17 अप्रैल से लागू युद्धविराम अब भी कूटनीतिक ढांचे के रूप में मौजूद है, लेकिन रिपोर्टों में इसराइली हमले, हिज़्बुल्लाह की कार्रवाई और उल्लंघन के परस्पर आरोप सामने आए हैं [3][6]. इसराइल कहता है कि उसके हमले हिज़्बुल्लाह ठिकानों और खतरों के जवाब में हैं, जबकि लेबनानी स्रोत इन्हें युद्धविराम उल्लंघन के रूप में पेश कर रह...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Israel-Hezbollah Ceasefire: Why Fighting Hasn’t Stopped in Lebanon. Article summary: The U.S. mediated Lebanon ceasefire has been in force since April 17, but it has not stopped fighting: reports in early May describe Israeli strikes in southern Lebanon and the Bekaa Valley, with Israel and Hezbollah.... Topic tags: israel, hezbollah, lebanon, ceasefire, middle east. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# Watch: There's a ceasefire in Lebanon - but the fighting hasn't stopped. Israel and Hezbollah are still fighting in Lebanon despite a US-brokered ceasefire deal that took effect" source context "Israel and Hezbollah keep fighting despite Lebanon ceasefire" Reference image 2: visual subject "A screen capture from a video said to show the seizure of the container ships MSC
लेबनान में युद्धविराम खत्म नहीं हुआ है, लेकिन वह साफ-सुथरा विराम भी नहीं बन पाया है। अप्रैल के आखिरी दिनों और मई की शुरुआत से आई रिपोर्टों में दक्षिण लेबनान और पूर्वी बेका घाटी पर इसराइली हमलों, उत्तरी इसराइल में हिज़्बुल्लाह की कार्रवाई और दोनों तरफ से युद्धविराम तोड़ने के आरोपों का सिलसिला दिखता है .
AFP की रिपोर्ट, जिसे Hindustan Times ने प्रकाशित किया, के अनुसार युद्धविराम 17 अप्रैल से लागू है, जबकि इसराइल और हिज़्बुल्लाह एक-दूसरे पर इसके उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं . Chosun ने इसे अमेरिका की मध्यस्थता वाला अस्थायी युद्धविराम बताया, जिसे बढ़ती झड़पों ने संभावित टूटन की ओर धकेल दिया है
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यही वजह है कि “युद्धविराम” शब्द यहां कई बार भ्रामक लग सकता है। Dawn ने 4 मई को लेबनानी मीडिया और लेबनान की सरकारी National News Agency के हवाले से बताया कि दक्षिण लेबनान में नए इसराइली हमलों में कम से कम सात लोग मारे गए; इनमें सफद अल-बत्तीख, टायर के पास हमला और एक मोटरसाइकिल पर ड्रोन हमला शामिल थे . इसके दो दिन बाद Hindustan Times में प्रकाशित AFP रिपोर्ट ने बताया कि पूर्वी लेबनान की बेका घाटी में इसराइली हमले में चार लोग मारे गए, जबकि इसराइली सेना ने कहा कि उसने दक्षिण में हिज़्बुल्लाह ठिकानों पर हमला किया और इससे पहले करीब दर्जनभर कस्बों के निवासियों को खाली करने की चेतावनी दी थी
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1 मई की Democracy Now रिपोर्ट ने लेबनान की National News Agency के हवाले से कहा कि दक्षिण लेबनान में एक ही दिन के इसराइली हमलों में 30 से अधिक लोग मारे गए, और उसी रिपोर्ट में कहा गया कि हिज़्बुल्लाह के ड्रोन ने उत्तरी इसराइल में 12 इसराइली सैनिकों को घायल किया . ये रिपोर्टें अलग-अलग घटनाओं और अलग रिपोर्टिंग अवधि से जुड़ी हैं, इसलिए इन्हें जोड़कर कोई एक पुष्ट कुल मृतक संख्या नहीं बनाई जानी चाहिए। लेकिन मिलकर ये तस्वीर साफ करती हैं कि संघर्षविराम बार-बार हमलों और जवाबी दावों से बाधित हो रहा है
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मुख्य अड़चन यह है कि दोनों पक्ष युद्धविराम का अर्थ अलग-अलग तरह से समझते हैं। इसराइल का कहना है कि उसके हमले हिज़्बुल्लाह के खिलाफ हैं और हिज़्बुल्लाह की ओर से उल्लंघन का जवाब हैं। Chosun Biz ने रिपोर्ट किया कि इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिज़्बुल्लाह के गढ़ों पर भारी हमलों का आदेश दिया, जब इसराइल ने दावा किया कि हिज़्बुल्लाह ने युद्धविराम का उल्लंघन किया; रिपोर्ट में नेतन्याहू को यह कहते हुए उद्धृत किया गया कि इसराइल “किसी भी खतरे के खिलाफ कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता” बनाए रखता है . Hindustan Times में प्रकाशित AFP रिपोर्ट के अनुसार इसराइली सेना ने दक्षिण लेबनान में अपने हमलों को हिज़्बुल्लाह ठिकानों पर कार्रवाई बताया
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लेबनानी अधिकारियों और मीडिया की व्याख्या अलग है। Dawn ने 4 मई की मौतों को इसराइली “युद्धविराम उल्लंघनों” का नतीजा बताया, जबकि Democracy Now ने इसराइली हमलों को अमेरिका-समर्थित युद्धविराम के और उल्लंघन के रूप में पेश किया . नतीजा यह है कि युद्धविराम का मतलब ही विवादित हो गया है: इसराइल सैन्य कार्रवाई को सुरक्षा या प्रवर्तन के तौर पर रखता है, जबकि लेबनानी स्रोत और हिज़्बुल्लाह इसराइली कार्रवाइयों को समझौते का उल्लंघन बताते हैं
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उपलब्ध रिपोर्टों में इस युद्धविराम को अंतिम शांति समझौते के रूप में नहीं बताया गया है। Chosun ने इसे अमेरिका की मध्यस्थता वाला अस्थायी युद्धविराम कहा और लिखा कि इसराइल और हिज़्बुल्लाह एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाते हुए हमले कर रहे हैं, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ी .
