हालिया संकट के दौरान तनाव बढ़ने से जहाजरानी में भारी गिरावट आई। कई अवधियों में टैंकर ट्रैफिक में लगभग 70% तक गिरावट आई और दर्जनों जहाज सुरक्षा जोखिम के कारण जलडमरूमध्य के बाहर इंतजार करते रहे ।
ऐसे में यदि सिर्फ कुछ टैंकरों के सुरक्षित पार होने की खबर भी आती है, तो बाजारों की उम्मीदें तेजी से बदल सकती हैं। यही हुआ—जब जहाजों के गुजरने और वार्ता में प्रगति की खबर आई, तो तेल की कीमतों में शामिल भू‑राजनीतिक “रिस्क प्रीमियम” कम होने लगा।
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वार्ता अंतिम चरण में है, तो तेल बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। एक ही सत्र में कच्चे तेल की कीमत लगभग 6% गिर गई ।
कम तेल कीमतों का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था में फैलता है:
इसी कारण एशियाई शेयर बाजारों में तेजी आई, खासकर उन अर्थव्यवस्थाओं में जो ऊर्जा आयात पर ज्यादा निर्भर हैं ।
सरकारी बॉन्ड भी मजबूत हुए क्योंकि कम तेल कीमतों से महंगाई कम रहने की उम्मीद बढ़ती है। यदि निवेशकों को लगता है कि महंगाई कम होगी, तो वे बॉन्ड खरीदने में अधिक रुचि दिखाते हैं—क्योंकि तब केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बहुत ज्यादा ऊंची रखने की जरूरत नहीं पड़ सकती।
सकारात्मक संकेतों के बावजूद एक बड़ा सवाल अभी भी बाकी है—ईरान का परमाणु कार्यक्रम।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी आकलनों के अनुसार ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम है जिसे करीब 60% तक समृद्ध किया गया है । यह स्तर हथियार‑ग्रेड (लगभग 90%) से ज्यादा दूर नहीं माना जाता।
माना जाता है कि इस सामग्री का बड़ा हिस्सा इस्फहान परमाणु परिसर में रखा हुआ है, जैसा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के आकलनों में कहा गया है ।
यह भंडार वार्ता में केंद्रीय मुद्दा बन गया है क्योंकि इससे तथाकथित “ब्रेकआउट जोखिम” जुड़ा है—यानी यह आशंका कि यदि संवर्धन और बढ़ाया गया तो हथियार‑ग्रेड सामग्री अपेक्षाकृत जल्दी बनाई जा सकती है।
इसी कारण कुछ प्रस्तावों में यूरेनियम को हटाने, संवर्धन पर सीमा लगाने या अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण को मजबूत करने जैसी मांगें शामिल बताई जाती हैं । इन मुद्दों पर सहमति के बिना व्यापक शांति समझौता करना मुश्किल हो सकता है।
अभी की बाजार स्थिति को सबसे अच्छे तरीके से “सावधानी भरी आशावादिता” कहा जा सकता है।
निवेशक सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं क्योंकि:
लेकिन कुछ जोखिम ऐसे हैं जो बाजार की तेजी को पलट सकते हैं:
अगर बातचीत टूट जाती है, तो तेल की कीमतें फिर तेजी से ऊपर जा सकती हैं—जिससे वैश्विक महंगाई, केंद्रीय बैंक नीति और शेयर बाजारों पर नया दबाव बन सकता है।
वैश्विक बाजार फिलहाल इस उम्मीद पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि अमेरिका‑ईरान संघर्ष का कूटनीतिक समाधान निकल सकता है और दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग लाइनों में से एक—होर्मुज़ जलडमरूमध्य—धीरे‑धीरे सामान्य हो सकता है। यही उम्मीद तेल की कीमतों को नीचे और शेयर बाजारों को ऊपर ले जा रही है।
लेकिन जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम—खासकर उसके बड़े 60% समृद्ध यूरेनियम भंडार—पर स्पष्ट समझौता नहीं होता, तब तक यह बाजार तेजी स्थायी से ज्यादा नाजुक मानी जाएगी।
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