पहले से खाद्य असुरक्षा अधिक है।
खाद्य एजेंसियों का कहना है कि उर्वरक की कमी आने वाले महीनों में कम फसल उत्पादन और वैश्विक खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी का कारण बन सकती है।
संकट को हल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में कई आपात बैठकें और वार्ताएँ हुईं, लेकिन अभी तक ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
होर्मुज़ में नौवहन सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद में बहुमत का समर्थन मिला था, लेकिन चीन और रूस ने वीटो का इस्तेमाल कर इसे रोक दिया।
प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क था कि इससे जहाजों पर हमलों को रोकने और समुद्री यातायात बहाल करने में मदद मिलती। वहीं रूस और चीन का कहना था कि प्रस्ताव में संघर्ष के मूल कारणों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया और इससे तनाव और बढ़ सकता था।
इस वीटो के बाद सुरक्षा परिषद में गहरा मतभेद दिखाई दिया है और सामूहिक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई करना मुश्किल हो गया है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का टकराव कई आपस में जुड़े जोखिमों को जन्म दे रहा है:
जब तक समुद्री यातायात सामान्य नहीं होता और कूटनीतिक गतिरोध खत्म नहीं होता, तब तक इस संकट का असर ऊर्जा बाजारों, वैश्विक व्यापार और खाद्य सुरक्षा पर पड़ता रहने की आशंका बनी रहेगी।
दूसरे शब्दों में, यह संकट अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहा—इसके प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और खाद्य प्रणाली तक पहुँच सकते हैं।
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