यही अस्थायी चरित्र अहम है, क्योंकि कूटनीति और सैन्य दबाव साथ-साथ चल रहे हैं। Xinhua ने 28 अप्रैल को इसराइल के Kan TV और इसराइली अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया कि इसराइल मौजूदा युद्धविराम को मध्य मई तक बढ़ाए जाने को लेबनान के साथ स्थायी समझौते की आखिरी खिड़की मान रहा है। इसी रिपोर्ट में एक सरकारी स्रोत के हवाले से कहा गया कि अगर स्थायी समझौता नहीं हुआ, तो इसराइल लेबनान में हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई बढ़ा सकता है .
हालिया रिपोर्टों का बड़ा हिस्सा दक्षिण लेबनान पर केंद्रित है, जहां Dawn और Democracy Now ने घातक इसराइली हमलों की सूचना दी और जहां इसराइली सेना ने कहा कि वह हिज़्बुल्लाह ठिकानों पर हमला कर रही थी . लेकिन Hindustan Times में प्रकाशित AFP रिपोर्ट ने पूर्वी बेका घाटी में भी घातक इसराइली हमले का जिक्र किया, जिससे संकेत मिलता है कि हिंसा सिर्फ सीमा के किसी संकरे इलाके तक सीमित नहीं है
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संघर्ष को समझने की कोशिश कर रहे पाठकों के लिए यह भौगोलिक फैलाव अहम संकेत है। दक्षिण लेबनान से लगातार आ रही रिपोर्टें सीमा क्षेत्र में अनसुलझे टकराव की ओर इशारा करती हैं, जबकि पूर्व में बेका घाटी जैसे इलाके में हमलों की रिपोर्ट दिखाती है कि संघर्ष लेबनान के भीतर और फैल सकता है .
तीन बातें बताएंगी कि युद्धविराम संभल रहा है या और कमजोर पड़ रहा है।
पहली, क्या मध्य मई की बताई गई समयसीमा से पहले कोई स्थायी व्यवस्था बनती है . दूसरी, क्या नए हमले मुख्य रूप से दक्षिण लेबनान तक सीमित रहते हैं या बेका घाटी जैसे इलाकों तक भी पहुंचते हैं
. तीसरी, क्या हिज़्बुल्लाह की कार्रवाई और इसराइली हमले साथ-साथ बढ़ते हैं, क्योंकि हालिया रिपोर्टिंग में हिज़्बुल्लाह ड्रोन से इसराइली सैनिकों के घायल होने, इसराइल के “खतरे” के खिलाफ कार्रवाई की स्वतंत्रता के दावे और दोनों ओर से युद्धविराम उल्लंघन के आरोप पहले ही दर्ज हैं
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इसराइल और हिज़्बुल्लाह इसलिए अब भी लड़ रहे हैं क्योंकि युद्धविराम ने मूल विवाद—किसे उल्लंघन माना जाए, किसे जवाबी कार्रवाई कहा जाए और इसराइल को कथित हिज़्बुल्लाह खतरों पर हमला करने की कितनी छूट हो—हल नहीं किया है। फिलहाल यह स्थिर शांति से ज्यादा एक विवादित ढांचा है: इसराइल कहता है कि वह खतरों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, लेबनानी स्रोत घातक हमलों को उल्लंघन बताते हैं, और कूटनीति के पास अस्थायी विराम को टिकाऊ व्यवस्था में बदलने के लिए सीमित समय है .
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17 अप्रैल से लागू युद्धविराम अब भी कूटनीतिक ढांचे के रूप में मौजूद है, लेकिन रिपोर्टों में इसराइली हमले, हिज़्बुल्लाह की कार्रवाई और उल्लंघन के परस्पर आरोप सामने आए हैं [3][6].
17 अप्रैल से लागू युद्धविराम अब भी कूटनीतिक ढांचे के रूप में मौजूद है, लेकिन रिपोर्टों में इसराइली हमले, हिज़्बुल्लाह की कार्रवाई और उल्लंघन के परस्पर आरोप सामने आए हैं [3][6]. इसराइल कहता है कि उसके हमले हिज़्बुल्लाह ठिकानों और खतरों के जवाब में हैं, जबकि लेबनानी स्रोत इन्हें युद्धविराम उल्लंघन के रूप में पेश कर रहे हैं [2][3][4][7].
अब निगाहें मध्य मई तक स्थायी व्यवस्था पर हैं; रिपोर्टों के अनुसार इसराइल ने इस अवधि को स्थायी समझौते की आखिरी खिड़की माना है [5].