फ्रांस बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए अब दूसरा रास्ता आजमा रहा है। देश की संवैधानिक परिषद ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर लागू होने वाले व्यापक प्रतिबंध को रोक दिया था। इसके बाद सरकार ने ऐसा संशोधित प्रस्ताव पेश किया है जिसमें पूरे प्लेटफॉर्म तक पहुंच बंद करने के बजाय कुछ खास फीचर्स को सीमित करने की बात है। असली बहस सिर्फ उम्र तय करने की नहीं है; सवाल यह भी है कि बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों से बचाते हुए उनके संवाद और अभिव्यक्ति के अधिकारों पर जरूरत से ज्यादा रोक कैसे न लगे।
3
15
पहले कानून में क्या होता?
फ्रांसीसी सांसदों ने जुलाई 2026 में एक कानून पारित किया था, जिसके तहत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे नए सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकते थे। प्लेटफॉर्मों को ऐसे मौजूदा अकाउंट भी बंद करने होते। इसे सितंबर से लागू किया जाना था।
12
19
लेकिन 14 अगस्त को संवैधानिक परिषद ने इसके मुख्य प्रावधान को रद्द कर दिया। परिषद ने कहा कि यह अभिव्यक्ति और संचार की स्वतंत्रता पर असंगत अतिक्रमण है। रिपोर्टों के अनुसार, नियम बहुत व्यापक था क्योंकि इसमें हर नाबालिग की व्यक्तिगत स्थिति या अलग-अलग सेवाओं से जुड़े अलग जोखिमों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था।
3
15
इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए हर तरह का प्रतिबंध असंवैधानिक है। संदेश यह है कि किसी भी ऐसे नियम को, जो नाबालिगों को व्यापक तौर पर ऑनलाइन संचार सेवाओं से दूर रखे, बहुत ठोस और अनुपातिक आधार पर टिकना होगा।
3
11
नए प्रस्ताव में क्या बदला है?
अदालत के फैसले के बाद फ्रांसीसी सरकार ने संशोधित प्रस्ताव पेश किया है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के मुताबिक, इसमें सभी अंडर-15 उपयोगकर्ताओं के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण रोक का मॉडल छोड़कर, ऐसे प्लेटफॉर्म फीचर्स पर पाबंदी लगाने की योजना है जिन्हें सरकार हानिकारक या लत लगाने वाला मानती है।
5
6
कानून के डिजाइन में यह बड़ा बदलाव है:
- पुराना मॉडल: 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से, एक श्रेणी के रूप में, बाहर रखना।
- नया रिपोर्टेड मॉडल: हर ऑनलाइन संवाद पर रोक के बजाय खास उत्पाद-फीचर्स से जुड़े जोखिमों को निशाना बनाना।
6
फिलहाल उपलब्ध सामग्री में प्रतिबंधित होने वाले फीचर्स की अंतिम सूची, किन सेवाओं पर कानून लागू होगा और उम्र सत्यापन का तरीका स्पष्ट नहीं है। यही बारीकियां कानून के व्यावहारिक असर और उपयोगकर्ताओं की निजता पर पड़ने वाले बोझ को तय करेंगी।
EU कानून के अनुरूप बनाने की कोशिश
रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस ने संशोधित उपाय की सूचना यूरोपीय आयोग को दे दी है।
6 यूरोपीय आयोग, यूरोपीय संघ की कार्यपालिका संस्था है और सीमा-पार डिजिटल सेवाओं को प्रभावित करने वाले राष्ट्रीय नियमों की निगरानी में उसकी भूमिका होती है।
फीचर-केंद्रित तरीका संवैधानिक परिषद की उस आपत्ति के ज्यादा अनुरूप दिखता है जिसमें सार्वभौमिक रोक को बहुत व्यापक बताया गया था। नया ढांचा सभी प्लेटफॉर्मों और सभी अंडर-15 उपयोगकर्ताओं को एक जैसा मानने के बजाय, खास डिजाइन और फीचर्स से पैदा होने वाले जोखिमों में अंतर करने की कोशिश करता है।
15
16
हालांकि, आयोग को सूचना देना मंजूरी मिल जाना नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों से यह तय नहीं होता कि आयोग अंतिम फ्रांसीसी प्रस्ताव का समर्थन करेगा या नहीं, कानून का अंतिम कानूनी ढांचा क्या होगा, और उम्र-सत्यापन तथा निजता से जुड़े सवालों को फ्रांस कैसे सुलझाएगा।
