इस साल इज़राइल का प्रतिनिधित्व 28 वर्षीय गायक नोआम बेट्टान (Noam Bettan) कर रहे हैं, जो गीत “Michelle” गा रहे हैं। उनका सेमी‑फाइनल प्रदर्शन ही विवाद का प्रमुख केंद्र बन गया।
जैसे ही बेट्टान मंच पर आए, एरीना के अंदर कुछ दर्शकों ने नारे लगाकर प्रदर्शन करने की कोशिश की। लाइव शो के दौरान “Stop, stop the genocide” और “Free, free Palestine” जैसे नारे सुनाई दिए ।
आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शन बाधित करने की कोशिश के बाद चार दर्शकों को एरीना से बाहर निकाल दिया गया ।
इन घटनाओं और कुछ दर्शकों की हूटिंग के बावजूद, बेट्टान को पर्याप्त अंक मिले और वे सेमी‑फाइनल से ग्रैंड फाइनल के लिए क्वालीफाई करने में सफल रहे ।
इज़राइल की भागीदारी के विरोध में इस साल पाँच देशों के सार्वजनिक प्रसारकों ने प्रतियोगिता से हटने का फैसला किया:
इन देशों का कहना है कि गाज़ा में मानवीय संकट के बीच प्रतियोगिता में भाग लेना उचित नहीं होगा। उनके हटने से इस साल प्रतिभागी देशों की संख्या पहले की तुलना में कम हो गई ।
विवाद इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि कई आलोचक रूस के Eurovision से निष्कासन का उदाहरण दे रहे हैं। रूस को 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया था।
कुछ लोगों का तर्क है कि गाज़ा संघर्ष के संदर्भ में इज़राइल के साथ भी वैसा ही व्यवहार होना चाहिए था। हालांकि Eurovision का आयोजन करने वाली संस्था European Broadcasting Union (EBU) ने इज़राइल को प्रतियोगिता से बाहर नहीं किया है ।
Eurovision आम तौर पर संगीत, रंगीन मंच प्रस्तुतियों और अंतरराष्ट्रीय मनोरंजन का उत्सव माना जाता है। लेकिन 2026 का संस्करण यह दिखा रहा है कि वैश्विक राजनीतिक संघर्ष किस तरह सांस्कृतिक आयोजनों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
फाइनल में नोआम बेट्टान का प्रदर्शन खास ध्यान आकर्षित करने वाला माना जा रहा है। हालांकि रिपोर्ट लिखे जाने तक प्रतियोगिता का अंतिम परिणाम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन यह तय है कि इस साल का Eurovision अपने संगीत से उतना ही, बल्कि उससे भी ज्यादा, राजनीतिक बहसों के कारण याद रखा जाएगा।
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