कंपनियों के लिए खास बात यह है कि यह डेटा अलग‑थलग रिपोर्ट में नहीं बल्कि उसी ऑपरेशनल डैशबोर्ड में दिखाई देता है जहाँ वे अपने क्लाउड खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर को पहले से मैनेज करते हैं।
इसका मतलब है कि इंजीनियरिंग और ऑपरेशंस टीमें सीधे देख सकती हैं कि कोई तकनीकी निर्णय—जैसे किस क्षेत्र में वर्कलोड चलाना या कितने कंप्यूट संसाधन उपयोग करना—लागत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों को कैसे प्रभावित करता है।
Greenpixie दो उभरते हुए ऑपरेशनल क्षेत्रों के बीच काम करता है:
इन दोनों को जोड़कर कंपनियाँ उन जगहों को पहचान सकती हैं जहाँ संसाधन व्यर्थ जा रहे हैं—जैसे कि खाली पड़े सर्वर या जरूरत से ज्यादा प्रोविजन किए गए कंप्यूट संसाधन। इन्हें ठीक करने से क्लाउड बिल भी घटता है और उत्सर्जन भी कम होता है।
उदाहरण के लिए, प्लेटफॉर्म टीमों को यह करने में मदद करता है:
Greenpixie की £4.7 मिलियन प्री‑सीरीज़ A फंडिंग का नेतृत्व VERBUND X Ventures ने किया, जो यूरोप की बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी VERBUND AG का वेंचर कैपिटल निवेश विभाग है। इस राउंड में Octopus Ventures, Armajaro Holdings और Green Angel Ventures ने भी निवेश किया।
इस फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी अपने सस्टेनेबिलिटी इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म को और मजबूत करने, नई सुविधाएँ जोड़ने और बड़े एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए समाधान को स्केल करने में करेगी।
AI और विशेष रूप से जनरेटिव AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने डेटा‑सेंटरों की ऊर्जा मांग को काफी बढ़ा दिया है।
गार्टनर के अनुसार, AI से जुड़े डेटा‑सेंटर ऊर्जा उपयोग में अगले दो वर्षों में 160% तक वृद्धि हो सकती है, और 2027 तक लगभग 40% AI‑केंद्रित डेटा सेंटर बिजली की उपलब्धता के कारण संचालन सीमाओं का सामना कर सकते हैं।
इस तेजी से बढ़ती मांग के कारण कंपनियों के सामने कई चुनौतियाँ आ रही हैं:
इसी वजह से अब सस्टेनेबिलिटी मेट्रिक्स केवल सालाना रिपोर्ट का हिस्सा नहीं रह गए हैं, बल्कि दैनिक आईटी ऑपरेशंस का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
Greenpixie की तकनीक का उपयोग कई बड़े संगठन कर रहे हैं, जिनमें Fortune 1000 कंपनियाँ जैसे Mastercard भी शामिल हैं।
ये कंपनियाँ प्लेटफॉर्म के जरिए यह समझ पाती हैं कि उनके एप्लिकेशन और कंप्यूट वर्कलोड वास्तविक दुनिया में कितनी ऊर्जा और उत्सर्जन पैदा करते हैं। इससे इंजीनियरिंग, फाइनेंस और सस्टेनेबिलिटी टीमें मिलकर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर फैसले ले सकती हैं।
प्लेटफॉर्म तथाकथित “ज़ॉम्बी” क्लाउड संसाधनों—यानी ऐसे सर्वर या वर्कलोड जो चल रहे हैं लेकिन उपयोग में नहीं हैं—की पहचान भी करता है। इन्हें बंद करने से कंपनियाँ लागत और उत्सर्जन दोनों घटा सकती हैं।
AI के तेज विस्तार के साथ कंपनियों को अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के पर्यावरणीय प्रभाव को भी समझना पड़ रहा है। Greenpixie इसी बदलाव का हिस्सा है—जहाँ सस्टेनेबिलिटी डेटा को ऑपरेशनल मेट्रिक की तरह देखा जा रहा है।
जब पर्यावरणीय डेटा को क्लाउड लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर एनालिटिक्स के साथ जोड़ा जाता है, तो कंपनियाँ ऐसे फैसले ले सकती हैं जो व्यावसायिक दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी दोनों को बेहतर बनाते हैं।
AI अपनाने की रफ्तार को देखते हुए, आने वाले समय में ऐसे टूल्स एंटरप्राइज क्लाउड मैनेजमेंट का सामान्य हिस्सा बन सकते हैं—जो छिपी हुई ऊर्जा और कार्बन लागत को सामने लाकर उन्हें कम करने में मदद करें।
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