जहाँ सीमित ट्रांजिट की अनुमति है भी, वहाँ जहाज़ों की संख्या सामान्य स्तर से काफी कम है और ट्रैफिक कड़े नियंत्रण में चल रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार में एक तरह का bottleneck बन गया है।
सबसे तात्कालिक असर शिपिंग लागत पर पड़ा है। कंटेनर और टैंकर दोनों के लिए फ्रेट रेट बढ़ गए हैं, क्योंकि जहाज़ों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है या उन्हें समुद्र में सुरक्षा अनुमति का इंतज़ार करना पड़ रहा है।
इसके अलावा युद्ध जोखिम (war‑risk) बीमा प्रीमियम भी काफी बढ़ गए हैं। जहाज़ मालिकों को मिसाइल, ड्रोन या छोटी नौकाओं से संभावित हमलों का जोखिम उठाना पड़ रहा है।
कई शिपिंग कंपनियों ने अतिरिक्त शुल्क जोड़ दिए हैं, जैसे:
कई वैश्विक शिपिंग ऑपरेटर अब हॉर्मुज़ से गुजरने के जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ जहाज़ खाड़ी के बंदरगाहों में जाना ही टाल रहे हैं, जबकि कुछ सुरक्षित स्थानों पर माल उतारकर आगे भेज रहे हैं।
पहले जहाँ जहाज़ सीधे दुबई के जेबेल अली या सऊदी अरब के दम्माम जैसे बड़े बंदरगाहों तक जाते थे, अब कई कंटेनर खाड़ी के प्रवेश के पास या आसपास के सुरक्षित बंदरगाहों पर उतारे जा रहे हैं।
इसके बाद माल को छोटे जहाज़ों या ज़मीनी परिवहन से अंतिम गंतव्य तक भेजा जाता है। इससे पारंपरिक समुद्री व्यापार पैटर्न पूरी तरह बदल गया है।
लॉजिस्टिक्स कंपनियां अब ओमान और आसपास के अपेक्षाकृत सुरक्षित बंदरगाहों की ओर शिपमेंट मोड़ रही हैं। वहां से माल ट्रकों या क्षेत्रीय समुद्री नेटवर्क के जरिए खाड़ी के बाज़ारों तक पहुंचाया जा रहा है।
इससे एक अस्थायी "हब‑एंड‑ट्रक" मॉडल बन गया है। पहले जो कंटेनर सीधे खाड़ी बंदरगाहों पर उतरते थे, अब वे दूसरे हब पर उतरकर ट्रकों से अंदरूनी इलाकों तक भेजे जा रहे हैं।
हालाँकि यह व्यवस्था व्यापार को जारी रखने में मदद करती है, लेकिन अतिरिक्त हैंडलिंग और देरी से लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं।
इस संकट के दौरान ज़मीनी परिवहन सबसे महत्वपूर्ण अस्थायी समाधान बनकर उभरा है। लॉजिस्टिक्स कंपनियां ओमान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के रास्तों से ट्रकों द्वारा सामान खाड़ी के बाज़ारों तक पहुंचा रही हैं।
इन मार्गों से मुख्य रूप से भेजे जा रहे सामान में शामिल हैं:
लेकिन ट्रकिंग समुद्री शिपिंग का पूर्ण विकल्प नहीं बन सकती। सड़क क्षमता, ड्राइवरों की उपलब्धता, सीमा प्रक्रियाएँ, ईंधन लागत और परमिट जैसी बाधाएँ इसकी सीमा तय करती हैं।
इसलिए ट्रकिंग मुख्यतः आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने का अस्थायी उपाय है।
जहाँ संभव है, वहाँ कुछ माल क्षेत्रीय रेल नेटवर्क के जरिए भी भेजा जा रहा है। सरकारें और लॉजिस्टिक्स कंपनियां वैकल्पिक बंदरगाहों से अंदरूनी इलाकों तक रेल मार्गों का उपयोग करने की कोशिश कर रही हैं।
फिर भी खाड़ी क्षेत्र में रेल नेटवर्क अभी भी समुद्री परिवहन की तुलना में काफी सीमित और बिखरा हुआ है। कंटेनर, कच्चा तेल, LNG और पेट्रोकेमिकल्स की जो विशाल मात्रा सामान्यतः समुद्र से जाती है, उसे रेल नेटवर्क संभाल नहीं सकता।
खाड़ी की कई अर्थव्यवस्थाएँ आयात पर काफी निर्भर हैं। इसलिए सरकारें सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए हस्तक्षेप कर रही हैं और खाद्य पदार्थ, दवाइयाँ और ईंधन जैसे जरूरी सामानों को प्राथमिकता दे रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस व्यवधान का असर मध्य पूर्व से बाहर वैश्विक बाजारों और मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ रहा है।
ईरान ने भी हॉर्मुज़ में जहाज़ों की आवाजाही पर नियंत्रण बढ़ाने के कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने जहाज़ों के ट्रैफिक को प्रबंधित करने और संभवतः ट्रांजिट शुल्क लगाने के लिए एक नई प्रणाली पर विचार किया है।
साथ ही, ईरान अपने घरेलू और क्षेत्रीय ज़मीनी व्यापार मार्गों को भी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है ताकि व्यापार को कुछ हद तक जारी रखा जा सके।
सबसे बड़ी चुनौती क्षमता की है। समुद्री शिपिंग बहुत बड़ी मात्रा में माल को कम जहाज़ों में ढो सकती है। एक बड़ा कंटेनर जहाज़ या तेल टैंकर उतना माल ले जाता है जितना कई ट्रकों या ट्रेनों से ही संभव हो सकता है।
यदि इस समुद्री क्षमता को ज़मीनी मार्गों से बदलना पड़े तो जरूरत पड़ती है:
इसलिए मौजूदा वैकल्पिक नेटवर्क जरूरी सामानों की आपूर्ति बनाए रख सकता है, लेकिन वह सामान्य हॉर्मुज़ शिपिंग की गति, क्षमता और लागत दक्षता की बराबरी नहीं कर सकता।
इस संकट ने खाड़ी की लॉजिस्टिक्स प्रणाली को पारंपरिक "जस्ट‑इन‑टाइम" समुद्री मॉडल से हटाकर एक आपातकालीन, बहु‑मार्गीय नेटवर्क में बदल दिया है। माल अभी भी पहुंच रहा है, लेकिन धीमी गति से और कहीं अधिक लागत पर।
दुनिया भर में इसका असर बढ़ते फ्रेट रेट, महंगे बीमा, ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और लंबी डिलीवरी टाइमलाइन के रूप में दिख रहा है। जब तक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य संचालन में नहीं लौटता, वैश्विक व्यापार को इस महत्वपूर्ण bottleneck के साथ ही काम करना पड़ेगा।
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