मैक्रों की समानांतर मांग: पूरे EU में अंडर-15 सीमा
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन से आग्रह किया है कि पूरे EU में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने वाला नया कानून प्रस्तावित किया जाए। उनका 29 अगस्त का पत्र फ्रांस के राष्ट्रीय कानून के विफल होने के बाद आया।
1
8
इसके पीछे राजनीतिक तर्क साफ है: बड़ी डिजिटल कंपनियां कई देशों में एक साथ काम करती हैं, जबकि राष्ट्रीय उम्र-सीमाएं और उनके लागू करने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। EU-स्तरीय मानक 27 सदस्य देशों के लिए एक साझा आधार बना सकता है। लेकिन उसे भी बाल सुरक्षा, नाबालिगों के संवाद के अधिकार और निजता का सम्मान करने वाले, व्यवहार्य उम्र-सत्यापन के बीच संतुलन बनाना होगा।
नीदरलैंड और स्पेन भी साझा EU नियम चाहते हैं
फ्रांस इस बहस में अकेला नहीं है। नीदरलैंड और स्पेन भी सोशल मीडिया के लिए EU-व्यापी न्यूनतम उम्र-सीमा की मांग कर रहे हैं। उनका प्रस्ताव वीडियो गेम, एआई चैटबॉट और युवाओं के लिए जोखिमपूर्ण मानी जाने वाली अन्य डिजिटल सेवाओं तक भी फैल सकता है। दोनों देशों ने EU स्तर पर एकरूप लागूकरण की मांग की है।
17
यूरोपीय आयोग से भी इस बढ़ते दबाव के बीच अपना प्रस्ताव लाने की अपेक्षा की जा रही थी।
17
24 लेकिन अभी कोई साझा EU रुख तय नहीं हुआ है। प्रमुख अनसुलझे सवाल हैं:
- न्यूनतम उम्र क्या हो;
- अकाउंट और पहुंच पर पूरी रोक हो या केवल कुछ फीचर्स पर प्रतिबंध;
- किन सेवाओं को दायरे में शामिल किया जाए;
- उम्र-सत्यापन प्रभावी होने के साथ-साथ निजता के लिए अनुपातिक कैसे रहे।
दूसरे देशों में अलग-अलग मॉडल
ऑस्ट्रेलिया: अंडर-16 के लिए व्यापक रोक
ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में देशभर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू किया। इसके दायरे में TikTok, YouTube, Instagram और Facebook जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
34
ब्रिटेन: ऑस्ट्रेलियाई मॉडल के साथ फीचर सीमाएं
ब्रिटेन सरकार ऑस्ट्रेलियाई मॉडल के आधार पर अंडर-16 सोशल मीडिया प्रतिबंध की योजना बना रही है, जिसे प्लेटफॉर्मों पर मजबूत उम्र जांच से सहारा दिया जाएगा। साथ ही, अंडर-18 के लिए लाइवस्ट्रीमिंग और अजनबियों द्वारा संपर्क जैसे फीचर्स पर भी रोक की योजना है। पहले नियमों को वर्ष के अंत तक संसद के सामने रखने और इन्हें वसंत 2027 से लागू करने का लक्ष्य बताया गया है।
32
33
जापान: पूर्ण प्रतिबंध के बजाय सुरक्षा उपाय
जापान ने अब तक उम्र के आधार पर सोशल मीडिया पर पूर्ण रोक से दूरी बनाई है। वहां की नीति-चर्चा मजबूत उम्र-सत्यापन, अधिक सुरक्षित डिफॉल्ट सेटिंग्स, फीचर सीमाओं और प्लेटफॉर्म संचालकों की ज्यादा जिम्मेदारी पर केंद्रित है।
50
53
फ्रांस के मामले से क्या सबक निकलता है?
फ्रांस का अदालती फैसला बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने की वैश्विक कोशिशों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल है। सरकारें बाल सुरक्षा के उपाय अपना सकती हैं, लेकिन कोई व्यापक प्रतिबंध तब कानूनी चुनौती में फंस सकता है जब वह संचार की स्वतंत्रता को जरूरत से ज्यादा सीमित करे या जिन जोखिमों को रोकना चाहता है, उनके अनुपात में उचित साबित न हो।
3
15
फ्रांस का संशोधित प्रस्ताव, मैक्रों की EU-स्तरीय अपील और ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन तथा जापान के अलग-अलग मॉडल एक ही चुनौती की ओर इशारा करते हैं: बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने में सिर्फ उम्र-सीमा तय करना पर्याप्त नहीं होगा। नियमों की सटीकता, उनका अनुपातिक होना और उन्हें लागू करने की व्यवहारिक क्षमता उतनी ही अहम होगी।