Anthropic ने यह शर्त तभी मानने को कहा जब दो सुरक्षा सीमाएँ बनी रहें:
Anthropic के CEO Dario Amodei ने कहा कि इन शर्तों को हटाना कंपनी के लिए नैतिक रूप से स्वीकार्य नहीं है—even अगर इसका मतलब यह हो कि कंपनी को यह बड़ा सरकारी कॉन्ट्रैक्ट छोड़ना पड़े।
आखिरकार बातचीत टूट गई और साझेदारी समाप्त हो गई।
27 फरवरी 2026 को रक्षा सचिव Pete Hegseth ने घोषणा की कि Anthropic को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए supply chain risk के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
यह वर्गीकरण आमतौर पर उन तकनीकी कंपनियों पर लगाया जाता है जिन्हें संवेदनशील सरकारी सिस्टम के लिए जोखिम माना जाता है। इस मामले में, हालांकि, यह निर्णय किसी सार्वजनिक तकनीकी खामी या सुरक्षा उल्लंघन के बजाय कॉन्ट्रैक्ट विवाद के बाद आया।
इस फैसले का असर यह हुआ कि:
इस पूरे विवाद के केंद्र में AI शासन (AI governance) को लेकर मूलभूत मतभेद था।
Pentagon का दृष्टिकोण:
Anthropic का दृष्टिकोण:
इन दो “रेड लाइन” ने ही अंततः सौदा टूटने की स्थिति पैदा कर दी। कई रिपोर्टों के अनुसार कंपनी ने अपने सुरक्षा सिद्धांतों को बदलने के बजाय कॉन्ट्रैक्ट छोड़ने का फैसला किया।
Anthropic को supply chain risk घोषित करने के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने वैकल्पिक AI सिस्टम की तलाश शुरू कर दी।
रिपोर्टों के मुताबिक Pentagon अब OpenAI और Google जैसी कंपनियों के मॉडलों का परीक्षण कर रहा है। इन परीक्षणों में विभाग के कुछ चुनिंदा विशेषज्ञ उपयोगकर्ता—जिन्हें “power users” कहा गया—वास्तविक रक्षा कार्यों में इन मॉडलों की तुलना कर रहे हैं।
यह परीक्षण कार्यक्रम मार्च 2026 में शुरू हुआ और इसका उद्देश्य यह देखना है कि कौन‑सा मॉडल सैन्य कार्यप्रवाह में सबसे बेहतर काम करता है।
साथ ही Pentagon ने कई तकनीकी कंपनियों के साथ नए समझौते भी किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
Claude पहले से ही कई रक्षा प्रणालियों में गहराई से जुड़ा हुआ था। इसका इस्तेमाल गोपनीय नेटवर्क पर इंटेलिजेंस विश्लेषण और मिशन प्लानिंग जैसे कामों में किया जाता था।
इसे बदलने के लिए कई जटिल कदम उठाने पड़ते हैं:
Pentagon‑Anthropic विवाद केवल एक कॉन्ट्रैक्ट का मुद्दा नहीं है। यह एक बड़े सवाल को सामने लाता है:
क्या AI कंपनियों को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि सरकारें उनकी तकनीक का उपयोग कैसे करें?
सरकारें शक्तिशाली AI सिस्टम को रक्षा और खुफिया कार्यों में इस्तेमाल करना चाहती हैं। दूसरी ओर, कुछ AI कंपनियाँ चाहती हैं कि उनकी तकनीक पर नैतिक सीमाएँ लागू रहें—विशेष रूप से निगरानी और स्वायत्त हथियारों के मामले में।
आने वाले वर्षों में यह टकराव तय कर सकता है कि सरकारों और AI कंपनियों के बीच साझेदारी किस तरह की होगी—and आखिरकार सैन्य AI का भविष्य कैसा दिखेगा।
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